ढींगरी मशरूम घर पर उगाये और करे लाखों की कमाई

खुम्बी के बारे में प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मशरूम मैदानी क्षेत्रों में उगाई जा सकती है?
जी हां, मशरूम कहीं भी पैदा की जा सकती है बशर्ते वहां का तापमान तथा आर्द्रता जरूरत के अनुसार हो।
मशरूम के लिए कौन सी जलवायु उपयुक्त है?
मशरूम एक इंडोर फसल है। फसल के फलनकाय के समय तापमान 14-18° सेल्सियस व आर्द्रता 85 प्रतिशत रखी जाती है।
मशरूम की खेती के लिए कौन से पोषाधार की आवश्यकता होती है?
गेहूँ/पुआल की तूड़ी/मुर्गी की बीठ/गेहूँ की चैकर, यूरिया तथा जिप्सम का मिश्रण तैयार करके तैयार खाद पर मशरूम उगाई जाती है। खुम्ब का बीज (स्पॅन) गेहूँ के दानों से तैयार किया जाता है।
मशरूम की खेती के लिए कौन सी सामान्य आवश्यकता पड़ती है?
मशरूम एक इंडोर फसल होने के कारण इसके लिए नियंत्रित तापमान और आर्द्रता की आवश्यता पड़ती है। (तापमान 14-18° सेल्सियस व आर्द्रता 85 प्रतिशत रखी जाती है।)
क्या मशरूम शाकाहारी अथवा मांसाहारी?
मशरूम शाकाहारी है।
मशरूम खाने के क्या-क्या लाभ हैं?
मशरूम पौष्टिक होते हैं, प्रोटीन से भरपूर होते हैं, रेशा व फोलिक एसिड सामग्री होती है जो आमतौर पर सब्जियों व अमीनो एसिड में नहीं होती व मनुष्य के खाने योग्य अन्न में अनुपस्थित रहती है।
मशरूम की बाजार क्षमता क्या है?
मशरूम अब काफी लोकप्रिय हो गए हैं व अब इसकी बाजार संभावनाएं बढ़ गई है। श्वेत बटन खुम्ब ताजे व डिब्बाबंद अथवा इसके सूप और आचार इत्यादि उत्पाद तैयार कर बेचे जा सकते हैं। ढींगरी मशरूम सूखाकर भी बेचे जा सकते हैं।
मैं मशरूम में मक्खियों से कैसे छुटकारा पा सकता हूँ?
आप स्क्रीनिंग जाल दरवाजे और कृत्रिम सांस के साथ नायलोन अथवा लोहे की जाली (35 से 40 आकार की जाली), पीले रंग का प्रकाश व मिलाथीन अथवा दीवारों पर साईपरमेथरीन की स्प्रे से मक्खियों छुटकारा पा सकते हैं।
मैं मशरूम उगाने के लिए कहां से प्रशिक्षण प्राप्त कर सकता हूँ?
आप खुम्ब उत्पादन तकनीकी प्रशिक्षण खुम्ब अनुसंधान निदेशालय, चम्बाघाट, सोलन (हिमाचल प्रदेश) – 173213 अथवा देश के विभिन्न राज्यों के कृषि विश्वविद्यालयों से प्राप्त कर सकते हैं।
मशरूम के कौन-कौन से उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं?
आप मशरूम से आचार, सूप पाउडर, केंडी, बिस्कुट, बड़िया, मुरब्बा इत्यादि उत्पाद तैयार कर सकते हैं।
क्या सरकार मशरूम उत्पादन इकाई लगाने के लिए वित्तीय सहायता/सब्सिडी प्रदान करती है?
नबार्ड, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड और बैंक मशरूम उत्पादन इकाई, स्पाॅन उत्पादन इकाई और खाद बनाने की इकाई लगाने के लिए ऋण प्रदान करते हैं।
खाने की मशरूम कितने प्रकार की होती है?
श्वेत बटन खुम्ब, ढींगरी खुम्ब, काला चनपड़ा मशरूम, स्ट्रोफेरिया खुम्ब, दुधिया मशरूम, शिटाके इत्यादि कुछ खाने की मशरूमें हैं जो कि कृत्रिम रूप से उगाई जा सकती है। खाने वाली गुच्छी मशरूम हिमाचल प्रदेश, जम्मू व कश्मीर तथा उत्तराखंड के ऊँचें पहाड़ों से एकत्रित की जाती है।
क्या मशरूम में बीमारियां लगती हैं?
जी हां, मशरूम में विभिन्न प्रकार की बीमारियां लगती है। मशरूम की कुछ मुख्य बीमारियां गीला बुलबुला, शुश्क बुलबुला, कोब बेब व मोल्ड (हरा, पीला, भूरा) है।

ढींगरी मशरूम उगाने का सही समय

दक्षिण भारत तथा तटवर्ती क्षेत्रों में सर्दी का मौसम विशेष उपयुक्‍त है। उत्‍तर भारत में ढींगरी खुम्‍बी उगाने का उपयुक्‍त समय अक्‍तुबर से मध्‍य अप्रैल के महीने हैं।ढींगरी खुम्‍बी की फसल के लिए 20 से 28 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान त‍था 80-85% आर्द्रता बहुत उपयुक्‍त होती है।आजकल ढींगरी की 12 से अधिक प्रजातियॉ भारत के विभिन्‍न भागों में उगायी जाती हैं। इनमें से फ्ल्‍यूरोटस सजोरकाजू, फ्ल्‍यूरोटस फ्लोरिडा, फ्ल्‍यूरोटस ऑस्ट्रिएटस, फ्ल्‍यूरोटस फ्लेबेलेटस तथा फ्ल्‍यूरोटस सिट्रोनोपिलेटस आदि प्रमुख प्रजातियॉ है।

ढींगरी मशरूम को उगाने की विधि

ढींगरी की फ्ल्‍यूरोटस सुजोरकाजू प्रजाति को धान के पुआल पर उगाने के लिए पुआल को 3-5 सेमी लम्‍बे टुकडो में काट कर स्‍वच्‍छ जल में रात भर के लिए भिगो दें। अगली सुबह अतिरिक्‍त पानी निकाल दें।

ढींगरी मशरूम की बीजाई या स्‍पानिंग

मशरूम के बीज को स्‍पान कहतें हैं। भूसे के वजन के 5-7% के बराबर ढींगरी का बीज या स्‍पान लेकर उसे गीले भूसे में मिला दें। यदि तापमान कम हो तो बीज की मात्रा 25 % तक बढा दें। बीजाई या तो परतों में करें या फिर भूसे मे एकसार मिला दें।बीज मिले भूसे को छिद्रयुक्‍त 45 X 30 आकार की पालिथिन की थैलियों में दो तिहाई भरकर थैली का मुहॅ बांध दें। थैलियों का आकार आवश्‍यकतानुसार छोटा या बडा भी प्रयोग किया जा सकता है। चाकोर खण्‍डों में उगाने के लिए उपयुक्‍त आकार के सांचे या लकडी की पेटी का प्रयोग करें। सांचे या पेटी में पॉलिथीन की छिद्रयुक्‍त सीट बिछा दें। अब सॉचे में उपरोक्‍त बताये अनुसार तैयार किया बीजयुक्‍त भूसा भर दें या फिर भूसा भरकर परतों में बीजाई कर दें। भूसे को हल्‍के हाथ से दबा दें तथा पॉलिथीन के खंड को सॉचे से बाहर निकाल दें।

बीजाई के बाद मशरूम की देखभाल

कवक जाल का बनना:
बीजाई के पश्‍चात पेटी अथवा थैलियों को खुम्‍बी कक्ष में टांडो पर रख दें तथा इन पर पुराने अखबार बिछाकर पानी से भिगो दें। कमरे मे पर्याप्‍त नमी बनाने के लिए कमरे के फर्स व दीवारों पर भी पानी छिडकें। इस समय कमरे का तापमान 22 से 26 डिग्री सेंन्‍टीग्रेड तथा नमी 80 से 85 प्रतिशत के बीच होनी चाहिए।अगले 10 से 12 दिनों में खुम्‍बी का कवक जाल सारे भूसे में फैल जाएगा। इस अवस्‍था में भूसा परस्‍पर चिपक कर मजबूत हो जाता है तथा इधर उधर लेजाने पर टूटता नही। अब पालिथीन काट कर या खोलकर अलग करदें । पालिथीन रहित बेलनाकार या चाकोर खण्‍डो को टांड पर अगल बगल लगभग एक फुट की दूरी पर रख दें। दिन में दो बार पानी छिडक कर नमी 85 से 90 % बनाए रखें।
खुम्‍बी फलनकाय का बनना तथा उनकी तुडवाई:
उपयुक्‍त तापमान (24 से 26 C) पर अगले लगभग 10-12 दिन बाद भूसे पर छोटी-छोटी खुम्‍बियां दिखाई देने लगती हैं जो अगले चार पॉच दिनों में पूरी बढ जाती हैं। जब खुम्‍बी के फलनकाय के किनारे भीतर की ओर मुडने लगे तब खुम्‍बी को तेज चाकू से काटकर या डंठल को मरोडकर निकाल लें। 8-10 दिनों के अन्‍तराल पर खुम्‍बीयों की 2-3 फसल आती हैं जिनसे लगभग 95 % उपज प्राप्‍त हो जाती है।

ढींगरी की पैदावार तथा भंडारण

सामान्‍यत: 1.5 किलोग्राम सूखे पुआल या 6 किलोग्राम गीले भूसे से लगभग एक किलोग्राम ताजी खुम्‍बी आसानी से प्राप्‍त होती है। उत्‍तम फार्मप्रबंधन तथा रोगों से बचाव करके अधिक उपज भी प्राप्‍त की जा सकती है। खुम्‍बी को ताजा ही प्रयोग करना श्रेष्‍ठ होता है परन्‍तू फ्रिज में 5 डिग्री ताप पर 4-5 दिनों के लिए इनका भंडारण भी किया जा सकता है। धुप में यांत्रिक शुष्‍कक में सुखाकर वायूरूद्ध डिब्‍बो में भरकर भी रख सकते हैं।

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