संसदीय प्रक्रिया का इतिहास व विभिन्न रूप

16 वीं और 17 वीं शताब्दी में, इंग्लैंड के प्रारंभिक संसदों में अनुशासन के नियम थे। 1560 के दशक में सर थॉमस स्मिथ ने स्वीकृत प्रक्रियाओं को लिखने की प्रक्रिया आरम्भ की और 1583 में हाउस ऑफ कॉमन्स के लिए उनके बारे में एक पुस्तक प्रकाशित की। प्रारंभिक प्रक्रिया में निम्न नियम शामिल थे:
एक समय में एक विषय पर ही चर्चा होनी चाहिए (1581 को अपनाया गया)
व्यक्तिगत हमलों को बहस में टाला जाना चाहिए (1604)
चर्चा प्रश्न के गुणों तक सीमित होनी चाहिए (1610)
जब प्रश्न के एकाधिक हिस्से हों तब प्रश्न का विभाजन होना चाहिए (1640)

वेस्टमिंस्टर प्रक्रिया
वेस्टमिंस्टर प्रणाली का पालन यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, भारत और दक्षिण अफ्रीका समेत अधिकांश राष्ट्रमंडल देशों में होता है, जिनमे ब्रिटिश संसद में वर्षों में विकसित हुई परंपरा से निकली प्रक्रिया के अनुरूप नियमों का पालन होता है। मसलन, भारत, कनाडा इत्यादि देशों की संसदीय प्रक्रिया संहिता ब्रिटेन में इस्तेमाल किये जाने वाली प्रक्रिया के आधार पर निर्मित की गयी है।

अमेरिकी प्रक्रिया
अमेरिकी कांग्रेस के लिए संसदीय प्रक्रिया को ब्रिटिश प्रक्रिया के आधार पर थॉमस जेफ़र्सन द्वारा निर्मित किया गया था, इसमें ब्रिटिश नियमों से कुछ भिन्नता थी, मुख्यतः उसे गणतांत्रिक मूल्यों और अध्यक्षीय व्यवस्था के अनुरूप बनाया गया है।[3] यह अथवा इससे प्रेरित संसदीय व्यवस्थाएँ इंडोनेशिया, फिलीपींस, मेक्सिको और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भी पायी जाती है।

जापान
जापान के डाइट की प्रक्रियाओं को मूल रूप से ब्रिटिश प्रणाली के आधार पर डिजाइन किया गया था, लेकिन यह समय के साथ ब्रिटिश संसदीय मॉडल से दूर हो गया। अमेरिकी अधिकृत-जापान में, जापानी संसदीय प्रथाओं को अमेरिकी संसदीय प्रक्रियाओं के अधिक अनुरूप लाने का प्रयास किया गया था।[4] जापान में, औपचारिक प्रक्रियाओं की तुलना में अनौपचारिक बातचीत अधिक महत्वपूर्ण होती है।

इटली
इटली में नियमों के लिखित कोड संसद के सदनों के जीवन को नियंत्रित करते हैं: संवैधानिक न्यायालय उन सीमाओं को निर्धारित करता है, जिनके पार ये नियम नहीं जा सकते।

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