संधारणीय या टिकाऊ खेती के लाभ

संधारणीय कृषि अथवा टिकाऊ कृषि (Sustainable agriculture) पादप एवं जानवरों के उत्पादन की समन्वित कृषि प्रणाली है जो पर्यावरणीय सिद्धान्तों को ध्यान में रखकर की जाती है। संधारणीय कृषि दीर्घावधि…

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आलू की जैविक खेती के लिए जलवायु तथा भूमि

आलू एक सब्जी है। वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से यह एक तना है। इसका उद्गम स्थान भारत में ठण्डे पहाड़ी प्रदेश एवं दक्षिण अमेरिका का पेरू (संदर्भ) है। यह गेहूं,…

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इफको का मिशन और लक्ष्य

इफको या ‘इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड’ (IFFCO) विश्व का सबसे बड़ा उर्वरक सहकारिता संस्था है। इफको में 40 हजार सहकारिताएँ इसके सदस्य हैं। 3 नवम्बर 1967 को इंडियन फारमर्स…

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अरबी की खेती के लिए जलवायु एवं भूमि

अरबी या घुइयाँ (अंग्रेजी:Taro) के नाम से भी जाना जाता है | मुख्य रूप से इसकी खेती कन्द के लिए ही की जाती है | इसके अन्द की सब्जी बनायी…

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स्ट्रॉबेरी की खेती और खाद , फसल कटाई

स्ट्रॉबेरी फ़्रागार्या जाति का एक पेड़ होता है, जिसके फल के लिये इसकी विश्वव्यापी खेती की जाती है। इसके फल को भी इसी नाम से जाना जाता है। स्ट्रॉबेरी की…

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खीरा की खेती के लिए बीज की मात्रा एवं बुवाई

सलाद के रूप में सम्पूर्ण विश्व में खीरा का विशेष महत्त्व है। खीरा को सलाद के अतिरिक्त उपवास के समय फलाहार के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसके द्वारा…

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केंचुआ और केंचुआ खाद के उपयोग और उपयोग में सावधानियाँ

मिट्टी की दृष्टि से केचुँए से भूमि की गुणवत्ता में सुधार आता है। भूमि की जलधारण क्षमता बढ़ती है। भूमि का उपयुक्त तापक्रम बनाये रखने में सहायक। भूमि से पानी…

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केंचुआ खाद तैयार करने की विधि

केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट (Vermicompost) पोषण पदार्थों से भरपूर एक उत्तम जैव उर्वरक है। यह केंचुआ आदि कीड़ों के द्वारा वनस्पतियों एवं भोजन के कचरे आदि को विघटित करके बनाई…

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उड़द के खेत की तैयारी

उरद या उड़द एक दलहन होता है। उरद को संस्कृत में ‘माष’ या ‘बलाढ्य’; बँगला’ में माष या कलाई; गुजराती में अड़द; मराठी में उड़ीद; पंजाबी में माँह, अंग्रेज़ी, स्पेनिश…

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भूमि प्रदूषण के कारण और प्रभाव

प्रदूषण, पर्यावरण में दूषक पदार्थों के प्रवेश के कारण प्राकृतिक संतुलन में पैदा होने वाले दोष को कहते हैं। प्रदूषक पर्यावरण को और जीव-जन्तुओं को नुकसान पहुंचाते हैं। प्रदूषण का…

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