एक किसान कौन से व्यापार से अधिक पैसा कमा सकता है? आप भी जानिए

किसान उन्हें कहा जाता है, जो खेती का काम करते हैं। इन्हें कृषक और खेतिहर के नाम से भी जाना जाता है। ये बाकी सभी लोगो के लिए खाद्य सामग्री का उत्पादन करते है। इसमें फसलों को उगाना, बागों में पौधे लगाना, मुर्गियों या इस तरह के अन्य पशुओं की देखभाल कर उन्हें बढ़ाना भी शामिल है। कोई भी किसान या तो खेत का मालिक हो सकता है या उस कृषि भूमि के मालिक द्वारा काम पर रखा गया मजदूर हो सकता है।
अच्छी अर्थव्यवस्था वाले जगहों में किसान ही खेत का मालिक होता है और उसमें काम करने वाले उसके कर्मचारी या मजदूर होते हैं। हालांकि इससे पहले तक केवल वही किसान होता था, जो खेत में फसल उगाता था और पशुओं, मछलियों आदि की देखभाल कर उन्हें बढ़ाता था।
सब्जियों की खेती करने वालों को दोधारी तलवार पर चलना पड़ता है, क्योंकि ज्यादातर सब्जियों को अनाजों की तरह गोदामों में नहीं भर सकते. लिहाजा नुकसान किसानों का और फायदा बिचौलियों, आढ़तियों व सब्जी उत्पाद बनाने वाली कंपनियों का होता है.
इसलिए सब्जियों की खेती व कारोबार में बदलाव जरूरी है, ताकि किसानों को नुकसान न हो.
ज्यादा कमाई के लिए किसान करें सब्जियों की प्रोसेसिंग
आमतौर पर आलू, प्याज, मटर, लहसुन व टमाटर जैसी सब्जियां उगा कर मंडी में बेचने से किसानों का कल्याण नहीं होने वाला. अगर उन्हें जिंदगी में कुछ करना है और रईस बनना है, तो इस के लिए उन्हें नई तकनीकों का सहारा ले कर नए रास्ते अपनाने होंगे.
क्या करें किसान
ज्यादातर किसान आज भी सब्जियां उगाने व मंडी में ले जा कर बेच देने की पुरानी घिसीपिटी लीक पर ही चल रहे हैं. लिहाजा कड़ी मेहनत के बावजूद उन्हें मुनाफा मिलना तो दूर, उपज की वाजिब कीमत भी नहीं मिलती है.
लिहाजा जरूरी है कि किसान, नई तकनीक अपनाएं और कम जमीन में जल्दी, ज्यादा व बेहतर क्वालिटी की उपज देने वाली सब्जियों की नई किस्में ज्यादा से ज्यादा लगाएं.
करें प्रोसेसिंग
सब्जियों की खेती से ज्यादा कमाने के लिए लाजिम है कि किसान सब्जियों की कुल उपज को सीधे मंडी ले जा कर कच्चे माल की तरह न बेचें. हालांकि इस से किसानों को उन की उपज की कीमत तुरंत मिल जाती है, लेकिन कम मिलती है.
इसलिए किसान पोस्ट हार्वेस्ट यानी कटाई बाद इस्तेमाल होने वाली बेहतर व किफायती तकनीक सीखें ताकि सब्जियों को खराब होने से बचाया जा सके. किसान माली नुकसान से बचने के लिए नए उपायों पर ध्यान दें.
गांव में ही सब्जियों की प्रोसेसिंग इकाई लगाएं. अपने बच्चों को पढ़ालिखा कर इस रोजगार में लगाएं. साथ ही साथ राष्ट्रीय बागबानी मिशन आदि एजेंसियों द्वारा चलाई रही सरकारी स्कीमों के तहत मिल रही सहूलियतों का फायदा उठाएं.
इस के लिए सब से पहले किसान यह देखें कि किस इलाके में किस सब्जी की बहुतायत है. उन में किसी सब्जी से कौन से उत्पाद, कैसे व कहां तैयार करने हैं. फिर उस के बारे में सिलसिलेवार पूरी, सही व नई जानकारी इकट्ठी करें. हो सके तो किसी ऐसी इकाई में काम कर के प्रोसेसिंग, पैकिंग व बाजार में बेचने तक का तजरबा भी हासिल करें.
सब्जियों को साल भर के लिए महफूज रखने व खाने लायक रखने का काम नया नहीं है.
आलू, गोभी व गाजर जैसे सब्जियों को पहले भी बेमौसम में इस्तेमाल करने के लिए सुखा कर रख लिया जाता था. पुराने जमाने में सब्जियों के टुकड़ों को तेल, नमक, चीनी, सिरके वगैरह में डाल कर या सुखा कर महफूज रखा जाता था. आलू की पिट्ठी से बडि़यां, चिप्स व पापड़ बनते थे. सिरके में मूली, प्याज, मिर्च और गाजर डाले जाते थे. बहुत से गांवों, कसबों और शहरों में यह सिलसिला कमोबेश आज भी बरकरार है.
अब सब्जियों को सुख कर, ठंडा कर के नमी, फफूंदी व कीटाणुरहित डब्बाबंदी की जाती है. यदि किसान खुद अपनी उपज का बेहतर इस्तेमाल करने की गरज से यह सहायक रोजगार करें, तो इस काम में फायदे की बहुत गुंजाइश है.
फायदा ही फायदा
हरी मटर का उदाहरण लें. आमतौर पर इस का सीजन सर्दियों में 4-5 महीने चलता है, लेकिन मटर के सूखे व फ्रोजन पैक दाने पूरे साल मिलते व खाए जाते हैं. मदर डेरी की सफल समेत बहुत सी छोटीबड़ी कंपनियां मटर के फ्रोजन दाने प्रोसेस्ड कर के बेचती हैं. मटर के दाने सुखाने में 8-10 फीसदी तक नमी घट जाती है, लेकिन सीजनल मटर के मुकाबले दानों की कीमत भी 8-10 गुने तक ज्यादा रहती है. यह जरूरी नहीं कि सब्जियों के परिरक्षण का काम बड़े पैमाने पर ही शुरू किया जाए. अपनी कूवत के मुताबिक किसान छोटे पैमाने पर भी यह काम शुरू कर सकते हैं.
अमरावती, महाराष्ट्र में जब एक किसान महिला कमला बाई ने देखा कि बाजार में उन की हरी मिर्च की वाजिब कीमत नहीं मिल रही है, तो उन्होंने फूड प्रिजर्वेेशन के नजदीकी सेंटर पर ट्रेनिंग ली. फिर मिर्चों को चीर कर उन में अचार का मसाला भर कर थोड़ा सुखाया और पैकेटबंद कर के बेचना शुरू कर दिया. उन का यह काम चल निकला. पैसे 8 गुना ज्यादा मिले. अब उन का पैक्ड मिर्च अचार दूरदूर तक जाने लगा है.
कैसे सीखें
ज्यादातर राज्यों में कृषि विज्ञान केंद्र चल रहे हैं. कृषि विश्वविद्यालयों में फूड प्रोसेसिंग के सैक्शन होते हैं. कृषि उद्यान, उद्योग, खादी, ग्रामोद्योग और फलसब्जी प्रसंस्करण महकमों के ट्रेनिंग सेंटर हैं. साथ ही प्रधानमंत्री कौशल विकास स्कीम के तहत चुने हुए प्राइवेट सेंटरों पर भी किसानों को सब्जी परिरक्षण की बेसिक ट्रेनिंग व बहुत सी फायदेमंद जानकारी मिल सकती है.

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