भाखड़ा नंगल डैम के रोचक तथ्य

भारतीय योजनाकारों और अभियन्‍ताओं द्वारा दो मुख्‍य महत्‍वपूर्ण निर्णय लिए गए। पहला निर्णय, भाखडा बांध की अपेक्षा पहले भाखडा नहर प्रणाली निर्मित करने का था तथा दूसरा निर्णय विदेशी विशेषज्ञों की सहायता से विभागीय रूप में बांध का निर्माण करना था। यद्यपि यू.एस.बी आर भाखडा बांध का डिजाइन सलाहकार था फिर भी इसका क्रियावयन सिंचाई विभाग के भारतीय अभियन्‍ताओं के हाथ में आया। अप्रैल, 1952 के पश्‍चात जब मि. एम. हारवे स्‍लोकम अमेरिका से निर्माण तकनीशियनों तथा अभियन्‍ताओं की अपनी टीम के साथ आए तो इसका पूर्ण रूप से सक्रिय निर्माण कार्य प्राम्‍भ हुआ।
बाँध एक अवरोध है जो जल को बहने से रोकता है और एक जलाशय बनाने में मदद करता है। इससे बाढ़ आने से तो रुकती ही है, जमा किये गया जल सिंचाई, जलविद्युत, पेय जल की आपूर्ति, नौवहन आदि में भी सहायक होती है।
भाखड़ा नंगल डैम की जानकारी और प्रमुख पर्यटन स्थल –
भाखड़ा नांगल बांध हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में सतलुज नदी पर भाखड़ा गाँव में स्थित है। बता दें कि इस बांध के जलाशय को गोबिंद सागर ’के रूप में जाना जाता है, जिसमें 9.34 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा होता है। यह बांध हर साल देश भर से पर्यटकों की एक बड़ी संख्या को अपनी तरफ आकर्षित करता है। भाखड़ा बांध नांगल शहर से 15 किमी दूर है। भाखड़ा नंगल बहुउद्देश्यीय बांध भारत के स्वतंत्र होने के बाद नदी घाटी विकास योजनाओं में से हैं।
यह दुनिया के सबसे ऊंचे गुरुत्वाकर्षण बांधों में से एक है। बांध द्वारा बनाया गया गोबिंदसागर जलाशय भारत का तीसरा सबसे बड़ा जलाशय है। भाखड़ा नांगल बांध टिहरी बांध के बाद चौथा सबसे बड़ा बांध है। आपको बता दें कि साल 2009 में भाखड़ा नांगल बांध पर्यटकों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।

  1. भाखड़ा बांध का इतिहास – History Of Bhakra Dam In Hindi
    भाखड़ा बांध 741 फीट ऊंचा है और इसमें चार स्पिलवे गेट हैं। बांध के लिए प्रारंभिक काम की शुरूवात 1946 में हुई थी जबकि इसका निर्माण 1948 में शुरू हुआ था। जवाहरलाल नेहरू ने 18 नवंबर 1955 को भाखड़ा की नींव में कंक्रीट की पहली बाल्टी डाली थी। साल 1963 के अंत तक इस बांध का निर्माण पूरा हो गया था। शुरुआत में परियोजना को पंजाब के उपराज्यपाल सर लुई डेन द्वारा शुरू किया गया था, लेकिन कुछ कारणों से निर्माण को रोक दिया गया था। भारत के स्वतंत्रत होने के बाद इसका काम मुख्य वास्तुकार राय बहादुर कुंवर सेन गुप्ता द्वारा जारी रखा गया था।
  2. भाखड़ा बांध के बारे में रोचक तथ्य –
    बहुउद्देश्यीय परियोजना-:भाखड़ा बांध बहुउद्देश्यीय परियोजना है क्योंकि इसको बनाने का उद्देश्य सतलुज-ब्यास नदी में बाढ़ को रोकना है और पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के निकटवर्ती राज्यों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना है। यह हाइड्रो-इलेक्ट्रिसिटी का भी प्रदाता है, जो राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और दिल्ली राज्यों द्वारा उत्पन्न होती है
    प्रबंधन-: भाखड़ा नांगल परियोजना का प्रशासन, रखरखाव और संचालन भाखड़ा प्रबंधन बोर्ड (बीएमबी) द्वारा किया जाता है। 15 मई 1976 को भाखड़ा प्रबंधन बोर्ड का नाम बदलकर भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ब्यास नदी पर बांधों के प्रबंधन के लिए किया गया था।
  3. भाखड़ा नांगल बांध के आस – पास के घूमने के पर्यटन और आकर्षण स्थल –
    भाखड़ा बांध हिमाचल प्रदेश का प्रमुख पर्यटन स्थल है, आप अगर शहर की यात्रा पर हैं तो डैम के पास नीचे दिए गए प्रमुख पर्यटन स्थलों की सैर भी कर सकते हैं।
    3.1 व्यास गुफा –
    व्यास गुफा, सतलज नदी के तट पर है, जहाँ महाकाव्य महाभारत के लेखक ऋषि व्यास तपस्या के दिनों में यहाँ रहे थे। यह गुफा 610 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और सतलुज के बाएं किनारे पर स्थित है। इन गुफाएँ की वजह से इस शहर को पहले शहर व्यासपुर के नाम से जाना जाता था। अगर आप इतिहास प्रेमी है तो आपको इन गुफाओं को देखने के लिए जरुर जाना चाहिए।
    3.2 कंदूर ब्रिज –
    कंदूर ब्रिज कभी सतलज पर यह पुल कभी एशिया का सबसे ऊँचा पुल था और 80 मीटर की ऊँचाई पर बना था, जो आज भी दुनिया के सबसे ऊँचे पुलों में से एक है। यह पुल चूना पत्थर की चट्टानों से घिरा हुआ है और नीचे की नदी हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने के पानी के कारण ग्रीष्मकाल के दौरान कगार पर होती है।
    3.3 श्री नैना देवी जी मंदिर –
    श्री नैना देवी जी का मंदिर हिमाचल प्रदेश राज्य के बिलासपुर जिले में एक पहाड़ी पर स्थित है। आपको बता दें कि यह मंदिर समुद्र तल से 1219 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है जिसका निर्माण राजा बीर चंद ने 8 वीं शताब्दी के दौरान करवाया था। यह मंदिर निर्माण के बाद कई लोककथाओं के लिए जाना जाता है और आज पर्यटकों और तीर्थयात्रियों द्वारा बहुत पवित्र माना जाता है। इस मंदिर में नियमित रूप में पर्यटकों की भीड़ बनी रहती है। नैना देवी मंदिर के आसपास कई रहस्यमय लोक कथाएँ हैं, जो पर्यटकों को यात्रा करने के लिए आकर्षित करती हैं।

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