कर्नाटक के प्रमुख युद्ध और उनकी पृष्ठभूमि, आइए जाने

कर्नाटक युद्ध (Karnatic Wars) भारत में इंग्लैंड औ्र फ्रांस के बीच 18वीं शताब्दी के मध्य में अपने बर्चस्व स्थापना की कोशिशों को लेकर हुआ युद्ध है। ब्रिटेन औ्र फ्रांस ने चार बार युद्ध किया। युद्ध का केंद्र कर्नाटक के भूभाग रहे इसलिए इसे कर्नाटक का युद्ध कहते हैं।

पृष्ठभूमि

1707 ई में औरंगजे़ब के निधन के बाद मुगलों का भारत के विभिन्न भागों से नियंत्रण कमज़ोर होता गया। निजाम-उल-मुल्क ने ने स्वतंत्र हैदराबाद रियासत की स्थापना की। उसकी मृत्यु के बाद उसके बेटे नसीर जंग, और उसके पोते मुजफ्फर जंग में उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष शुरु हुआ। इसने ब्रिटेनी और फ्रांसीसी कंपनियों को भारतीय राजनीति में हस्तक्षेप करने का सुनहरा मौका दे दिया। निज़ाम-उल-मुल्क की ही तरह नबाब दोस्त अली खान ने कर्नाटक को मुग़लों और हैदराबाद से स्वतंत्र कर लिया था। दोस्त अली के निधन के बाद उसके दामाद चंदा साहिब और मुहम्मद अली में उत्तराधिकार का विवाद शुरु हुआ। फ्रांस और इंग्लैंड ने यहाँ भी हस्तक्षेप किया। फ्रांस ने चंदा साहिब का और इंग्लैंड ने मुहम्मद अली का समर्थन किया।

कर्नाटक युद्ध
तिथि स्थान परिणाम
1946-1948कर्नाटक, भारतइंग्लैंड की जीत
योद्धा
मुगल साम्राज्य • हैदराबाद का निज़ाम • कर्नाटक का नवाब • बंगाल का नवाबफ्रांस का साम्राज्य • फ्रांस का साम्राज्य फ्रेंच ईस्ट इंडिया कंपनीग्रेट ब्रिटेन राजशाही • ईस्ट इंडिया कंपनी
सेनानायक
आलमगीर द्वितीय अनवरुद्दीन नासिर जंग मुजफ्फर जंग चंदा साहब रज़ा साहब वाला-जाह मुर्तजा अली अब्दुल हैदर अली दलवई नंजाराजा सलाबत जंगडुप्लेक्स दे बसी कोमटे डे लल्ली ड्यूटिल (युद्ध-बन्दी) कानून (युद्ध-बन्दी) दे ला तूचेरॉबर्ट क्लाइव स्ट्रिंगर लॉरेंस

पहला कर्नाटक युद्ध (1746-1748)

उत्तराधिकार के इस संघर्ष में पांडिचेरी के गवर्नर डूप्ले के नेतृत्व में फ्रांसीसियों की जीत हुई। और अपने दावेदारों को गद्दी पर बिठाने के बदले में उन्हें उत्तरी सरकार का क्षेत्र प्राप्त हुआ जिसे फ्रांसीसी अफसर बुस्सी ने सात सालों तक नियंत्रित किया। अंततः एक्स ला चैपल की संधि से अंत हुआ।

दूसरा कर्नाटक युद्ध (1749-1754)

लेकिन फ्रांसीसियों की यह जीत बहुत कम समय की थी क्योकि 1751 ई. में रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में ब्रिटिश शक्ति ने युद्ध की परिस्थितियाँ बदल दी थी। रोबर्ट क्लाइव के नेतृत्व में ब्रिटिश शक्ति ने एक साल बाद ही उत्तराधिकार हेतु फ्रांसीसी डुपले के साथ सभी समर्थित दावेदारों को पराजित कर दिया।अंततः फ्रांसीसियों को ब्रिटिशों के साथ पान्डिचेरी की संधि ya paris ki sandhi करनी पड़ी जो जनवरी 1755 में हुई।

तीसरा कर्नाटक युद्ध 1756-1763

सातवर्षीय युद्ध (1756-1763 ई.।) अर्थात तृतीय कर्नाटक युद्ध में दोनों यूरोपीय शक्तियों की शत्रुता फिर से सामने आ गयी। इस युद्ध की शुरुआत फ्रांसीसी सेनापति काउंट दे लाली द्वारा मद्रास पर आक्रमण के साथ हुई। लाली को ब्रिटिश सेनापति सर आयरकूट द्वारा हरा दिया गया। 1761 ई. में ब्रिटिशों ने पोंडिचेरी पर कब्ज़ा कर लिया और लाली को जिंजी और कराइकल के समर्पण हेतु बाध्य कर दिया। अतः फ्रांसीसी बांडीवाश में लडे गये तीसरे कर्नाटक युद्ध (1760 ई.) में हार गए और बाद में यूरोप में उन्हें ब्रिटेन के साथ पेरिस की संधि करनी पड़ी।

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