उपसर्ग

उपसर्ग क्या है?
उपसर्ग ऐसे शब्दांश जो किसी शब्द के पूर्व जुड़ कर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं या उसके अर्थ में विशेषता ला देते हैं।
जैसे-उप+कार=उपकार
हिन्दी में प्रयुक्त उपसर्ग
1.अ
2.अप
3.अन
4.अव
5.आ
6.नि
7.निर्
(
8.निस्
8.निस्
9.दुर्
10.दुस्
11.उप
12.परि
13.परा
14.प्र
15.वि
16.औ
17.सु
18.स
19.कु
20.पर
21.प्रति
22.सम्
23.भर
अर्थ शब्द 1 अ अभाव, निषेधअछूता, अथाह, अटल 2 अन अभाव, निषेधअनमोल, अनबन, अनपढ़ 3 कु बुरा कुचाल, कुचैला, कुचक्र 4 दु कम, बुरा दुबला, दुलारा, दुधारू 5 निकमीनिगोड़ा, निडर, निहत्था, निकम्मा 6 औहीन, निषेधऔगुन, औघर, औसर, औसान 7 भरपूराभरपेट, भरपूर, भरसक, भरमार 8 सुअच्छासुडौल, सुजान, सुघड़, सुफल 9 अधआधाअधपका, अधकच्चा, अधमरा, अधकचरा 10 उनएक कमउनतीस, उनसठ, उनहत्तर, उंतालीस 11 परदूसरा, बाद कापरलोक, परोपकार, परसर्ग, परहित 12 बिनबिना, निषेधबिनब्याहा, बिनबादल, बिनपाए, बिनजानेक्रमउपसर्गअर्थशब्द 1 कमथोड़ा, हीनकमज़ोर, कमबख़्त, कमअक्ल 2 खुश अच्छा खुशनसीब, खुशखबरी, खुशहाल, खुशबू 3 गैर निषेध गैरहाज़िर, गैरक़ानूनी, गैरमुल्क, गैर-ज़िम्मेदार 4 ना अ भावना पसंद, नासमझ, नाराज़, नालायक 5 ब और, अनुसार बनाम, बदौलत, बदस्तूर, बगैर 6 बा सहित बाकायदा, बाइज्ज़त, बाअदब, बामौका 7 बद बुरा बदमाश, बदनाम, बदक़िस्मत,बदबू 8 बे बिना बेईमान, बेइज्ज़त, बेचारा, बेवकूफ़ 9 ला रहित लापरवाह, लाचार, लावारिस, लाजवाब 10 सर मुख्य सरताज, सरदार, सरपंच, सरकार 11 हमसमान, साथवालाहमदर्दी, हमराह, हमउम्र, हमदम 12 हर प्रत्येक हरदिन, हरसाल, हरएक, हरबार क्रम उपसर्ग वे शब्द हैं जो अन्य शब्दों के पहले जोड़े जाते हैं और जुड़कर उनके अर्थ में वैशिष्ट्य ला देते हैं।

उपसर्ग प्र

हिंदी में बाइस (22) उपसर्ग हैं। प्र, परा, अप, सम्‌, अनु, अव, निस्‌, निर्‌, दुस्‌, दुर्‌, वि, आ (आं‌), नि, अधि, अपि, अति, सु, उत् /उद्‌, अभि, प्रति, परि तथा उप। इनका अर्थ इस प्रकार है:
अति – excessive, surpassing, over, beyond
अधि – above, additional, upon
अनु – after, behind, along, near, with, orderly
अप – away, off, back, down, negation, bad, wrong
अपि – placing over, uniting, proximity, in addition to
अभि – intensive, over, towards, on, upon
अव – down, off, away
आ – towards, near, opposite, limit, diminutive
उत्, उद् – up, upwards, off, away, out, out of, over
उप – near, inferior, subordinate, towards, under, on
दुस्, दुर्, दुः – bad, hard, difficult, inferior
नि – negation, in, into, down, back
निस्, निर्, निः – negative, out, away, forth, intensive
परा – away, off, aside
परि – round, about, fully
प्र – forth, on, onwards, away, forward, very, excessive, great
प्रति – towards, in opposition to, against, upon, in return,back, likeness, every
वि – without, apart, away, opposite, intensive, different
सम् – with, together, completely
सु – good, well, easy

उदाहरण
अति – (आधिक्य) अतिशय, अतिरेक;
अधि – (मुख्य) अधिपति, अध्यक्ष
अधि – (वर) अध्ययन, अध्यापन
अनु – (मागुन) अनुक्रम, अनुताप, अनुज;
अनु – (प्रमाणें) अनुकरण, अनुमोदन.
अप – (खालीं येणें) अपकर्ष, अपमान;
अप – (विरुद्ध होणें) अपकार, अपजय.
अपि – (आवरण) अपिधान = अच्छादन
अभि – (अधिक) अभिनंदन, अभिलाप
अभि – (जवळ) अभिमुख, अभिनय
अभि – (पुढें) अभ्युत्थान, अभ्युदय.
अव – (खालीं) अवगणना, अवतरण;
अव – (अभाव, विरूद्धता) अवकृपा, अवगुण.
आ – (पासून, पर्यंत) आकंठ, आजन्म;
आ – (किंचीत) आरक्त;
आ – (उलट) आगमन, आदान;
आ – (पलीकडे) आक्रमण, आकलन.
उत् – (वर) उत्कर्ष, उत्तीर्ण, उद्भिज्ज
उप – (जवळ) उपाध्यक्ष, उपदिशा;
उप – (गौण) उपग्रह, उपवेद, उपनेत्र
दुर्, दुस् – (वाईट) दुराशा, दुरुक्ति, दुश्चिन्ह, दुष्कृत्य.
नि – (अत्यंत) निमग्न, निबंध
नि – (नकार) निकामी, निजोर.
निर् – (अभाव) निरंजन, निराषा
निस् (अभाव) निष्फळ, निश्चल, नि:शेष.
परा – (उलट) पराजय, पराभव
परि – (पूर्ण) परिपाक, परिपूर्ण (व्याप्त), परिमित, परिश्रम, परिवार
प्र – (आधिक्य) प्रकोप, प्रसारित, प्रबल
प्रति – (उलट) प्रतिकूल, प्रतिच्छाया,
प्रति – (एकेक) प्रतिदिन, प्रतिवर्ष, प्रत्येक
वि – (विशेष) विख्यात, विनंती, विवाद
वि – (अभाव) विफल, विधवा, विसंगति
सम् – (चांगले) संस्कृत, संस्कार, संगीत,
सम् – (बरोबर) संयम, संयोग, संकीर्ण.
सु – (चांगले) सुभाषित, सुकृत, सुग्रास;
सु – (सोपें) सुगम, सुकर, स्वल्प;
सु – (अधिक) सुबोधित, सुशिक्षित.
कुछ शब्दों के पूर्व एक से अधिक उपसर्ग भी लग सकते हैं।
उदाहरण
प्रति + अप + वाद = प्रत्यपवाद
सम् + आ + लोचन = समालोचन
वि + आ + करण = व्याकरण
अत्युत्कृष्ट, निर्विकार, सुसंगति इत्यादि
उर्दू-फारसी के उपसर्ग
अल – निश्चित, अन्तिम – अलविदा, अलबत्ता
कम – हीन, थोड़ा, अल्प – कमसिन, कमअक्ल, कमज़ोर
खुश – श्रेष्ठता के अर्थ में – खुशबू, खुशनसीब, खुशकिस्मत, खुशदिल, खुशहाल, खुशमिजाज
ग़ैर – निषेध – ग़ैरहाज़िर ग़ैरकानूनी ग़ैरवाजिब ग़ैरमुमकिन ग़ैरसरकारी ग़ैरमुनासिब
दर – मध्य में – दरम्यान दरअसल दरहकीकत
ना – अभाव – नामुमकिन नामुराद नाकामयाब नापसन्द नासमझ नालायक नाचीज़ नापाक नाकाम
फ़ी – प्रति – फ़ीसदी फ़ीआदमी
ब – से, के, में, अनुसार – बनाम बदस्तूर बमुश्किल बतकल्लुफ़
बद – बुरा – बदनाम बदमाश बदकिस्मत बदबू बदहज़मी बददिमाग बदमज़ा बदहवास बददुआ बदनीयत बदकार
बर – पर, ऊपर, बाहर – बरकरार बरवक्त बरअक्स बरजमां कंठस्थ
बा – सहित – बाकायदा बाकलम बाइज्जत बाइन्साफ बामुलाहिज़ा
बिला – बिना – बिलावज़ह बिलालिहाज़ बिलाशक बिलानागा
बे – बिना – बेबुनियाद बेईमान बेवक्त बेरहम बेतरह बेइज्जत बेअक्ल बेकसूर बेमानी बेशक

ला – बिना, नहीं – लापता लाजबाब लावारिस लापरवाह लाइलाज लामानी लाइल्म लाज़वाल उपसर्ग शब्दांश या अव्यय जो किसी शब्द के पहले आकर उसका विशेष अर्थ प्रकट करते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं। उदाहरण: प्र + हार = प्रहार उप + कार = उपकार आ + हार = आहार उपसर्ग = उप (समीप) + सर्ग (सृष्टि करना) का अर्थ है- किसी शब्द के समीप आ कर नया शब्द बनाना। जो शब्दांश शब्दों के आदि में जुड़ कर उनके अर्थ में कुछ विशेषता लाते हैं, वे उपसर्ग कहलाते हैं। ‘हार’ शब्द का अर्थ है पराजय। परंतु इसी शब्द के आगे ‘प्र’ शब्दांश को जोड़ने से नया शब्द बनेगा – ‘प्रहार’ (प्र + हार) जिसका अर्थ है चोट करना। इसी तरह ‘आ’जोड़ने से आहार (भोजन), ‘सम्’ जोड़ने से संहार (विनाश) तथा ‘वि’ जोड़ने से ‘विहार’ (घूमना) इत्यादि शब्द बन जाएँगे। उपर्युक्त उदाहरण में ‘प्र’, ‘आ’, ‘सम्’ और ‘वि’ का अलग से कोई अर्थ नहीं है, ‘हार’ शब्द के आदि में जुड़ने से उसके अर्थ में इन्होंने परिवर्तन कर दिया है। इसका मतलब हुआ कि ये सभी शब्दांश हैं और ऐसे शब्दांशों को उपसर्ग कहते हैं। हिन्दी में प्रचलित उपसर्गों को निम्नलिखित भागों में विभाजित किया जा सकता है। 1. संस्कृत के उपसर्ग, 2. हिन्दी के उपसर्ग, 3. उर्दू और फ़ारसी के उपसर्ग, 4. अंग्रेज़ी के उपसर्ग, 5. उपसर्ग के समान प्रयुक्त होने वाले संस्कृत के अव्यय। क्रम उपसर्ग अर्थ शब्द 1 अतिअधिकअत्यधिक, अत्यंत, अतिरिक्त, अतिशय 2 अधिऊपर, श्रेष्ठअधिकार, अधिपति, अधिनायक 3 अनुपीछे, समानअनुचर, अनुकरण, अनुसार, अनुशासन 4 अपबुरा, हीनअपयश, अपमान, अपकार 5 अभिसामने, चारों ओर, पासअभियान, अभिषेक, अभिनय,अभिमुख 6 अवहीन, नीच अवगुण, अवनति, अवतार, अवनति 7 आतक, समेतआजीवन, आगमन 8 उत्ऊँचा, श्रेष्ठ, ऊपरउद्गम, उत्कर्ष, उत्तम, उत्पत्ति 9 उपनिकट, सदृश, गौणउपदेश, उपवन, उपमंत्री, उपहार 10 दुर्बुरा, कठिनदुर्जन, दुर्गम, दुर्दशा, दुराचार 11 दुस्बुरा, कठिनदुश्चरित्र, दुस्साहस, दुष्कर 12 निर्बिना, बाहर, निषेधनिरपराध, निर्जन, निराकार, निर्गुण 13 निस्रहित, पूरा, विपरितनिस्सार, निस्तार, निश्चल, निश्चित 14 निनिषेध, अधिकता, नीचेनिवारण, निपात, नियोग, निषेध 15 पराउल्टा, पीछेपराजय, पराभव, परामर्श, पराक्रम 16 परिआसपास, चारों तरफपरिजन, परिक्रम, परिपूर्ण, परिणाम 17 प्रअधिक, आगेप्रख्यात, प्रबल, प्रस्थान, प्रकृति 18 प्रतिउलटा, सामने, हर एकप्रतिकूल, प्रत्यक्ष, प्रतिक्षण, प्रत्येक 19 विभिन्न, विशेषविदेश, विलाप, वियोग, विपक्ष 20 सम्उत्तम, साथ, पूर्णसंस्कार, संगम, संतुष्ट, संभव 21 सुअच्छा, अधिकसुजन, सुगम, सुशिक्षित, सुपात्रक्रमउपसर्ग अर्थ शब्द 1 सब अधीन, नीचे सब-जज सब-कमेटी, सब-इंस्पेक्टर 2 डिप्टी सहायक डिप्टी-कलेक्टर, डिप्टी-रजिस्ट्रार, डिप्टी-मिनिस्टर 3 वाइस सहायक वाइसराय, वाइस-चांसलर, वाइस-प्रेसीडेंट 4 जनरल प्रधान जनरल मैनेजर, जनरल सेक्रेटरी 5 चीफ़ प्रमुख चीफ़-मिनिस्टर, चीफ़-इंजीनियर, चीफ़-सेक्रेटरी 6 हेडमुख्यहेडमास्टर, हेड क्लर्कक्रम अर्थ शब्द 1 अधःनीचे अधःपतन, अधोगति, अधोमुखी, अधोलिखित 2 अंतः भीतरीअंतःकरण, अंतःपुर, अंतर्मन, अंतर्देशीय 3 अ अभावअशोक ,अकाल, अनीति 4 चिर बहुत देर चिरंजीवी, चिरकुमार, चिरकाल, चिरायु 5 पुनर् फिर पुनर्जन्म, पुनर्लेखन, पुनर्जीवन 6 बहिर् बाहर बहिर्गमन, बहिष्कार 7 सत् सच्चा सज्जन, सत्कर्म, सदाचार, सत्कार्य 8 पुरा पुरातन पुरातत्त्व, पुरावृत्त 9 सम समान समकालीन, समदर्शी, समकोण, समकालिक 10 सह साथ सहकार, सहपाठी, सहयोगी, सहचर
‘उपसर्ग’ के अन्य अर्थ
(1) बुरा लक्षण या अपशगुन
(2) वह पदार्थ जो कोई पदार्थ बनाते समय बीच में संयोगवश बन जाता या निकल आता है (बाई प्राडक्ट)। जैसे-गुड़ बनाते समय जो शीरा निकलता है, वह गुड़ का उपसर्ग है।
(३) किसी प्रकार का उत्पात, उपद्रव या विघ्न
योगियों की योगसाधना के बीच होनेवाले विघ्न को उपसर्ग कहते हैं। ये पाँच प्रकार के बताए गए हैं : (1) प्रतिभ, (2) श्रावण, (3) दैव, (4)। मुनियों पर होनेवाले उक्त उपसर्गों के विस्तृत विवरण मिलते हैं। जैन साहित्य में विशेष रूप से इनका उल्लेख रहता है क्योंकि जैन धर्म के अनुसार साधना करते समय उपसर्गो का होना अनिवार्य है और केवल वे ही व्यक्ति अपनी साधना में सफल हो सकते हैं जो उक्त सभी उपसर्गों को अविचलित रहकर झेल लें। हिंदू धर्मकथाओं में भी साधना करनेवाले व्यक्तियों को अनेक विघ्नबाधाओं का सामना करना पड़ता है किंतु वहाँ उन्हें उपसर्ग की संज्ञा यदाकदा ही गई है।

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