कार्बनिक सेल

दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक सेंटीमीटर से भी छोटा सौर सेल बनाया है। इन्हें कार्बनिक सौर सेल या पॉलीमर सेल भी कहते हैं। इन 20 सेलों को कतारबद्ध कर एक इकाई में जोड़ा जा सकता है, जो छोटी सूक्ष्मदर्शी मशीनों को उर्जा प्रदान कर सकती है। पारम्परिक सौर सेल सिलिकॉन से बनाए जाते हैं लेकिन ये नेनो सौर सेल कार्बनिक पॉलीमर से बनाए गए हैं जिनके विद्युत गुण सिलिकॉन जैसे ही होते हैं। इनका प्रमुख लाभ ये है कि इन्हे किसी भी पदार्थ पर छिड़का जा सकता है, यानि कि कार की छत पर भी इस पॉलीमर का छिडकाव कर इस तरह के सौर सेल चिपकाए जा सकते है। इस समय इस तरह के सेल 7 वॉट विद्युत पैदा कर सकते हैं। वैज्ञानिक प्रयासरत हैं कि इनकी क्षमता को और बढाया जा सके जिससे भविष्य में ऐसे सेलों का अधिकाधिक उपयोग किया जा सके।

कार्बन नैनोट्यूब से
प्रकाश विद्युत प्रभाव में सिलिकॉन की अपेक्षा कार्बन नैनोट्यूब का प्रयोग एक उन्नत विकल्प के रूप में उभरा है। इस खोज से सौर सेलों में आपेक्षिक सुधार होगा। कॉर्नेल के शोधकर्ताओं ने फोटोडायोड कहे जाने वाले सरल सौर सेल का कार्बन नैनोट्यूब से निर्माण एवं प्रयोगशाला परीक्षण द्वारा उनकी कार्य-प्रणाली को पूर्णरूप से सुनिश्चित किया गया है। शोध समूह के प्रमुख सदस्य पौल मैकईयुएन भौतिकी के प्राध्यापक हैं व जीवूंग पार्क रसायनशास्त्र और रसायनिक जीव विज्ञान के सहायक प्राध्यापक हैं। इस शोध में नयी फ़ोटोडायोड द्वारा प्रकाश को विद्युत में अंतरण करने की प्रभावशाली प्रकिया और बहने वाली विद्युत धारा में कई गुना वृद्धि दर्शायी गयी है। सौर सेल में सिंगल-वॉलड कार्बन नैनोट्यूब का प्रयोग किया है जो मूलत: एक ग्रैफीन की बेलनाकार चादर है। लगभग डी.एन.ए. अणु के बराबर आकार वाली नैनोट्यूब को दो विद्युत संपर्कों के बीच तार से जोड़ा गया है जो दो विद्युत द्वारों पर बंद होती है जिसमें से एक ऋणावेशी और दूसरा धनावेशित है। इस का आधार पहले हुई एक शोध है जिसमें वैज्ञानिकों ने सिंगल-वॉलड नैनोट्यूब का प्रयोग करके एक डायोड बनाया था जो एक सरल ट्रांजिस्टर है और विद्युत धारा को केवल एक दिशा में बहने देता है। इस बार कॉर्नेल शोध समूह ने इसका प्रकाश पर प्रभाव प्रयोग किया है। नैनोट्यूब के विभिन्न क्षेत्रों पर अलग-अलग रंग की लेज़र चमकाने पर फोटोन ऊर्जा के उच्च स्तर पर उत्पन्न होने वाली विद्युत धारा के गुणक प्रभाव पड़ता है, यानि विद्युत धारा में बढ़ोत्तरी होती है। यही विद्युत ऊर्जा भंडार की जाती है।

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