हैब्सबर्ग राजवंश

हैब्सबर्ग राजवंश जिसे आधिकारिक तौर पर ऑस्ट्रिया राजवंश भी कहा जाता है। यह यूरोप के सबसे प्रभावशाली और प्रतिष्ठित शाही घरानों में से एक है। पवित्र रोमन साम्राज्य का सिंहासन 1440 से निरन्तर 1740 में पुरुष वारिसों के विलुप्त होने तक एवं 1765 में फ्रांसिस प्रथम की मृत्यु के बाद 1806 में इसके विघटन तक हैब्सबर्ग का रहा। ‘हैब्सबर्ग साम्राज्य’ संयुक्त रूप से उन क्षेत्रों के लिये प्रयोग होता है जिनपर हैब्सबर्ग राजवंश का शासन रहा।
इस राजवंश से बोहेमिया, हंगरी, क्रोएशिया, गैलिशिया, पुर्तगाल और स्पेन के साथ-साथ नीदरलैंड और इटली में कई रियासतों के शासक और ऑस्ट्रिया, ऑस्ट्रिया-हंगरी और मेक्सिको के सम्राट निकले। 16वीं शताब्दी से, चार्ल्स पंचम के शासनकाल के बाद, राजवंश अपनी ऑस्ट्रियाई और स्पेनिश शाखाओं के बीच विभाजित हो गया था। यद्यपि उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों पर शासन किया, फिर भी उन्होंने निकट संबंध बनाए रखें और अक्सर अंतर्जातीय विवाह किये।

इतिहास

यह राजवंश हैब्सबर्ग कैसल से अपना नाम लेता है जो वर्तमान स्विट्जरलैंड में 1020 के दशक में रैडबोट नामक व्यक्ति ने बनवाया था। उनके पोते ओटो द्वितीय ने किले का नाम अपने नाम के रूप में सबसे पहले लिया और अपने को ‘काउंट ऑफ़ हैब्सबर्ग’ घोषित किया। हैब्सबर्ग राजवंश ने 11वीं, 12वीं और 13वीं शताब्दी में अपनी प्रतिष्ठा को काफी ऊँचा किया। 1273 में, काउंट रैडबोट की सातवीं पीढ़ी के वंशज रूडोल्फ हैब्सबर्ग जर्मनी के राजा (किंग ऑफ़ जर्मनी) बन गए। उन्होंने परिवार के सत्ता के आधार को आस्ट्रिया में स्थानांतरित कर दिया, जिस पर हैब्सबर्ग ने 1918 तक शासन किया।
राजवंशीय विवाहों की एक श्रृंखला ने बरगंडी, स्पेन और उसके औपनिवेशिक साम्राज्य, बोहेमिया, हंगरी और अन्य क्षेत्रों में हैब्सबर्ग परिवार के राजाओं को स्थापित किया। 16 वीं शताब्दी में, परिवार वरिष्ठ स्पेनिश और जूनियर ऑस्ट्रियाई शाखाओं में विभाजित हो गया। 18वीं शताब्दी में हैब्सबर्ग पुरुष वंशज समाप्त हो गए। 1700 में स्पेन के चार्ल्स द्वितीय की मृत्यु पर वरिष्ठ स्पैनिश शाखा समाप्त हो गई और उसे बॉरबन राजवंश द्वारा प्रतिस्थापित किया गया। शेष ऑस्ट्रियाई शाखा 1740 में पवित्र रोमन सम्राट चार्ल्स चतुर्थ की मृत्यु के साथ पुरुष वंशजों में समाप्त हो गई। फिर ऑस्ट्रिया का सिंहासन उनकी सबसे बड़ी बेटी मारिया थेरेसा की फ्रांसिस तृतीय, ड्यूक ऑफ लोरेन की शादी से उनके वंशजों को प्राप्त हुआ।
प्रथम विश्व युद्ध के बाद हैब्सबर्ग राष्ट्रीय समाजवाद और साम्यवाद का विरोधी था। जर्मनी में एडॉल्फ हिटलर ने पारंपरिक जातीय, धार्मिक और भाषा प्रथाओं को बनाए रखने के लिए अपने शासन के तहत स्थानीय समुदायों को बड़े पैमाने पर अनुमति देने के लिए सदियों पुराने हैब्सबर्ग सिद्धांतों का विरोध किया और इस कारण उन्हें हैब्सबर्ग परिवार के खिलाफ घृणा का सामना करना पड़ा। द्वितीय विश्व युद्ध के समय में मध्य यूरोप में एक मजबूत हैब्सबर्ग प्रतिरोध आंदोलन था, जिसे नाजियों और गेस्टापो द्वारा मौलिक रूप से दबाया गया था। इन समूहों के अनौपचारिक नेता ओटो वॉन हैब्सबर्ग थे, जिन्होंने नाजियों के खिलाफ और फ्रांस एवं संयुक्त राज्य अमेरिका में एक मुक्त मध्य यूरोप के लिए अभियान चलाया था। अराजकतावादी, कम्युनिस्ट, सोशलिस्ट और लिबरल के साथ-साथ सोवियत संघ सख्ती से हैब्सबर्ग के विरोधी थे क्योंकि उन्हें शीत युद्ध के दौरान अपने उत्पीड़ित देशों में विरोध का डर था। हैब्सबर्ग परिवार ने आयरन कर्टन के पतन और कम्युनिस्ट ईस्टर्न ब्लॉक के पतन में एक प्रमुख भूमिका निभाई।
हैब्सबर्ग साम्राज्य कभी भी एकीकृत और एकात्मक राज्य नहीं था, जैसा कि बोरबॉन फ्रांस, जर्मनी या ग्रेट ब्रिटेन था। यह उन प्रदेशों से बना था जो हैब्सबर्ग परिवार के प्रमुख को निष्ठा से अपना वंशानुगत स्वामी मानते थे। हैब्सबर्गों को अधिकतर इन क्षेत्रों के उत्तराधिकारियों से शादी करने के कारण यह क्षेत्र प्राप्त हुए थे। यह प्रयोग स्पेन और नीदरलैंड में सबसे दृश्यमान है।
हैब्सबर्ग साम्राज्य को एक ओर आकार का लाभ था, वहीं दूसरी ओर कई नुकसान भी थे। इसके चारों तरफ प्रतिद्वंद्वी थे, इसका वित्त अस्थिर था, जनसंख्या कई जातीयताओं में विभाजित थी और इसका औद्योगिक आधार महीन था। इसके नौसैनिक संसाधन इतने कम थे कि इसने विदेशी साम्राज्य बनाने की कोशिश नहीं की। इसके पास प्रिंस मेट्रिनिच जैसे अच्छे राजनयिकों का लाभ था एवं जीवित रहने के लिए एक शानदार रणनीति थी जिसने प्रथम विश्व युद्ध की अंतिम आपदा तक ओटोमन्स, फ्रेडरिक द ग्रेट, नेपोलियन और बिस्मार्क के साथ युद्धों के बावजूद साम्राज्य को बनाए रखा। कैपेटियन राजवंश के साथ, यह दो सबसे शक्तिशाली महाद्वीपीय यूरोपीय शाही परिवारों में से एक था, जो लगभग पाँच शताब्दियों के लिए यूरोपीय राजनीति पर हावी रहा।

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