डेथ वैली का जलवायु और इतिहास की संपूर्ण जानकारी

डेथ वैली पूर्वी कैलिफोर्निया में स्थित एक रेगिस्तान है। यह मोजावे रेगिस्तान में स्थित है और उत्तरी अमेरिका के सबसे निचले, शुष्क, तथा गरम स्थानों में से एक है। डेथ वैली के भीतर स्थित बैडवॉटर नामक एक बेसिन, समुद्र तल से 282 फीट (86.0 मी॰) नीचे होने के साथ उत्तरी अमेरिका की सबसे निचली ऊंचाई का स्थान (36 ° 15 ‘N 116 ° 49.5’ W) है। 14,505 फीट (4,421 मी॰) की ऊंचाई के साथ यह बिंदु निकटस्थ अमेरिका के उच्चतम बिंदु माउंट व्हिटनी से केवल 84.6 मील (136.2 कि॰मी॰) की दूरी पर स्थित है। 10 जुलाई 1913 को फरनेस क्रीक पर 134 °फ़ै (56.7 °से.) के साथ डेथ वैली के पास पश्चिमी गोलार्ध के विश्वसनीय रूप से मापे गए सर्वाधिक तापमान का रिकॉर्ड है, जो कि 13 सितम्बर 1913 को लीबिया के अल अजीजिया में मापे गए 136 °फ़ै (57.8 °से.) के विश्व रिकॉर्ड से थोड़ा ही कम है।
कैलिफोर्निया और नेवादा की सीमा के निकट सिएरा नेवादा पहाड़ों के पूर्व के ग्रेट बेसिन में स्थित डेथ वैली, डेथ वैली नेशनल पार्क के अधिकांश हिस्से में फैली हुई है और मोजावे तथा कोलोराडो डेजर्ट्स बायोस्फीयर रिजर्व की प्रमुख विशेषता है। यह अधिकांशतः कैलिफोर्निया की इन्यो काउंटी में स्थित है। इसका विस्तार पूर्व के अमार्गोसा रेंज तथा पश्चिम के पैनामिंट रेंज के बीच उत्तर से दक्षिण में है; सिल्वानिया तथा आउल्सहेड पहाड़ क्रमशः इसकी उत्तरी तथा दक्षिणी सीमाओं का निर्माण करते हैं। इसका क्षेत्रफल लगभग 3,000 वर्ग मील (7,800 कि॰मी2) है। डेथ वैली की कई विशेषताएं समुद्र तल से नीचे पाए जाने वाले अन्य स्थानों के समान ही हैं। डेथ वैली उत्तरी अमेरिका का सबसे गमॅ और सूखा स्थान है। यह कैलिफोनिया के दक्षिण पूवॅ में नेवडा की सीमा के पास है।

भूविज्ञान

डेथ वैली, बेसिन तथा रेंज कॉन्फ़िगरेशन के सर्वश्रेष्ठ भूवैज्ञानिक (जियोलॉजिकल) उदाहरणों में से एक है। यह उत्तर दिशा में ओरिगोन तक फैले हुए वॉकर लेन नामक एक भूवैज्ञानिक ट्रफ (गर्त) के दक्षिणी छोर में स्थित है। यह घाटी राइट लेटरल स्ट्राइक स्लिप फॉल्ट प्रणाली द्वारा विभाजित है, जिसके प्रतीक हैं डेथ वैली फॉल्ट तथा फरनेस क्रीक फॉल्ट. लेफ्ट लेटरल गारलौक फॉल्ट का पूर्वी सिरा डेथ वैली फॉल्ट के आर-पार जाता है। फरनेस क्रीक और अमार्गोसा नदी इस घाटी से होकर बहती है लेकिन अंत में घाटी तल की रेत में गायब हो जाती है।
डेथ वैली में सॉल्ट पैन्स (नमक के डले) भी मौजूद हैं। वर्तमान भूवैज्ञानिक सहमति के अनुसार प्लेस्टोसीन युग के मध्य में डेथ वैली के वर्तमान स्थान पर कई अंतर्देशीय समुद्र (जिन्हें सामूहिक रूप से लेक मैनली कहा जाता है) स्थित थे। इस क्षेत्र के रेगिस्तान बनने के साथ ही पानी सूख गया और बच गया केवल ढेर सारा नमक (जैसे कि सामान्य सोडियम सॉल्ट तथा बोराक्स) जिसका इस क्षेत्र के आधुनिक इतिहास काल – मुख्यतः 1883 से 1907 तक – में इस्तेमाल किया गया।
सामान्यतः निम्न ऊंचाई वाले स्थानों का तापमान अधिक होता है क्योंकि सूर्य के कारण धरती के गरम होने पर गरम हवा ऊपर की तरफ उठती है, लेकिन ऊपर उठती हुई हवा (1) आसपास के ऊँचे स्थानों तथा, (2) अपने ऊपर की हवा के वजन (मूलतः वायुमंडलीय दबाव) के कारण फंसकर रह जाती है। जमीन तथा वायुमंडल के बीच हवा की मात्रा के अधिक होने के कारण (अधिक दूरी के कारण) काफी निम्न ऊंचाई वाले स्थानों का वायुमंडलीय दबाव समुद्र तल की समान परिस्थितियों की अपेक्षा अधिक होता है। इस दबाव के कारण धरती के ठीक ऊपर की ऊष्मा फंसकर रह जाती है और साथ ही अत्यंत गरम हवा को फ़ैलाने वाली वायु किरणों का भी निर्माण करती है। इस प्रकार, यह छाया अथवा अन्य कारकों के मौजूद रहने के बावजूद सभी क्षेत्रों में गर्मी को फ़ैलाने का काम करती है।
इस प्रक्रिया का डेथ वैली में विशेष महत्त्व है क्योंकि इसी के कारण उसे अपनी विशिष्ट जलवायु तथा भूगोल प्राप्त होता है। यह घाटी पहाड़ों से घिरी हुई है, जबकि इसकी सतह ज्यादातर सपाट और पौधों से रहित है, जिसके कारण काफी अधिक मात्रा में सूरज की गर्मी जमीन तक पहुँचने में सफल रहती है और मिटटी तथा पत्थरों द्वारा अवशोषित कर ली जाती है। जमीनी स्तर की हवा गरम होने पर ऊपर उठने लगती है और खड़ी ऊंचाई वाली पर्वत श्रृंखलाओं से ऊपर उठने के बाद यह थोड़ी ठंडी होकर अधिक संकुचित रूप में वापस घाटी की ओर आती है। उसके बाद सूर्य के कारण इस हवा का तापमान और अधिक हो जाता है और यह फिर से पहाड़ों की तरफ ऊपर उठने लगती है और हवा का यह ऊपर नीचे आने-जाने का चक्र एक कंवेक्शन ओवन के समान इसी प्रकार प्राकृतिक रूप से चलता रहता है। यह अत्यंत गरम हवा जमीन के तापमान को काफी अधिक मात्रा में बढ़ाकर गरम वायु किरणों का निर्माण करती है जो वायुमंडलीय दबाव तथा पहाड़ों के कारण फंसकर अधिकतर घाटी के भीतर ही बनी रहती है। इस प्रकार की गरम वायु किरणें डेथ वैली में हमेशा ही सूखे जैसी स्थिति का निर्माण करके घाटी के ऊपर से बादलों को गुजरने से रोकती हैं, जिसकी वजह से यहां वर्षण अक्सर विरगा (जल के धरती पर पहुंचाने से पहले ही वाष्पित हो जाना) के रूप में होता है। डेथ वैली के पास तापमान संबंधी काफी रिकॉर्ड हैं क्योंकि कई ऐसे करक यहां मौजूद हैं जो उच्च वायुमंडलीय दबाव का निर्माण करते हैं।

जलवायु

डेथ वैली की गहराई और आकार उसके गर्मियों के तापमान को प्रभावित करते हैं। यह घाटी समुद्र तल से 282 फीट (86 मी॰) नीचे एक लंबे, संकरे बेसिन के रूप में है जबकि इसके चारों ओर ऊंची तथा सीधी खड़ी पर्वत श्रृंखलाएं मौजूद हैं। स्पष्ट, शुष्क हवा और पेड़-पौधों के आभाव के कारण सूरज की गर्मी इसकी रेगिस्तानी सतह को काफी गरम कर देती है। गर्मियों की रात में भी ज्यादा राहत नहीं मिलती है क्योंकि रात का तापमान केवल 86 से 95 °फ़ै (30 से 35 °से.) सीमा तक ही गिरता है। इस घाटी में अत्यंत गरम हवा बहती रहती है जिसके कारण तापमान काफी अधिक हो जाता है।
डेथ वैली का सर्वाधिक तापमान 134 °फ़ै (57 °से.) 10 जुलाई 1913 को फरनेस क्रीक में दर्ज किया गया था। उस रिकॉर्ड के साथ अपने चरम पर पहुँचने वाली गर्मी की लहर के दौरान लगातार 5 दिनों तक 129 °फ़ै (54 °से.) या अधिक का तापमान दर्ज किया गया था। 100 °फ़ै (38 °से.)°F या अधिक तापमान वाले लगातार दिनों की सर्वाधिक संख्या 154 है जिसे 2001 की गर्मियों में दर्ज किया गया था। 1996 की गर्मियों में 40 दिनों तक तापमान 120 °फ़ै (49 °से.) से अधिक था तथा 105 दिनों तक 110 °फ़ै (43 °से.) से अधिक. 1917 में 52 दिन ऐसे थे जब तापमान 120 °फ़ै (49 °से.) या अधिक पहुंचा, जिनमे से 43 दिन तक तो लगातार ऐसा हुआ था। डेथ वैली तथा सागर के बीच चार प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएं पड़ती हैं और उनमे से प्रत्येक यहां पड़ने वाली वर्षा की मात्रा को प्रभावित करती है। सन 1929 तथा 1953 में पूरे वर्ष बिलकुल वर्षा नहीं हुई थी। 1931 से 1934 की अवधि अब तक की सबसे शुष्क अवधि रही है; इन 40 महीनों के दौरान केवल 0.64 इंच (16 मि॰मी॰) वर्षा दर्ज की गयी।

1961-2008 में डेथ वैली (फरनेस क्रीक) के मौसम स्टेशन ने 76.7 °फ़ै (24.8 °से.) का औसत वार्षिक तापमान दर्ज किया; जहाँ जनवरी का उच्चतम 66 °फ़ै (19 °से.) और जुलाई का 116 °फ़ै (47 °से.) रहा. 1934-1961 के दौरान काऊ क्रीक के मौसम स्टेशन ने 77.2 °फ़ै (25.1 °से.)°F का औसत वार्षिक तापमान दर्ज किया।
जुलाई 17-19, 1959 की अवधि ऐसे लगातार दिनों की सर्वाधिक बड़ी अवधि है जब रात्रिकालीन तापमान 100 °फ़ै (38 °से.) से नीचे नहीं गया। रात्रिकालीन निम्नतम तापमान का उच्चतम मान 103 °फ़ै (39 °से.) रहा है जिसे 5 जुलाई 1070 तथा 24 जुलाई 2003 को दर्ज किया गया।
तापमान के 90 °फ़ै (32 °से.) या अधिक तक पहुँचने वाले लगातार दिनों की सर्वाधिक संख्या 205 है जिसे अप्रैल-अक्टूबर 1992 में दर्ज किया गया। डेथ वैली में प्रति वर्ष औसतन 192 दिन ऐसे होते हैं जब तापमान 90 °F (32 °C) या अधिक तक पहुँचता है।
ग्रीनलैंड रांच में रिकार्ड किया गया निम्नतम तापमान 15 °फ़ै (−9 °से.) है जिसे जनवरी, 1913 में दर्ज किया गया।
डेथ वैली (ग्रीनलैंड रांच स्टेशन) की औसत वार्षिक वर्षा 1.58 इंच (40 मि॰मी॰) है। 2.59 इंच (66 मि॰मी॰) वर्षा के साथ डेथ वैली का सर्वाधिक वर्षा वाला महीना जनवरी, 1995 है। सर्वाधिक वर्षा वाली अवधि 2004 के मध्य से लेकर 2005 के मध्य तक की रही है; इस दौरान कुल मिलाकर 6 इंच (150 मि॰मी॰) वर्षा पड़ी जिसके कारण इस घाटी तथा आस-पास के क्षेत्र में अल्पकालिक झीलों का निर्माण हुआ और भारी मात्रा में जंगली फूल भी खिले. बरफ के जमा होने वाला हिमपात केवल जनवरी 1922 में दर्ज किया गया है जबकि अन्य अवसरों पर हिमकणों का गिरना दर्ज किया गया है।

इतिहास

डेथ वैली मूल निवासी अमेरिकियों की तिम्बिशा नामक जनजाति का घर है, जिन्हें पूर्व में पैनामिंट शोशोन कहा जाता था; वे पिछले कम से कम 1000 वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं। इस घाटी को तिम्बिशावासी ‘तुम्पसिया ‘ नाम से पुकारते हैं जिसका अर्थ है “रॉकपेंट (पत्थर का रंग)”; यह एक लाल गेरुए रंग की तरफ इशारा करता है जिसे घाटी में पाई जाने वाली एक प्रकार की मिटटी से बनाया जाता है। कुछ परिवार अभी भी घाटी के फर्नेस क्रीक पर निवास करते हैं। एक अन्य गांव स्कॉटीज कैसल के वर्तमान स्थान के निकट ग्रेपवाइन कैन्यन में स्थित था। इसे तिम्बिशा भाषा में माहुनू ‘ कहा जाता था जिसका अर्थ है ‘अनिश्चित’, हालांकि यह ज्ञात है कि हुनू ‘ का अर्थ है “कैन्यन”.
इस घाटी का अंग्रेजी नाम 1849 में कैलिफोर्निया गोल्ड रश के दौरान पड़ा. इसे सोने की खदानों तक पहुंचने के लिए घाटी को पार करने वाले लोगों द्वारा डेथ वैली (मौत की घाटी) कहा जाता था, हालाँकि गोल्डरश के दौरान इस क्षेत्र में केवल एक व्यक्ति की मौत के बारे में ही ज्ञात है। 1850 के दशक के दौरान इस घाटी से सोने तथा चांदी को प्राप्त किया गया था। 1880 के दशक में बोरेक्स की खोज की गयी और खच्चर द्वारा खींची जाने वाली गाड़ियों पर लाद कर उसे निकला गया।
डेथ वैली को 11 फ़रवरी 1933 को राष्ट्रपति हूवर द्वारा राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर दिया गया और इस क्षेत्र को संघीय सुरक्षा के तहत डाल दिया गया। 1994 में इस स्मारक को ‘डेथ वैली नेशनल पार्क’ घोषित करने के साथ साथ इसका काफी अधिक विस्तार किया गया और सेलाइन तथा यूरेका घाटियों को भी इसमें शामिल कर लिया गया।

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