नवपाषाण युग का सम्पूर्ण इतिहास भाग – 4

प्रौद्योगिकी
नियोलिथिक लोग कुशल किसान थे जो फसलों की चौकसी करने, उनकी कटाई करने और उन्हें प्रसंस्कृत करने (जैसे दरांती ब्लेड और पीसने का पत्थर) और खाद्य उत्पादन (जैसे मिट्टी के बर्तन, हड्डी के सामान) के लिए आवश्यक तरह-तरह के औजारों का निर्माण करते थे। वे अन्य प्रकार के पत्थर के औजारों और गहनों का निर्माण करने में भी कुशल थे जिनमें प्रक्षेप्य सूई, माला और मूर्तियां शामिल थीं। लेकिन बड़े पैमाने पर जंगलों को साफ़ करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला परिष्कृत पत्थर की कुल्हाड़ी अन्य सभी औजारों में सर्वश्रेष्ठ था। बसूला की सहायता से उदाहरण के तौर पर आश्रय, संरचनाओं और नावों के लिए लकड़ियों को आकार देने की वजह से नई नवेली कृषि भूमि का इस्तेमाल करने में वे सक्षम हुए.
लेवंत, एनाटोलिया, सीरिया, उत्तरी मेसोपोटामिया और मध्य एशिया के नियोलिथिक लोग भी निपुण निर्माता थे जो मकानों और गांवों का निर्माण करने के लिए मिट्टी के ईंटों का इस्तेमाल करते थे। कैटल होयुक में मकानों को मनुष्यों और जानवरों के विस्तृत दृश्यों के साथ प्लास्टर और पेंट किया जाता था। यूरोप में टट्टरों और चित्रों से लंबे मकानों का निर्माण किया जाता था। मृतकों के लिए विस्तृत कब्रों का निर्माण किया जाता था। ये कब्र खास तौर पर आयरलैंड में काफी तादाद में हैं जहां आज भी कई हजार कब्र मौजूद हैं। ब्रिटिश द्वीपों में रहने वाले नियोलिथिक लोग अपने मृतकों के लिए लंबे स्मारकों और चैंबर मकबरों निर्माण करते थे और उच्चमार्गी शिविरों, हेन्जों, चकमक पत्थरों की सुरंगों और कर्सस समाधियों का निर्माण करते थे। भावी महीनों के लिए खाद्य का संरक्षण करने के तरीकों का पता लगाने के लिए भी यह जरूरी था जैसे अपेक्षाकृत हवाबंद डिब्बों का निर्माण करना और संरक्षक के रूप में नमक जैसे पदार्थों का इस्तेमाल करना।
अमेरिकास और पैसिफिक के लोगों ने यूरोपीय संपर्क के समय तक नियोलिथिक स्तर की औजार प्रौद्योगिकी को बरक़रार रखा। इसके अपवादों में महान झील क्षेत्र में पाए गए तांबे के कुछ हैचेट (कुल्हाड़ी) और स्पियरहेड (भाले की नोक) शामिल हैं। हालांकि इन क्षेत्रों में जटिल सामाजिक-राजनीतिक संगठन, निर्माण प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक ज्ञान एवं भाषाई संर्क्ति के विकास के कई उदाहरण हैं जो अफ्रीका और यूरेशिया की उत्तर-नियोलिथिक घटनाक्रमों के समान हैं। उनमें इंका, माया, प्राचीन हवाई, एज़्टेक, इरोक्युओईस, मिसिसिपियन और माओरी शामिल हैं।

वस्त्र
अधिकांश कपड़े संभवतः जानवरों की खाल से बने होते थे, जैसा कि बड़े पैमाने पर मिली हड्डी और सींग की सुइओं से पता चलता है जो कपड़ों की बजाय चमड़े को सिलने के लिए अधिक अनुकूल हैं। हालांकि ऊन के कपड़े और लाइनेन संभवतः ब्रिटिश नियोलिथिक युग में उपलब्ध थे; इस बात का संकेत मिलता खुदाई में प्राप्त छिद्रयुक्त पत्थरों से मिलता है जिनका इस्तेमाल (आकार के आधार पर) शायद धुरी छल्ले या करघे के वजन के रूप में किया जाता था। नियोलिथिक युग में पहने जाने वाले वस्त्र संभवतः ओत्जी द आइसमैन द्वारा पहने जाने वाले वस्त्रों की तरह ही होंगे हालांकि वह न तो ब्रिटिश था और न ही नियोलिथिक (क्योंकि वह परवर्ती ताम्र युग से संबंध रखता था).

शुरुआती बस्तियां
निओलिथिक मानव बस्तियों में शामिल हैं:

सीरिया में टेल कारामेल 10,700-9400 ईपू.
ग्रीस में फ़्रांचथी केव, एपिपेलियोलिथिक (10,000 ईपू.) बस्ती, जो 7500-6000 ई.पू. के बीच दोबारा बसी।
भारत में लहुरादेवा, 9000 ई.पू.
तुर्की में गोबेक्ली टेपे, 9000 ईसा पूर्व
लगभग 8350 ईपू के आसपास वेस्ट बैंक, निओलिथिक में एपिपेलियोलिथिक नैचुफियन संस्कृति से उत्पन्न होने वाला जेरिको.
तुर्की में नेवली कोरी, 8000 ईसा पूर्व
ईरान में गंज दारेह, 7000 ईसा पूर्व
तुर्की में केटालहोयूक, 7500 ई.पू.
चीन में पेंगतौशन संस्कृति, 7500-6100 ई.पू.
जॉर्डन में ‘ऐन गज़ल, 7250-5000 ई.पू.
ईरान में चोघा बोनुट, 7200 ई.पू.
भारत में झूसी, 7100 ई.पू.
बुल्गारिया में करानोवो, 6200 ई.पू.
सर्बिया में पेट्निका, 6000 ई.पू.
ग्रीस में सेस्क्लो, 6850 ई.पू. (जिसमें ± 660 वर्षों की त्रुटि की संभावना है)
ग्रीस में दिस्पिलियो, 5500 ईसा पूर्व
म्यांमार में पडाह-लिन केव्स, 6000 ईसा पूर्व
चीन में जिआहू, 7000 से 5800 ई.पू.
पाकिस्तान में मेहरगढ़, 7000 ई.पू.
नोसस ऑन क्रेते, 7000 ईसा पूर्व
मैसेडोनिया गणराज्य में पोरोदीन, 6500 ई.पू.
मैसेडोनिया गणराज्य में वर्श्निक (अन्ज़बेगोवो), 6500 ई.पू.
इटली में पिज्जो डि बोदी (वारेसे), लोम्बार्डी, 6320 ±80 ई.पू.
इटली के फ्रियूली में समरदेंचिया, 6050 ±90 ई.पू.
कुकुटेनी-ट्रिपिलन संस्कृति 5500-2750, ई.पू., यूक्रेन, मोल्दोवा और रोमानिया फर्स्ट सौल्ट वर्क्स में.
क्वेजों, पलवन, फिलीपिंस में टेबन केव कॉम्प्लेक्स; 5000-2000 ईपू
चीन में हेमुदु संस्कृति, 5000-4500 ई.पू., बड़े पैमाने पर चावल का वृक्षारोपण
ट्रिपीलियन संस्कृति की लगभग 2000 बस्तियां; 5400-2800 ई.पू.
माल्टा में मेगालिथिक मंदिर, 3600 ई.पू.
और्नके, स्कॉटलैंड में नैप ऑफ होवार तथा सकरा ब्रे; क्रमशः 3500 ईपू तथा 3100 ईपू से
आयरलैंड में बरू ना बोइने; 3500 ईसा पूर्व
लगभग 3000 ई.पू. से आयरलैंड में लाउ गुर
चीन में लाज़िया, 2000 ई.पू.
दुनिया का सबसे पुराना ज्ञात निर्मित मार्ग इंग्लैंड का स्वीट ट्रैक लगभग 3800 ईपू पुराना है और दुनिया की सबसे पुरानी मुक्त-खड़ी संरचना गोज़ो, माल्टा का निओलिथिक गन्तिजा का मंदिर है।

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