एसिटिक अम्ल के रासायनिक गुण

शुक्ताम्ल (एसिटिक अम्ल) CH3COOH जिसे एथेनोइक अम्ल के नाम से भी जाना जाता है, एक कार्बनिक अम्ल है जिसकी वजह से सिरका में खट्टा स्वाद और तीखी खुशबू आती है। यह इस मामले में एक कमज़ोर अम्ल है कि इसके जलीय विलयन में यह अम्ल केवल आंशिक रूप से विभाजित होता है। शुद्ध, जल रहित एसिटिक अम्ल (ठंडा एसिटिक अम्ल) एक रंगहीन तरल होता है, जो वातावरण (हाइग्रोस्कोपी) से जल सोख लेता है और 16.5 °C (62 °F) पर जमकर एक रंगहीन क्रिस्टलीय ठोस में बदल जाता है। शुद्ध अम्ल और उसका सघन विलयन खतरनाक संक्षारक होते हैं।
एसिटिक अम्ल एक सरलतम कार्बोक्जिलिक अम्ल है। ये एक महत्वपूर्ण रासायनिक अभिकर्मक और औद्योगिक रसायन है, जिसे मुख्य रूप से शीतल पेय की बोतलों के लिए पोलिइथाइलीन टेरिफ्थेलेट; फोटोग्राफिक फिल्म के लिए सेलूलोज़ एसिटेट, लकड़ी के गोंद के लिए पोलिविनाइल एसिटेट और सिन्थेटिक फाइबर और कपड़े बनाने के काम में लिया जाता है। घरों में इसके तरल विलयन का उपयोग अक्सर एक डिस्केलिंग एजेंट के तौर पर किया जाता है। खाद्य उद्योग में एसिटिक अम्ल का उपयोग खाद्य संकलनी कोड E260 के तहत एक एसिडिटी नियामक और एक मसाले के तौर पर किया जाता है।
एसिटिक अम्ल की वैश्विक मांग क़रीब 6.5 मिलियन टन प्रतिवर्ष (Mt/a) है, जिसमें से क़रीब 1.5 Mt/a प्रतिवर्ष पुनर्प्रयोग या रिसाइक्लिंग द्वारा और शेष पेट्रोरसायन फीडस्टोक्स या जैविक स्रोतों से बनाया जाता है। स्वाभाविक किण्वन द्वारा उत्पादित जलमिश्रित एसिटिक अम्ल को सिरका कहा जाता है।

नामकरण

शुक्ताम्ल (एसिटिक) का साधारण नाम संस्कृत शब्द शौक्त से व्युत्पन्न है, जिसका अर्थ है मोती की सीप। इसका पर्यायवाची शब्द इथेनोइक अम्ल IUPAC के स्थानापन्न नामकरण के अनुसार किया गया है।
जल रहित शुक्ताम्लका एक छोटा नाम हिमनदों शुक्ताम्ल है। घरेलु तापमान 16.7 डिग्री सेल्सियस (62 डिग्री फारेनहाईट) से जरा से कम तापमान पर बनने वाले बर्फ के जैसे क्रिस्टलों के जर्मन नाम ऐसेस्सिग (शाब्दिक रूप से हिम-सिरका) से भी ये नाम समानता रखता है।
शुक्ताम्ल के लिए सबसे आम संक्षिप्त नाम HOAc है जहाँ शुक शुक्तल (एसिटाइल) वर्ग CH3−C(=O) को दर्शाता है। अम्ल आधारित क्रियाओं के सन्दर्भ में अक्सर संक्षिप्तिकरण HAc उपयोग में लिया जाता है जहाँ शुक शुक्तीय (एसिटेट) ऋणायन(CH3COO−, संक्षिप्त रूप में AcO −), को इंगित करता है, हालांकि ये उपयोग अक्सर भ्रामक माना जाता है। शुक्ताम्ल का प्रयोगमिश्रित सूत्र C2H4O2 है। क्षारातु शुक्तीय लवण के निर्माण में सक्रिय हाइड्रोजन की भूमिका पर ज़ोर देने के लिए कुछ लोग इसका आण्विक सूत्र HC2H3O2 रूप में लिखते हैं।[1] इसकी संरचना को बेहतर तरीके से दर्शाने के लिए शुक्ताम्ल को प्राय: CH3-CO2-H, CH3COOH, या CH3CO2H लिखा जाता है। ion शुक्ताम्ल से उदजन (हाइड्रोजन) धनायन H+ के निकलने से शुक्तीय (एसिटेट) ऋणायन बनता है। शुक्तीय नाम का उल्लेख इस ऋणायन से बनने वाले लवण या शुक्ताम्ल के एक एस्टर के लिए कर सकते हैं।

इतिहास

पुरातन सभ्यता में सिरका को, बीयर और वाइन के हवा के संपर्क में आने का प्राकृतिक परिणाम माना जाता था क्योंकि, एसिटिक अम्ल उत्पन्न करने वाले जीवाणु पूरे विश्व में मौजूद हैं।
रसायन विद्या में एसिटिक अम्ल का उपयोग ई. पू. तीसरी शताब्दी में भी किया जाता था, जब ग्रीक दार्शनिक थियोफ्रेसस ने बताया कि कैसे सिरका और धातुओं की क्रिया से कला में उपयोगी रंगों, सफेद सीसा (लेड कार्बोनेट) और वर्डिग्रीस, [[कॉपर (II) एसिटेट|कॉपर(II) एसिटेट]] समेत ताम्र लवणों के हरे मिश्रण का निर्माण होता है। प्राचीन रोम में कड़वी वाइन को सीसे के बर्तनों में उबाल कर एक बहुत ही मीठा शर्बत सापा बनाया जाता था। सापा लेड एसीटेट से भरपूर था, जोकि एक मीठा पदार्थ था, जिसे की सीसे की शक्कर या साटम की चीनी कहा जाता था और जिसने रोमन कुलीन तंत्र में सीसे का ज़हर फैलाने में भागीदारी निभाई.
मुस्लिम कीमियागर जबीर इब्न हय्यान (गैबर) ने 8वीं सदी में पहली बार आसवन द्वारा सिरका से एसिटिक अम्ल अलग किया। पुनर्जागरण के समय कुछ धातु एसिटेट (मुख्य रूप से कॉपर (II) एसिटेट) के सूखे आसवन से ग्लेशियल एसिटिक अम्ल बनाया गया। 16वीं शताब्दी में जर्मन कीमियागर एन्ड्रीस लिबावियस ने ऐसी ही एक विधी का वर्णन किया और उसने इस तरह से बने ग्लेशियल एसिटिक अम्ल की तुलना सिरका से बने अम्ल से की। सिरका में जल की मौजूदगी से एसिटिक अम्ल के गुणों पर इतना गहरा प्रभाव पड़ता है कि सदियों तक रसायनशास्त्री ग्लेशियल एसिटिक अम्ल और सिरका से बने अम्ल को दो अलग पदार्थ मानते रहे। फ्रांसिसी रसायनशास्त्री पियरे एडेट ने उन्हे समान साबित किया।
सघन एसिटिक एसिड
1847 में जर्मन रसायनज्ञ हरमन कोल्बे ने पहली बार अकार्बनिक पदार्थों से एसिटिक अम्ल संश्लेषित किया। इस क्रिया अनुक्रम में कार्बन डीसल्फाइड के क्लोरीनीकरण से कार्बन टेट्राक्लोराइड, फिर पायरोलिसिस से टेट्राक्लोरोइथेलीन और जलीय क्लोरीनीकरण से ट्राइक्लोरोएसिटिक अम्ल और अन्त में वैद्युत अपघटन से एसिटिक अम्ल का निर्माण होता है।
1910 तक ज्यादातर ग्लेशियल एसिटिक अम्ल लकड़ी के आसवन द्वारा बने “पायरोलिग्नियस शराब” से बनाया जाता था। चूने के दूध के साथ क्रिया करा कर एसिटिक अम्ल को अलग किया जाता था और प्राप्त केल्सियम एसिटेट को सल्फ्यूरिक अम्ल से अम्लीयकृत करके एसिटिक अम्ल प्राप्त किया जाता था। उस समय जर्मनी 10 हज़ार टन ग्लैशियल एसिटिक अम्ल बना रही थी जो इंडिगो डाई के उत्पादन में प्रयुक्त एसिटिक अम्ल का करीब 30 प्रतिशत था।

रासायनिक गुण

कार्बोक्ज़िलिक अम्लों जैसे कि एसिटिक अम्ल के कार्बोक्जिल वर्ग(−COOH) का हाइड्रोजन (H) परमाणु को H+ आयन (प्रोटोन) के रूप में छोड़ देने की क्षमता उन्हे अम्लीय गुण प्रदान करती है। एसिटिक अम्ल 4.75 pKa मूल्य के साथ एक कमजोर अम्ल है, क्योंकि ये जलीय विलयन में प्रभावी रूप से मोनोप्रोटिक अम्ल है। एसिटेट (CH3COO−) इसका संयुग्मी क्षार है। एक 1.0 M विलयन (घरेलू सिरका जैसी सघनता) का pH 2.4 होना ये दर्शाता है कि एसिटिक अम्ल के केवल 0.4% अणु ही विभाजित हुए हैं।

एसिटिक अम्ल, कार्बोक्जिलिक अम्ल की विशिष्ट रासायनिक अभिक्रियाओं से गुज़रता है जैसे एल्केली से क्रिया करते हुए पानी और एक धातु इथेनोएट बनाता है, एक धातु से क्रिया करके धातु इथेनोएट बनाता है और जब कार्बोनेटों तथा हाइड्रोजन कार्बोनेटों से क्रिया कराई जाए तो एक धातु इथेनोएट, जल तथा कार्बन डाइ ऑक्साइड बनाता है। इनमें सबसे उल्लेखनीय अभिक्रिया है न्यूनीकरण द्वारा इथेनॉल बनाना और न्यूक्लिओफिलिक एसिल प्रतिस्थापन द्वारा एसिटाइल क्लोराइड जैसे यौगिक बनाना. दूसरे प्रतिस्थापन यौगिकों में [[एसिटिक एनहाइड्राइड|एसिटिक एनहाइड्राइड]] शामिल है जो एसिटिक अम्ल के दो अणुओं में से जल के निकल जाने से बनता है। इसी तरह फिशर एस्टरीकरण द्वारा एसिटिक अम्ल के एस्टर और मध्यस्थ बनाए जा सकते हैं। 440 °C से ऊपर गर्म करने पर एसिटिक अम्ल विघटित होकर कार्बन डाइ ऑक्साइड और मिथेन या जल और इथेनॉल बनाता है।
एसिटिक अम्ल अपनी विशेष गंध से पहचाना जा सकता है। एसिटिक अम्ल के लवणों के लिए एक रंगीन क्रिया है आयरन (III) क्लोराइड विलयन, जिसके परिणामस्वरूप गहरा लाल रंग बनता है जो अम्लीकरण के बाद गायब हो जाता है। आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड के साथ गर्म किये जाने पर एसीटेट काकोडाइल ऑक्साइड बनाते हैं जिसका उसकी बदबूदार वाष्प के कारण पता लगाया जा सकता है।

उत्पादन

एसिटिक अम्ल को कृत्रिम रूप से और जीवाणुओं के किण्वन, दोनों तरीकों से उत्पादित किया जाता है। आज विश्व उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत जैविक मार्ग से बनाया जाता है लेकिन ये महत्वपूर्ण है क्योंकि कई देशों के खाद्य शुद्धता कानूनों की बाध्यता है कि खाद्य पदार्थों में प्रयुक्त होने वाला सिरका जैविक मूल का होना चाहिए, रसायन उद्योगों में प्रयुक्त होने वाले एसिटिक अम्ल का 75% मिथेनॉल कार्बोनाइलिकरण से बनाया जाता है जिसे नीचे समझाया गया है। शेष के लिए वैकल्पिक तरीकों का प्रयोग किया जाता है। शुद्ध एसिटिक अम्ल का कुल वैश्विक उत्पादन 50 लाख टन प्रति वर्ष आंका गया है जिसका करीब आधा हिस्सा संयुक्त राज्य में उत्पादित होता है। यूरोपीय उत्पादन 1 Mt/a के करीब है जिसमें गिरावट आ रही है और जापान का उत्पादन 0.7 Mt/a प्रति वर्ष है। प्रतिवर्ष पुनर्नवीनीकरण से प्राप्त 1.5 Mt को मिलाकर विश्व बाजार में एसिटिक अम्ल का कुल उत्पादन 6.5 Mt/a है। शुद्ध एसिटिक अम्ल के दो सबसे बड़े निर्माता सीलेनीज और BP केमिकल्स हैं। दूसरे बड़े निर्माताओं में मिलेनियम केमिकल्स, स्टर्लिंग केमिकल्स, सैमसंग, ईस्टमैन और वैंन्सक इटेनोल्केमी शामिल हैं।

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