अवसाद शैल और जीवाश्म

अपक्षय एवं अपरदन के विभिन्न साधनों द्वारा मौलिक चट्टनों के विघटन, वियोजन और टूटने से परिवहन तथा किसी स्थान पर जमाव के परिणामस्वरुप उनके अवसादों से निर्मित शैल को अवसादी शैल (sedimentary rock) कहा जाता हैं।
वायु, जल और हिम के चिरंतन आघातों से पूर्वस्थित शैलों का निरंतर अपक्षय एवं विदारण होता रहता है। इस प्रकार के अपक्षरण से उपलब्ध पदार्थ कंकड़, पत्थर, रेत, मिट्टी इत्यादि, जलधाराओं, वायु या हिमनदों द्वारा परिवाहित होकर प्राय: निचले प्रदेशों, सागर, झील अथवा नदी की घाटियों में एकत्र हो जाते हैं। कालांतर में संघनित होकर वे स्तरीभूत हो जाते हैं। इन स्तरीभूत शैलों को अवसाद शैल (सेडिमेंटरी रॉक्स) कहते हैं।

अवसाद शैल और जीवाश्म
अवसाद शैलों में प्राय: जीवों के अवशेष समाधिस्थ रहते हैं। उनसे न केवल तत्कालीन वातावरण का ज्ञान होता है, अपितु वे शैलों की आयु के भी परिचायक होते हैं। त्रिखंडी (ट्राइलोबाइट), केकड़े के पुरातन पूर्वज, शीर्षपादा (सेफ़ालोपोडा) और कुछ सीप (पेलेसिपोडा) आदि सर्वदा सामुद्रिक वातावरण के द्योतक हैं। कुछ प्रकार के घोंघे (गैस्ट्रोपॉड), कुछ पादछिद्रिण (फ़ोरामिनिफ़ेरा) मीठे पानी वाले असामुद्रिक वातावरण के परिचायक हैं।
कुछ विशिष्ट खनिजों की उपस्थिति भी बड़ी महत्वपूर्ण होती है। उदाहरणस्वरूप हरे रंग के खनिज आहरितिज (ग्लॉकोनाइट) से गहरे पानी में शैल के उद्भव का संकेत मिलता है। शैलों का लाल रंग लोहे के आक्साइड के कारण होता है। यह रंग शुष्क मरुस्थलीय वातावरण का सूचक है।
अवसाद शैल एवं अयस्क निक्षेप
कोयला, ऐल्यूमिनियम का अयस्क – बाक्साइट, लोहे का अयस्क – लैटेराइट, नमक, जिप्सम, फास्फेट, मैगनेसाइट, सीमेंट का अयस्क, चूने का पत्थर, इत्यादि कई महत्वपूर्ण खनिज पदार्थ अवसाद शैलों में उपलब्ध होते है।
बालू का पत्थर
चूने का पत्थर
कोयला
जिप्सम
लोयस
मोरेन

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