पृथ्वी की जमीन पर कितने अंदर तक छेद किया जा सकता है, जानकर उड़ जाएंगे आपके होश

पृथ्वी जिसे विश्व (The World) भी कहा जाता है, सूर्य से तीसरा ग्रह और ज्ञात ब्रह्माण्ड में एकमात्र ग्रह है जहाँ जीवन उपस्थित है। यह सौर मंडल में सबसे घना और चार स्थलीय ग्रहों में सबसे बड़ा ग्रह है।
रेडियोधर्मी डेटिंग और साक्ष्य के अन्य स्रोतों के अनुसार, पृथ्वी की आयु लगभग 4.54 बिलियन साल हैं। पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण, अंतरिक्ष में अन्य पिण्ड के साथ परस्पर प्रभावित रहती है, विशेष रूप से सूर्य और चंद्रमा से, जोकि पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह हैं। सूर्य के चारों ओर परिक्रमण के दौरान, पृथ्वी अपनी कक्षा में 365 बार घूमती है; इस प्रकार, पृथ्वी का एक वर्ष लगभग 365.26 दिन लंबा होता है। पृथ्वी के परिक्रमण के दौरान इसके धुरी में झुकाव होता है, जिसके कारण ही ग्रह की सतह पर मौसमी विविधताये (ऋतुएँ) पाई जाती हैं। पृथ्वी और चंद्रमा के बीच गुरुत्वाकर्षण के कारण समुद्र में ज्वार-भाटे आते है, यह पृथ्वी को इसकी अपनी अक्ष पर स्थिर करता है, तथा इसकी परिक्रमण को धीमा कर देता है।
क्या आपके मन में भी यह सवाल आया है कि पृथ्वी को कितने गहराई तक खुदा जा सकता है शायद आप लोगों के मन में यह सवाल जरूर आया होगा लेकिन आप कभी भी कल्पना नहीं कर सकते कि पृथ्वी को नीचे तक कितना गहरा खोदा जा सकता है आज हम आप लोगों को इस पोस्ट के माध्यम से दुनिया के सबसे बड़े गड्ढे के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी गहराई जानकर आपके भी होश उड़ जाएंगे जिससे आप पता लगा सकते हैं कि पृथ्वी को नीचे तक कितनी गहराई तक खोदा जा सकता है।
क्या आपके मन में भी यह सवाल आया है कि पृथ्वी को कितने गहराई तक खुदा जा सकता है शायद आप लोगों के मन में यह सवाल जरूर आया होगा लेकिन आप कभी भी कल्पना नहीं कर सकते कि पृथ्वी को नीचे तक कितना गहरा खोदा जा सकता है आज हम आप लोगों को इस पोस्ट के माध्यम से दुनिया के सबसे बड़े गड्ढे के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी गहराई जानकर आपके भी होश उड़ जाएंगे जिससे आप पता लगा सकते हैं कि पृथ्वी को नीचे तक कितनी गहराई तक खोदा जा सकता है।
पृथ्वी पर सबसे गहरा गड्डा रूस में 1989 में खोदा गया था। जिसकी गहराई 12262 मीटर थी। उस गहराई में टेंपरेचर 180 डिग्री तक पहुंच गया जिसकी वजह से पोल खोदने का काम बंद कर दिया गया था लेकिन इससे भी आगे हाल ही में एक तेल का कुआं रूस में ही खोदा गया जिसकी गहराई 12376 मीटर है।
अगर पृथ्वी के आरपार छेद करना है तो 12742 किलोमीटर का फासला तय करना होगा जो आज के समय मे लगभग नामुमकिन है। पृथ्वी के सबसे ऊपर कि जो लेयर होती है वही 70 किलोमीटर गहरी होती है।
हमारी पृथ्वी का केंद्र 6371 किलोमीटर गहरा हैं और यदि इतनी गहराई तक हम कोई भी गड्ढा खोद सकें तो पृथ्वी के ऊपरी सतह से पृथ्वी के केंद्र तक पहुंचने में हमें 1 घंटा 45 मिनट का समय लग जाएगा। हकीकत यही है कि आधुनिक टेक्नोलॉजी अभी इतनी विकसित नही है कि हम इतनी गहराई तक कभी पहुँच पाएं।
पृथ्वी पर सबसे गहरा गड्डा रूस में 1989 में खोदा गया था। जिसकी गहराई 12262 मीटर थी। उस गहराई में टेंपरेचर 180 डिग्री तक पहुंच गया जिसकी वजह से पोल खोदने का काम बंद कर दिया गया था लेकिन इससे भी आगे हाल ही में एक तेल का कुआं रूस में ही खोदा गया जिसकी गहराई 12376 मीटर है।
अगर पृथ्वी के आरपार छेद करना है तो 12742 किलोमीटर का फासला तय करना होगा जो आज के समय मे लगभग नामुमकिन है। पृथ्वी के सबसे ऊपर कि जो लेयर होती है वही 70 किलोमीटर गहरी होती है।
हमारी पृथ्वी का केंद्र 6371 किलोमीटर गहरा हैं और यदि इतनी गहराई तक हम कोई भी गड्ढा खोद सकें तो पृथ्वी के ऊपरी सतह से पृथ्वी के केंद्र तक पहुंचने में हमें 1 घंटा 45 मिनट का समय लग जाएगा। हकीकत यही है कि आधुनिक टेक्नोलॉजी अभी इतनी विकसित नही है कि हम इतनी गहराई तक कभी पहुँच पाएं।

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