प्रौद्योगिकी पर्यावरण की संपूर्ण जानकारी

पर्यावरण प्रौद्योगिकी (ऍनवायरोटेक के रूप में संक्षेपित) या हरित प्रौद्योगिकी (ग्रीनटेक के रूप में संक्षेपित) या स्वच्छ प्रौद्योगिकी (क्लीनटेक के रूप में संक्षेपित) प्राकृतिक पर्यावरण और संसधानों के संरक्षण और मानव हस्तक्षेप के फलस्वरूप हुए नकारात्मक प्रभावों को रोकने हेतु पर्यावरणीय विज्ञान का एक अनुप्रयोग है। सतत विकास ही पर्यावरणीय प्रौद्योगिकी का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग है।

उदाहरण

जैवनिस्पंदन (बायोफिल्ट्रेशन)
बायोस्फीयर प्रौद्योगिकी
जैवोपचारण (बायोरेमेडिएशन)
मल से खाद बनाना
विलवणीकरण (डिसैलिनेशन)
दोहरे-संभरण वाली इलेक्ट्रिक मशीनें
ऊर्जा संरक्षण
ऊर्जा की बचत करने वाले मॉड्यूल
हाइड्रोजन ईंधन सेल
महासागरीय ऊष्मीय ऊर्जा रूपांतरण
सौर ऊर्जा
ऊष्मीय डिपॉलीमराइज़ेशन

पुनर्चक्रण
पुनर्चक्रण एक विश्वव्यापी घटना है, यह हरित प्रौद्योगिकी के अंतर्गत किया जाने वाला प्राथमिक अनुप्रयोग है। यह लोगों को पुनः प्रयोग की जा सकने वाली वस्तुओं का पुनर्प्रयोग प्रदर्शित करती है व उन्हें इसके लिए प्रेरित करती है। शासकीय संस्थाओं द्वारा भोजन अथवा पेय के डिब्बों व कागज आदि की बचत को प्रोत्साहन दिया जा रहा है जिससे की उन्हें पुनर्चक्रित करके भविष्य में अन्य उपयोगों में लिया जा सके. इस प्रकार से पर्यावरण की रक्षा करते हुए प्रदूषण/कचरे को कम किया जा सकता है।
जल शोधन
जल शोधन: इसका मूल विचार पूरे पर्यावरण में बहने वाले जल को धूल/जीवाणु/प्रदूषण रहित करना है। पानी के शोधन की यह अवधारणा कई अन्य घटनाओं से उत्पन्न हुई है। जल प्रदूषण इस अवधारणा का मुख्य शत्रु है और दुनिया भर में जल को शोधित करने के लिए कई अभियान व गतिविधियां आयोजित की गयी हैं। वर्तमान में जल के उपयोग के परिमाण को देखते हुए, यह अवधारणा अति महत्वपूर्ण है।
वायु शोधन
वायु शोधन: मूलभूत व साधारण हरे पौधों को वायु को स्वच्छ करने के लिए घर के अन्दर भी उगाया जा सकता है क्योंकि सभी पौधे CO2 को हटा कर उसे ऑक्सीजन में परिवर्तित करते हैं। इसके सबसे अच्छे उदाहरण हैं: डाइपसिस ल्यूटेसेन्स, सान्सेवीरिया ट्रीफैसीयाटा तथा एपीप्रेम्नम ऑरेयम
मलजल प्रशोधन
मलजल प्रशोधन की अवधारणा जल शोधन के बहुत निकट है। चूंकि यह जल में प्रदूषण के स्तर को कम करता है इसीलिए मलजल प्रशोधन एक बहुत महत्वपूर्ण अवधारणा है। जल जितना अधिक प्रदूषित होता है उतना ही अधिक अनुपयोगी होता है, जिन क्षेत्रों में पानी का अधिक उपयोग होता है, वहां न्यूनतम प्रदूषित जल की आपूर्ति की जाती है। यह पर्यावरण संरक्षण, सततता आदि अन्य अवधारणाओं के लिए मार्ग खोलता है।
पर्यावरण उपचारिकरण
पर्यावरण के सामान्य संरक्षण के लिए प्रदूषकों व संदूषकों को हटाये जाने को पर्यावरण उपचारिकरण कहा जाता है। यह विभिन्न रासायनिक, जैविक तथा बड़े परिमाण के अंतरण की प्रणालियों के द्वारा किया जाता है, इसके साथ ही पर्यावरण की निगरानी भी की जाती है। (एनसाइक्लोपीडिया ऑफ मेडिकल कनसेप्ट्स)
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, ठोस अपशिष्ट के शुद्धिकरण, उपभोग, पुनर्प्रयोग, प्रशमन तथा उपचार को कहा जाता है जिसकी निगरानी सरकार अथवा शहर/कस्बों की शासकीय इकाइयों द्वारा की जाती है।
अक्षय ऊर्जा
अक्षय ऊर्जा वह ऊर्जा है जिसकी पूर्ति आसानी से हो जाती है। वर्षों से हम ऊर्जा के उत्पादन के लिए लकड़ी, सूर्य, जल, आदि जैसे स्रोतों का उपयोग कर रहे हैं। ऐसी ऊर्जा जिसे प्राकृतिक साधनों जैसे लकड़ी, सूर्य, हवा जैसी वस्तुओं के द्वारा उत्पादित किया जाता है, उसे ही अक्षय माना जाता है।
ईगेन पूर्वानुमान
ईगेन पूर्वानुमान वह प्रक्रिया होती है जिससे भविष्य में किसी इमारत पर पड़ने वाले मौसम के प्रभावों का पूर्वानुमान लगता जा सकता है।[8] मौसम के पूर्वानुमान पर ताप के आधार को समायोजित करके, यह प्रणाली अतिरिक्त ताप के प्रयोग को समाप्त कर देती है, जिसके कारण ऊर्जा का उपभोग तथा ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम हो जाता है।
ऊर्जा संरक्षण
ऊर्जा संरक्षण ऐसे उपकरणों का प्रयोग है जो ऊर्जा की कम मात्रा का प्रयोग करते हैं जिससे विद्युत् का उपभोग कम हो जाता है। विद्युत् के प्रयोग को कम करने से जीवाश्म ईंधन को जलाये जाने की आवश्यकता कम हो जाती है जिनका प्रयोग उस विद्युत् का उत्पादन करने में किया जाता.

वैकल्पिक और स्वच्छ ऊर्जा

सिद्धांत
ग्रीन सिंडीकालिज्म
निरंतरता
स्थायी डिजाइन
स्थायी अभियांत्रिकी
वैज्ञानिक हमारे वर्तमान शक्ति उत्पादन के तरीकों से अलग स्वच्छ ऊर्जा के विकल्पों की खोज में लगे हुए हैं। ऐनेरोबिक डाइजेशन (अवायवीय पाचन) जैसी कुछ तकनीकें अपशिष्ट पदार्थों से अक्षय ऊर्जा उतपन्न कर सकती हैं। ग्रीन हाउस गैसों में वैश्विक कमी औद्योगिक स्तर पर ऊर्जा संरक्षण तकनीकों के प्रयोग के साथ ही साथ स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन पर निर्भर है। इनमें शामिल हैं सीसा-रहित पेट्रोल, सौर ऊर्जा तथा वैकल्पिक ईंधन वाले वाहन, जिनमें प्लग-इन हाइब्रिड व हाइब्रिड विद्युत् वाहन सम्मिलित हैं।
कुल उत्पादित विद्युत् का 60% भाग विद्युत् मोटरें प्रयोग कर लेती हैं,[कृपया उद्धरण जोड़ें] विकसित ऊर्जा सक्षम विद्युत् मोटर (तथा विद्युत् जनरेटर) तकनीक, जो कि लागत की दृष्टि से प्रभावशाली हों, के प्रयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, जैसे कि बिना ब्रश की वाऊंड रोटर वाली डबली-फेड विद्युत् मशीनें तथा ऊर्जा की बचत के भाग, इनकी सहायता से कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) व सल्फर डाई ऑक्साइड (SO2), जो कि जीवाश्म ईंधन प्रयोग किये जाने से वातावरण में चलीं जातीं, की मात्रा में कमी लायी जा सकती है। ग्रीसस्टॉक यॉर्कटाउन हाइट्स, न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाला एक कार्यक्रम है जो पर्यावरण प्रौद्योगिकी के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे बड़ा प्रदर्शन है।

आलोचना

चरम अतिवादी पर्यावरणवाद, जैसा कि ग्रीन ऐनार्की जैसे प्रकाशनों में परिलक्षित होता है, पर्यावरण प्रौद्योगिकी की आलोचना करता है। इस दृष्टिकोण से, प्रौद्योगिकी को प्रणाली के रूप में देखा जाता है न कि किसी विशिष्ट भौतिक उपकरण के रूप में. तदनुसार, प्रौद्योगिकी को संसाधनों की उत्पत्ति व निष्कर्षण के ज़रिये पर्यावरण के दोहन की आवश्यकता होती है, साथ ही इसे श्रम, विशेषज्ञता तथा श्रम के विभाजन के जरिये लोगों के दोहन की भी आवश्यकता होती है। इस प्रकार, प्रौद्योगिकी का कोई “प्राकृतिक” स्वरुप नहीं हो सकता है; इनकी उत्पत्ति हमेशा किसी सन्दर्भ में, किसी निश्चित ध्येय तथा प्रकार्य के साथ होती है। हरित प्रौद्योगिकी को इसी दोहन प्रणाली के सुधार के प्रयास के रूप में अस्वीकृत किया गया है, जिसको सिर्फ सतही रूप से पर्यावरण मैत्रिक रूप दिया जा रहा है और इसके बावजूद अरक्षणीय रूप से मानवीय तथा प्राकृतिक दोहन जारी है।

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