शरीर का निर्जलीकरण

निर्जलीकरण जिसे अंग्रेजी में डिहाइड्रेशन कहते हैं, शरीर में पानी की कमी का परिणाम होता है। यह स्थिति तब पैदा होती है, जब शरीर से निकलने वाले पानी (पसीना, मल या मूत्र के रूप में) की मात्रा दिनभर में ली जाने वाली पानी की मात्रा से अधिक हो जाती है। व्यक्ति विशेष और शरीर में पानी की मौजूदगी के आधार पर यह समस्या हल्की, माध्यम और गंभीर हो सकती है । वहीं, पानी की आवश्यक मात्रा न मिलने की स्थिति में कभी-कभी निर्जलीकरण से मौत भी हो सकती है । साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि व्यक्ति द्वारा लिए जाने वाले खाद्य पदार्थों में मौजूद पानी के अलावा भी व्यक्ति को अतिरिक्त तरल की आवश्यकता होती है, जो उम्र, लिंग और व्यक्ति विशेष की दिनचर्या पर निर्भर करता है। इसलिए, सामान्य रूप से पुरुषों को दिन में करीब 3000 मिली (करीब 12 गिलास) और महिलाओं को करीब 2200 मिली (करीब 9 गिलास) पानी लेने की सलाह दी जाती है।

कारण

साधारण तौर पर मल, मूत्र और पसीने के रूप में हर व्यक्ति के शरीर से पानी बाहर निकलता है, जो एक सामान्य क्रिया है। शरीर में होने वाली पानी की कमी लिए जाने वाले खाद्य और तरल पदार्थों से पूरी हो जाती है, लेकिन कुछ विशेष स्थितियों जैसे – अधिक पसीना आना, बार-बार उल्टी होना व डायरिया (दस्त की समस्या) के कारण शरीर में पानी की तेजी से कमी होने लगती है। इन्हें डिहाइड्रेशन का मुख्य कारण माना गया है। इस समस्या के कुछ अन्य कारण भी हैं, जो इस प्रकार हैं |
अधिक तापमान या व्यायाम के कारण जरूरत से ज्यादा पसीना निकल जाना।
बुखार आने के कारण।
कुछ विशेष दवाओं का उपयोग, जिनके कारण बार-बार पेशाब आता है।
पानी के साथ-साथ इलेक्ट्रोलाइट्स (सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम) के स्तर में कमी के कारण।
इलेक्ट्रोलाइट्स (सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम) की अधिकता भी डिहाइड्रेशन की वजह बन सकती है।

लक्षण

निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन ) के मुख्य लक्षणों में से एक कुछ ही दिनों में (कुछ मामलों में कुछ घंटों में) वजन का तेजी से कम होना है। 10 प्रतिशत से अधिक वजन तेजी से कम होना गंभीर लक्षण माना जाता है। इन लक्षणों को वास्तविक बीमारी से अलग करके देखना काफी मुश्किल काम है । इसके अलावा भी कुछ लक्षण हैं, जो डिहाइड्रेशन की ओर इशारा करते हैं।

  1. हल्के से मध्यम निर्जलीकरण के लक्षण
    प्यास का लगना
    मुंह सूखना व चिपचिपा महसूस होना
    पेशाब कम आना
    गाढ़े पीले रंग का पेशाब आना
    सूखी और ठंडी त्वचा
    सिरदर्द होना मांसपेशियों में ऐठन
  2. गंभीर निर्जलीकरण के लक्षण
    पेशाब का बिल्कुल न आना या बहुत अधिक गहरे पीले रंग का आना
    सूखी और सिकुड़ी हुई त्वचा का दिखाई देना
    चिड़चिड़ापन या भ्रम की स्थिति पैदा होना
    चक्कर आना या आंखों के सामने अंधेरा छाना
    धड़कन और सांस का तेज होना
    आंखों के नीचे गड्ढे नजर आना
    बेहोश हो जाना

परिणाम
गंभीर निर्जलीकरण होने की स्थिति में ध्यान न देने पर किडनी और दिमाग की क्षति के साथ-साथ मृत्यु भी हो सकती हैं।
इलाज
सामान्य रूप से निर्जलीकरण का इलाज करने के लिए निम्न तरीकों को इस्तेमाल में लाया जा सकता है :
धीरे-धीरे पानी पिएं या बर्फ के टुकड़े को थोड़ी-थोड़ी देर के लिए मुंह में डाल कर रखें।
जितना हो सके पानी पिएं। अधिक प्रभाव के लिए इलेक्ट्रोलाइट्स (सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम) युक्त तरल का सेवन करें।
डायरिया की समस्या होने पर खाने और पीने के लिए डॉक्टर से परामर्श लें।
नमक का अधिक प्रयोग न करें।
निर्जलीकरण की गंभीर अवस्था में अस्पताल में निडल (IV) के जरिए शरीर में तरल पदार्थ दिया जा सकता है।
बचाव
निर्जलीकरण से बचाव के लिए आपको निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए :
अच्छी मात्रा में नियमित रूप से तरल पदार्थों का सेवन करें।
बुखार या बीमारी की स्थिति में ध्यान रखें कि मरीज (खासकर बच्चे और बुजुर्ग) उचित मात्रा में पेय पदार्थ ले रहे हैं या नहीं।
उल्टी या डायरिया होने पर अच्छी मात्रा में तरल का सेवन करें और अधिक से अधिक पानी पिएं। निर्जलीकरण होने का इंतजार न करें।
निर्जलीकरण के संकेत दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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