लिंग सहलग्न वंशागति

लिंग सहलग्नता का अर्थ है, लैंगिक क्रोमोसोमों में पाए जानेवाले जीनों के अनुसार लिंगों में विभिन्नता। इन जीनों पर जो गुण या विशेषक (traits) निर्भर करते हैं, उन्हें लिंग सहलग्नता कहते हैं। इन गुणों या विशेषकों की पारेषण विधि को लिंग सहलग्न वंशागति कहते हैं, जैसे पुरुष में एक्स वाई (XY) तथा स्त्री में एक्स एक्स (XX) क्रोमोसोम होते हैं। कोई पुरुष यदि किसी आनुवंशिक दोष से दूषित है, तो केवल उसके पुत्र ही उस दोष को वंशगति में ग्रहण कर सकते हैं, पुत्रियाँ नहीं। सर्वप्रथम डॉंकास्टर (Doncaster) ने सन् 1908 में इस विषय पर प्रकाश डाला था। उन्होंने एक शलभ अब्रैक्सैस लैक्टिकलर (Abraxas lacticolor) की मादा का अब्रैक्सस ग्रॉस्सुलैरियाटा (Abraxas grossulariata) के नर से संयोग कराया। परिणामस्वरूप प्रथम पीढ़ी में सभी शलभ ग्रॉस्सुलैरियाटा वर्ग के कीट पाए गए। दूसरी पीढ़ी में ग्रॉस्सुलैरियाटा तथा लैक्टिकलर के अनुपात 3:1 थे, किंतु सभी लैक्टिकलर मादा निकले। इससे पता चला कि इस प्राणी में नर एक प्रकार के युग्मक (gametes) उत्पन्न करता है, किंतु मादा दो प्रकार के। अत: नर समयुग्मजी (homozygous) तथा मादा विषमयुग्मजी (Heterozygous) होती है। ब्रैवेल (Brambell) कहते हैं कि एक्स (X) क्रोमोसोम में कुछ अन्य प्रकार के आनुवंशिक कारक तथा जीन होते हैं। यदि यह सिद्धांत ठीक है, तो समयुग्मजी माता पिता के विशेषक (traits) उनके विषमयुग्मजी संतानों में चले जाएँगे। इस सिद्धांत को लिंग सहलग्नता (Sex linkage) कहा जाता है, जैसे फलमक्खी ड्रॉसोफिला (Drosophila) की मादा में दो एक्स (X) तथा नर में एक्स वाई (XY) क्रोमोसोम पाए जाते हैं। इसके एक्स (X) क्रोमोसोमों में लाल आँखों के जीन होंगे, या श्वेत आँखों के। लाल आँख वाले जीनों को प्रभावी (dominant) तथा श्वेत को अप्रभावी (recessive) कहते हैं। अत: जब श्वेत तथा लाल आँखों वाली मक्खियों का संयुग्मन होता है, तब लाल आँखों वाली संतान अधिक होती है। लिंग सहलग्नी रोगों में हीमोफिलिया (haemophilia) तथा रंगांधता (colour blindness) प्रमुख रोग माने जाते हैं।

अवियोजन (Non-disjunction)
शुक्राणु तथा डिंब संयुक्त होकर एक युग्मज (zygote) का निर्माण करते हैं। खंडी भवन (segmentation) की प्रक्रिया में एक ही निषेचित डिंब अनेक खंडों में तब तक विभाजित होता रहता है, जब तक वह पूर्ण भ्रूण नहीं बन जाता।
इस प्रक्रिया में शुक्राणु के क्रोमोसोम तथा डिंब के क्रोमोसोम एक साथ मिलकर विभाजित होते रहते हैं। उदाहरण के लिए, पुरुष के 23 तथा स्त्री के 23 क्रोमोसोम मिलकर 46 क्रोमोसोम हो जाते है। विभाजन के समय 23 क्रोमोसोम एक छोर (pole) की ओर तथा 23 दूसरी ओर चले जाते हैं। इन दोनों छोरों को पुत्रीकोशिका केंद्रक (Daughter cell nucleus) भी कहते हैं। विभाजन की इस सामान्य प्रक्रिया में अनेक प्रकार के दोष उत्पन्न हो सकते हैं जैसे एक केंद्र में 22 क्रोमोसोम चले जाएँ तथा दूसरे में 24, या कोई अन्य दुर्घटना घट जाए तो इसे अवियोजन कहा जाएगा। इस सिद्धांत के साथ ब्रिजेज़ (Bridges) का नाम लिया जाता है। इन्होंने सन् 1916 में कुछ उत्परिवर्ती (mutant) प्राणियों का अध्ययन किया था। इन्होंने पाया कि एक्स एक्स एक्स (XXX) तथा एक्स एक्स वाई (XXY) वाले दोनों प्राणी मादा थे, एक्सओ (XO) वाला प्राणी नर, किंतु संतानोत्पादन में अक्षम था और ओवाई (OY) वाला प्राणी बढ़ा ही नहीं। जिस प्राणी में एक एक्स (X) कम था, उसे प्राथमिक तथा जिसमें एक एक्स (X) अधिक था, उसे गौण अवियोजित कहा गया।

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