हाइड्रोजन परॉक्साइड यौगिकों का निर्माण, आइए जाने

हाइड्रोजन परॉक्साइड (H2O2) एक बहुत हल्का नीला, पानी से जरा सा अधिक गाढ़ा द्रव है जो पतले घोल में रंगहीन दिखता है। इसमें आक्सीकरण के प्रबल गुण होते हैं और यह एक शक्तिशाली विरंजक है। इसका इस्तेमाल एक विसंक्रामक, रोगाणुरोधक, आक्सीकारक और रॉकेट्री में प्रणोदक के रूप में किया जाता है। हाइड्रोजन परॉक्साइड की आक्सीकरण क्षमता इतनी प्रबल होती है कि इसे आक्सीजन की उच्च प्रतिक्रिया वाली जाति समझा जाता है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड जीवों में आक्सीकरण चयापचय के उपोत्पाद के रूप में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होता है। लगभग सभी जीवित वस्तुओं (विशेषकर, सभी आब्लिगेटिव और फेकल्टेटिव वातापेक्षी जीव) में परॉक्सिडेज नामक एन्ज़ाइम होते हैं जो बिना हानि पहुंचाए और उत्प्रेरण द्वारा उदजन परूजारक की छोटी मात्राओं को पानी और आक्सीजन में विघटित करते हैं।

इतिहास

हाइड्रोजन परॉक्साइड सबसे पहले 1818 में लुई जेकस थेनार्ड द्वारा बेरियम परॉक्साइड पर नाइट्रिक एसिड की प्रक्रिया द्वारा प्राप्त किया गया। इस प्रक्रिया के एक सुधारे हुए प्रकार में हाइड्रोक्लोरिक एसिड और उसके बाद सल्फ्यूरिक एसिड का प्रयोग कर के बेरियम सल्फेट उपोत्पाद को अलग किया जाता है। थेनार्ड की प्रक्रिया 19वीं सदी के अंत से 20वीं सदी के मध्य तक उपयोग में लाई गई। आधुनिक उत्पादन विधियां नीचे दी गई हैं।
लंबे समय तक शुद्ध हाइड्रोजन परॉक्साइड को अस्थिर समझा जाता था क्योंकि हाइड्रोजन परॉक्साइड को पानी, जो संश्लेषण के समय उपस्थित रहता है, से अलग करने के प्रयत्न असफल हो रहे थे। ऐसा इसलिये होता था क्योंकि ठोस पदार्थों और भारी धातु आयनों के अंशों के कारण हाइड्रोजन परॉक्साइड का उत्प्रेरकीय विघटन या विस्फोट हो जाता था। सौ प्रतिशत शुद्ध हाइड्रोजन परॉक्साइड सर्वप्रथम रिचर्ड वोल्फेन्स्टीन ने 1894 में निर्वात आसवन के द्वारा प्राप्त की। पेत्रे मेलिकिश्विली और उसके शिष्य एल.पिज़ारजेवेस्की ने दर्शाया कि हाइड्रोजन परॉक्साइड के अनेक फार्मूलों में से H-O-O-H सबसे सही था।
जीववैज्ञानिक सुरक्षा कैबिनेटों और बैरियर आइसोलेटरों में H2O2 विसंक्रमण का प्रयोग एक सुरक्षित, अधिक प्रभावशाली विसंक्रमण विधि के रूप में इथाइलिन आक्साइड (EtO) का एक लोकप्रिय विकल्प है। दवा उद्योग में H2O2 का प्रयोग काफी समय से बड़े पैमाने पर होता आया है। एयरोस्पेस शोध में H2O2 का प्रयोग उपग्रहों के विसंक्रमण के लिये किया जाता है।
FDA ने कुछ समय पहले व्यक्तिगत मेडिकल उपकरण निर्माण में H2O2 के प्रयोग के लिये 510(k) अनुमति दी है। ANSI/AAMI/ISO 14937 में दिये गए EtO मापदंडों को सत्यापन के दिशा निर्देशों के रूप में उपयोग में लाया जा सकता है। सैन्यो (Sanyo) पहला उत्पादक था जिसने एक सेल क्ल्चर इनकुबेटर में H2O2 प्रक्रिया का प्रयोग किया जो एक तेज और प्रभावशाली सेल कल्चर विसंक्रमण प्रक्रिया है।

परॉक्साइड यौगिकों का निर्माण

हाइड्रोजन परॉक्साइड एक हल्का अम्ल है और यह कई धातुओं के हाइड्रोपरॉक्साइड या परॉक्साइड लवण या यौगिक बना सकता है।
उदा., क्रोमिक एसिड (CrO3) के जलीय घोल या डाइक्रोमेट लवणों के अम्लीय घोलों में मिलाने पर यह एक अस्थिर नीला परॉक्साइड CrO(O2)2 बनाता है। जलीय घोल में यह तेजी से विघटित हो कर आक्सीजन गैस और क्रोमियम लवण देता है।
यह एनॉयनों से प्रतिक्रिया करके परॉक्सोएनॉयन भी उत्पन्न कर सकता है; उदा., बोराक्स से प्रतिक्रिया से सोडियम बोरेट बनता है जो कपड़े धोने के डिटर्जेंटों में विरंजक का काम करता है।
Na2B4O7 + 4 H2O2 + 2 NaOH → 2 Na2B2O4(OH)4 + H2O
H2O2 कॉर्बॉक्सिलिक एसिडों (RCOOH) को परॉक्सी एसिडों (RCOOOH) में बदल देता है जो स्वयं आक्सीकारकों के रूप में प्रयोग में लाए जाते हैं। हाइड्रोजन परॉक्साइड एसिटोन से प्रतिक्रिया करके एसिटोन परॉक्साइड बनाता है और ओज़ोन से क्रिया करके हाइड्रोजन ट्राईआक्साइड बनाता है जिसे ट्राईआक्सिडेन भी कहते हैं। यूरिया से प्रतिक्रिया से कार्बमाइड परॉक्साइड बनता है जो दांतों को सफेद करने के काम आता है। ट्राईफिनाइलफास्फीन आक्साइड के साथ एक अम्ल-क्षार एडक्ट कुछ प्रतिक्रियाओं में H2O2 का एक उपयोगी “वाहक” है।
क्षारता
हाइड्रोजन परॉक्साइड पानी की अपेक्षा कहीं अधिक कमजोर क्षार है, लेकिन फिर भी यह बहुत प्रबल अम्लों के साथ एडक्ट बना सकता है। सुपरएसिड HF/SbF5, [H3O2]+ आयन युक्त अस्थिर यौगिकों का निर्माण करता है।

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