अगेती ककड़ी की खेती

ककड़ी की बीजाई का समय फरवरी से मार्च तक है परन्तु अगेती फसल लेने के लिए पॉलिथीन की थैलियों में बीज की जनवरी के महीने में बीजाई की जा सकती है | पौध सहित इन थैलियों को जमीन में गोद दिया जाता है |

उन्नतशील किस्में

अर्का शीतल-

इसके फल काफी कोमल तथा हल्के हरे रंग के होते हैं| फल लम्बाई में लगभग 22 सेन्टीमीटर और भार में 100 ग्राम तक के होते हैं| इस किस्म में तीखापन (कडुवाहट) बिल्कुल नहीं होती है| इसकी औसत उत्पादन क्षमता लगभग 200 कुन्तल प्रति हैक्टेयर होती है|

लखनऊ अर्ली-

यह किस्म लखनऊ और उत्तरी भारत के क्षेत्रों में बहुत प्रचलित है| इसके फल मुलायम, लम्बे और गूदेदार होते हैं|

अन्य किस्में-

ककड़ी की कुछ स्थानीय किस्में जैसे नसदार, नस रहित लम्बा हरा और सिक्किम ककड़ी के नाम से जानी जाती हैं|

 बीज की मात्रा :

1 एकड़ भूमि में तर-ककड़ी बोने के लिए एक किलोग्राम बीज की आवश्यकता पड़ती है |

पौध तैयार करना :

अधिकतर ककड़ी को लगभग सभी प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है लेकिन इसके लिए दोमट भूमि सबसे उपयुक्त है, जिसमे जल निकास की सुविधा अच्छी हो | भूमि की तैयारी के समय गोबर की खाद मिलायें व खेत की 3-4 बार जुताई करके सुहागा लगायें |

बिजाई की विधि :

ककड़ी की बीजाई 2m चौड़ी क्यारियों में नाली के किनारों पर करनी चाहिए | पौधे से पौधे का अंतर 60 cm रखें | एक स्थान पर 2-3 बीज बोयें | बाद में एक स्थान पर एक ही पौधा रखें |

खाद व उर्वरक :

गोबर की खाद – 6 टन , नाइट्रोजन – 20 kg, फॉस्फोरस – 10 kg और पोटाश – 10 kg | बीजाई के समय फॉस्फोरस व पोटाश की साड़ी मात्रा तथा नाइट्रोजन की आधी मात्रा डालनी चाहिए | शेष नाइट्रोजन को कड़ी फसल में दें |

 फलों की तोड़ाई :

नरम व चिकने फलों को प्रातः अथवा शाम के समय तोड़ लिया जाता है | तोड़ते समय फलों की लम्बाई 15-30 cm होनी चाहिए | अगेती फसल से अच्छे दाम प्राप्त करने के लिए फलों को कुछ पहले तोड़ लेना चाहिए | जबकि पछेती फसल के फल कुछ देर में तोड़े जाते हैं | ककड़ी की औसत पैदावार 40-50 क्विंटल प्रति एकड़ होती है

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