वानस्पतिक शरीर की संरचना

कुछ एककोशिकीय जातियों, उदाहरणार्थ खमीर, के अतिरिक्त अन्य सभी जातियों का शरीर कोशिकामय होता है, जो सूक्ष्मदर्शीय ((माइक्रोस्कोपिक)) रेशों से निर्मित होता है और जिससे प्रत्येक दिशा में शाखाएँ निकलकर जीवाधार (substratum) के ऊपर या भीतर फैली रहती हैं। प्रत्येक रेशे को कवकतंतु (hypha) कहा जाता है और इन कवकतंतुओं के समूह को कवकजाल (mycelium) कहते हैं। प्रत्येक कवकतंतु एक पतली, पारदर्शी नलीय दीवार का बना होता है जिसमें जीवद्रव्य का एक स्तर होता है या जो जीवद्रव्य से पूर्णतया भरा होता है। ये शाखी या अशाखी रहते हैं और इनकी मोटाई 0.5 माइक्रान से लेकर 100 माइक्रान तक होती है (1 माइक्रान = एक मिलीमीटर का हजारवाँ भाग)।
जीवद्रव्य या तो अटूट पूरे कवकतंतु में फैला रहता है जिसमें नाभिक (nucleus) बिना किसी निश्चित व्यवस्था के बिखरे रहते हैं, अन्यथा कवकतंतु दीवारों का पट (septum) द्वारा विभाजित रहते हैं जिससे संरचना बहुकोशिकीय होती है। पहली अवस्था को बहुनाभिक (coenocytic) तथा दूसरी को पटयुक्त (septate) अवस्था कहते हैं। प्रत्येक कोशिका में एक, दो या अधिक नाभिक हो सकते हैं।
अधिकांश कवक के तंतु रंगहीन होते हैं, किंतु कुछ में ये विभिन्न रंगों से रँगे होते हैं।
साधारण कवक का शरीर ढीले कवकतंतुओं से निर्मित होता है किंतु कुछ उच्च कवकों के जीवनवृत्त की कुछ अवस्थाओं में उनसे कवकजाल घने होकर सघन ऊतक बनाते हैं जिसे संजीवितक (plectenchyma) और कूटजीवितक (preudoparenchyma)।
दीर्घितक ढीला ऊतक होता है, जिसमें प्रत्येक कवकतंतु अपना अपनत्व बनाए रखता है। कूटजीवितक में सूत्र काफी घने होते हैं तथा वे अपना ऐकात्म्य खो बैठते हैं और काटने पर उच्चवर्गीय पौधों के जीवितक कोशों (Parenchyma cells) के समान दिखाई पड़ते हैं। इन ऊतकों से विभिन्न प्रकार के वानस्पतिक और प्रजनन विन्यास (reproductive structure) का निर्माण होता है।
कवक की बनावट चाहे कितनी ही जटिल क्यों न हो, पर वे सभी कवकतंतुओं द्वारा ही निर्मित होते हैं। ये तंतु इतने सघन होते हैं कि वे ऊतक के रूप में प्रतीत होते हैं, किंतु कवकों में कभी भी वास्तविक ऊतक नहीं होता।
कोशिकाभित्ति (cell wall) की रासायनिक संरचना एवं कोशिका विज्ञान (cytology)
कुछ जातियों को छोड़कर कवकों की कोशिकाभित्तियों की रासायनिक व्याकृतियाँ (chemical composition) विभिन्न जातियों में भिन्न-भिन्न होती हैं। कुछ जातियों की कोशिकाभित्तियों में सेलुलोस या एक विशेष प्रकार का कवक सेल्यूलोस पाया जाता है तथा अन्य जातियों में काइटिन (chitin) कोशिकाभित्ति के निर्माण के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी होता हैं। कई कवकों में कैलोस (callose) तथा अन्य कार्बनिक पदार्थ भी कोशिकाभित्ति में पाए गए हैं।
कवकतंतु में नाभिक के अतिरिक्त कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) तैलविंदु तथा अन्य पदार्थ उपस्थित रहते हैं, उदाहरणार्थ कैल्सियम ऑक्सलेट, (calcium oxalate) के रवे, प्रोटीन कण इत्यादि। प्रत्येक जाति में प्रोटोप्लास्ट (protoplast) हरिमकणक (chloroplast) रहित होता है। यद्यपि कोशिकाओं में स्टार्च का अभाव होता है, तथापि एक दूसरा जटिल पौलिसैकेराइड ग्लाईकोजन (polysaccharide glycogen) पाया जाता है।

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