यूनान का इतिहास

यूनान के इतिहास से आशय आधुनिक यूनान के अन्दर आने वाले क्षेत्रों का इतिहास से होने के अलावा इसका आशय यूनानी लोगों तथा उनके द्वारा शासित प्रदेशों के इतिहास से है। यूनानी लोगों के वास का क्षेत्र अलग-अलग काल में भिन्न-भिन्न रहा है, इस कारण यूनान का इतिहास भी इस मामले में परिवर्ती है कि किस युग में किस क्षेत्र क्षेत्र को ‘यूनान’ कहा जाय।

प्रागैतिहासिक सभ्यता
यूनान की मुख्य भूमि और उसके द्वीप लगभग 4000 वर्ष ईसा पूर्व बस चुके थे। ई.पू. दूसरी सहस्त्राब्दी तक ईजियाई सभ्यता थी जहाँ से लोगों के मिस्र और एशिया माइनर से संबंध सुगम थे। लगभग 17वीं शताब्दी ई.पू. में बाल्कन क्षेत्र की ओर से ग्रीस और पेलोपोनसस्‌ पर आक्रमण हुए। सभी आक्रमणकारी जातियाँ- एकियाई, आर्केडी, इपोलियन, अपोली और आयोनी- ग्रीक भाषाओं से परिचित थीं। ई.पू. 1500 वर्ष तक मिनोई प्रभाव में एकियाई जाति ने ग्रीस से सभ्यता का विकास किया। माइसीनी युग, हीरो युग और होमर युग भी इस काल के नाम हैं। कहा जाता है कि ट्रोजन युद्ध, जिसकी कथा को लेकर होमर ने अपने विश्वप्रसिद्ध काव्य ‘इलियड और ओडिसी’ लिखे, एकियाई तथा अन्य ग्रीसवासियों के बीच ई.पू. 12वीं शती में लड़ा गया था। ई.पू. 1100 में डोरियाई जाति ने ग्रीस पर आक्रमण कर पुरानी सभ्यता नष्ट कर दी और अपना केंद्र पेलोपोनेसस्‌ बनाया। एकियाई लोगों में से कुछ उत्तरी पश्चिमी यूरोप की ओर भागे, कुछ ने दासवृत्ति अपना ली। आयोनी और अपोली, ईजियाई द्वीपसमूह और एशिया माइनर की ओर चले गए। ई.पू. 1000 तक संपूर्ण ईजियाई क्षेत्र में ग्रीक भाषी लोग बस चुके थे।
हेलेनिक राज्य
1000-499 ई.पू. में मुख्य रूप से ग्रीक नगर-राज्यों की स्थापना हुई और जातिभेद चेतना का प्रादुर्भाव हुआ। प्रांरभिक हेलेनिक राज्यों का शासन राजाओं द्वारा होता था। शनै: शनै: राजतंत्र में परिवर्तित हुआ। कुलीनतंत्र में राजनीतिक समानता प्राय: नहीं थी। लगभग 650 ई.पू. में सामाजिक और राजनतिक संघर्षों ने इस कुलीन तंत्र को उखाड़ फेंका और अधिनायकवादी शासन की स्थापना हुई। केवल स्पार्टी में ही कुलीन तंत्र बन सका। कुछ अधिनायकवादी शासकों ने अवश्य ही कला, साहित्य, व्यापार और उद्योग की उन्नति की, किंतु जब अधिनायकवाद जनपीड़न की स्थिति में पहुँचा तो उसका भी अस्तित्व ई.पू. 500 तक मिट गया। ई.पू. 750-500 तक व्यापारिक और राजनीतिक कारणों से इटली तथा सिसली के कई भागों में ग्रीकों ने उपनिवेश बसाए। इनके उपनिवेश व्यापार के प्रसार की दृष्टि से स्पेन और फ्रांस तक भी फैले। कुछ दिन तक ग्रीकों का प्रसार मिस्त्र की ओर रुका रहकर, किन्तु लगभग 7वीं शताब्दी ई.पू. में व्यापार की समस्य से सुगम हो गया। वहाँ ग्रीकों ने ‘नाक्रेतिस’ नगर बसाया। इसके बाद थ्रोस आदि अनेक स्थानों पर उपनिवेश बसे। ये उपनिवेश अपने मुख्य राज्य से केवल भावात्मक संबंध रखते हुए, राजनीतिक रूप से स्वतंत्र थे। केवल कुछ, जैसे एपिडाम्नस, पेलोपोनिया, अंब्रासिय आदि कोरिंथ के उपनिवेश, राजनीतिक रूप से स्वतंत्र नहीं थे। सिराक्यूज़ और बैजंटियम अत्यंत संपन्न उपनिवेशों में थे। समान्य धार्मिक भावना के कारण इन सारे उपनिवेशों में एकता कायम रही। डेल्फी में अपोलो ग्रीकों का मुख्य धार्मिक केंद्र था। वस्तुत: 7वीं और 6ठी शती ई.पू. का काल सांस्कृतिक विकास और बौद्धिक जागरण का काल था।
स्पार्टा
500 ई.पू. तक स्पार्टा और एथेंस ग्रीस के दो बड़े नगरराज्य बने। स्पार्टा का शासन प्राचीन परिपाटीवाले कुलीनों के हाथ में था। एथेंस के शासक मध्यवर्गीय और प्रजातांत्रिक थे। ई.पू. 7वीं शताब्दी तक स्पार्टा में संस्कृति, काव्य और कला की प्रचुर उन्नति हुई, किंतु वहाँ की शासनपद्धति अत्यंत कठोर थी। शिशु के उत्पन्न होते ही, राज्य उसे अपने संरक्षण में ले लेता था और उसे युद्ध की शिक्षा दी जाती थी। लाइकर्गस स्पार्टा का संविधान निर्माता था। शासनसूत्र के संचालन के लिये दो सदन होते थे, जिनके अध्यक्ष दो राजा होते थे। अंतिम निर्णय का अधिकार निम्न सदन को था। पाँच न्यायाधीशों (एफर)द्वारा कार्यकारिणी समिति, न्याय और अनुशासन का संचालन होता था। वे राजाओं की गतिविधि पर भी नियंत्रण रखते थे। सैनिक शक्ति द्वारा स्पार्टा ने पेलीपोनेसस्‌ के संपूर्ण नगर अपने अधिकार में कर लिए और पेलोपोनेशियाई संघ के नेता के रूप में इस नगर ने अधिकृत नगरराज्यों को भी कुलीन तंत्र स्वीकार करने को बाध्य किया।

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