ओजोन में छिद्र और उसके कारण

अंटार्कटिक ओजोन छेद अंटार्कटिक समताप मंडल का एक क्षेत्र है जिसमें हाल ही के ओजोन स्तर 1975 की तुलना में 33% तक गिर गए हैं। ओजोन के छेद, अंटार्कटिक वसंत ऋतु के दौरान, सितम्बर से दिसम्बर की शुरुआत तक, होते हैं, जैसे ही प्रबल पश्चिमी हवाएं महाद्वीप के चरों और बहने लगती हैं और एक वायुमंडलीय कंटेनर का निर्माण करती हैं। इस ध्रुवीय भंवर (polar vortex) के भीतर नीचली समताप मंडलीय ओजोन का 50% से अधिक भाग अंटार्कटिक वसंत ऋतु के दौरान नष्ट हो जाता है।
जैसा की ऊपर बताया गया है कि ओजोन रिक्तिकरण का समग्र कारण है क्लोरीन युक्त स्रोत गैसों की उपस्थिति (मुख्य रूप से सीएफसी और संबंधित हेलो कार्बन) यूवी प्रकाश की उपस्थिति में, ये गैसें अपघटित होकर क्लोरीन परमाणु मुक्त करती हैं, जो ओजोन के विनाश का कारण बनते हैं। क्लोरीन-उत्प्रेरित ओजोन रिक्तिकरण गैस प्रावस्था में हो सकता है, लेकिन यह ध्रुवीय समताप मंडलीय बादल (polar stratospheric cloud)s (PSCs) की उपस्थिति में नाटकीय रूप से बढ़ जाता है।
ये ध्रुवीय समताप मंडलीय बादल सर्दी में, अत्यधिक ठंड में बनते हैं। ध्रुवीय सर्दियां बहुत गहरी होती हैं, लगभग तीन माह तक सूर्य का प्रकाश नहीं देखा जा सकता है। न केवल सूर्य का प्रकाश में कमी ताप को कम करती है बल्कि ध्रुवीय भंवर (polar vortex) को जकड कर ठंडा कर देती है। ताप लगभग -80 ° सेल्सियस के नीचे रहता है, ये निम्न ताप बादलों के कण बनाते हैं, ये या तो नाइट्रिक एसिड (प्रकार I PSC) या बर्फ (Type II PSC) के बने होते हैं। दोनों प्रकार रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए सतह उपलब्ध करते हैं, जो ओजोन के विनाश का कारण हैं।
प्रकाश रासायनिक (photochemical) क्रिया जटिल है लेकिन समझी जा सकती है। कुंजी अवलोकन यह है कि सामान्यतया, समताप मंडल में अधिकांश क्लोरीन स्थायी “भण्डार ” योगिकों में रहती है, प्राथमिक रूप से हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) और क्लोरीन नाइट्रेट (ClONO2)। अंटार्कटिक सर्दियों और वसंत के दोरान ध्रुवीय समताप मंडलीय बादल के कणों की सतह पर अभिक्रिया इन “भण्डार ” योगिकों को प्रतिक्रिया मुक्त मूलकों (Cl and ClO) में बदल देती है। बादल वायुमंडल में से NO2को भी हटा देते हैं, वे इसे नाइट्रिक अम्ल में बदल देते हैं, यह नव निर्मित ClO को ClONO2में परिवर्तित होने से रोकता है।
ओजोन रिक्तिकरण में सूर्य के प्रकाश की भूमिका के कारण अंटार्कटिक ओजोन रिक्तीकरण वसंत ऋतु के दौरान सबसे अधिक होता है। सर्दियों के दौरान, हालांकि PSCs अपनी अधिकतम मात्रा में होते हैं, ध्रुव के ऊपर रासायनिक अभिक्रिया के लिए कोई प्रकाश नहीं होता है। बसंत के मौसम के दौरान, तथापि, सूरज उदय होकर प्रकाश रासायनिक अभिक्रियाओं के लिए ऊर्जा प्रदान करता है और ध्रुवीय समताप मंडल के बादलों को पिघला देता है, जिससे उसमें जकडे हुए योगिक मुक्त हो जाते हैं।
अधिकांश नष्ट हुई ओजोन नीचले समताप मंडल में होती है, इसके विपरीत सजातीय गैस चरण प्रतिक्रियाओं, के माध्यम से बहुत कम ओजोन रिक्तिकरण होता है, जो प्रारंभिक रूप से उपरी समताप मंडल में होता है।
वसंत के अंत के पास गर्मी देने वाला तापमान मध्य दिसम्बर में भंवर को तोड़ देता है। गर्म होने पर ओजोन से युक्त हवा नीचले आक्षांशों से प्रवाहित होती है, PSCs नष्ट हो जाते हैं, ओजोन रिक्तीकरण प्रक्रिया बंद हो जाती है, ओजोन छेद भर जाता है।

ओजोन परत रिक्तीकरण में रूचि
हालाँकि अंटार्कटिक ओजोन होल का वैश्विक ओजोन को कम करने में बहुत कम प्रभाव होता है, यह प्रति दशक 4% होने का अनुमान है, छेद ने बहुत अधिक रुचि पैदा की है क्यों कि:
1980 के दशक में ओजोन की परत में कमी का अनुमान साठ वर्ष की अवधि मोटे तौर पर 7% लगाया गया।
1985 में अचानक पाया गया कि प्रेस में एक पर्याप्त आकर का छेद रिपोर्ट किया गया। विशेष रूप से अंटार्कटिका में तेजी से होने वाले ओजोन रिक्तीकरण को पहले से ही मापन त्रुटि माना गया है।
अनेक
जब अंटार्कटिक ओजोन छिद्र फट जाएगा तो कम ओजोन से युक्त हवा बहार निकलकर आस पास के क्षेत्रों में चली जायेगी.न्यूजीलैंड में एक माह में ओजोन स्तर में 10% तक कमी देखी गई है, जो अंटार्कटिक ओजोन होल के टूटने का कारण है।

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