गन्ने में लगने वाले प्रमुख रोग एवं उनका उपचार, आइए जाने

इतिहास में एक समय ऐसा भी रहा है जब याचक के पानी मांगने पर उसे मिश्रीमिश्रित दूध दिया जाता था। तब देश में दूध और घी की नदियां बह रही थीं। हमारे अपने देखे काल में ही किसी के पानी मांगने पर उसे पहले गुड़ की डली भेंट की जाती थी और बाद में पानी। हमारा कोई पर्व या उत्सव ऐसा नहीं होता जिस पर हम अपने बंधु-बांधवों और इष्ट-मित्रों का मुंह मीठा नहीं कराते। मांगलिक अवसरों पर लड्डू, बताशे, गुड़ आदि बांटकर अपनी प्रसन्नता को मिल-बांट लेने की परम्परा तो हमारे देश में लम्बे समय से रही है। सच तो यह है कि मीठे की सबसे अधिक खपत हमारे देश में ही है।

मिठास भरा प्राचीन

आयुर्वेद के ग्रन्थों में मधुर रस के पदार्थों से भोजन का श्रीगणेश करने का परामर्श दिया गया है। “ब्रह्मांड पुराण” में भोजन का समापन भी मीठे पदार्थों से ही करने का सुझाव है। एक ग्रन्थ में तो भोजन में मूंग की दाल, शहद, घी और शक्कर का शामिल रहना अनिवार्य कहा गया है। `नामुद्रसूपना क्षौद्र न चाप्य घृत शर्करम्।’ ग्रीष्म ऋतु में शाली चावलों के भात में शक्कर मिलाकर सेवन करने का सुझाव है। शक्ति-क्षय पर मिश्री मिले दूध और दूध की मिठाइयों के सेवन करने की बात कही गई है।

सुश्रुत ने भोजन के छ: प्रकार गिनाए हैं: चूष्म, पेय, लेह्य, भोज्य, भक्ष्य और चर्व्यपाचन की दृष्टि से चूष्य पदार्थ सबसे अधिक सुपाच्य बताए गए हैं। फिर क्रम से उनकी सुपाच्यता कम होती जाती है और चर्व्य सबसे कम सुपाच्य होते हैं। ईख या गन्ने को जो मिठास का प्रमुख स्रोत है, पहले वर्ग में रखा गया है, गन्ने का रस, शरबत, फलों के रस पेय पदार्थों में हैं। चटनी-सौंठ-कढ़ी लेह्य दाल-भात भोज्य, लड्डू-पेड़ा, बरफी भक्ष्य और चना-परवल, मूंगफली चर्व्य हैं।

क्रमांकरोगउपचार विधियॉं
1लाल सड़न रोग (रेड रॉट)
  • गन्ने की बुवाई के पहले बीज (सेट्स) का किसी पारायुक्त कवकनाशी जैसे एगलाल या एरिटान के 0.25 प्रतिशत घोल उपचार करना।
  • प्रभावित पौधों को खेतो से बाहर निकालकर जला देना।
  • प्रभावित फसल की पेड़ी न लेना।
2कण्डुआ (स्मट)
  • इस रोग के लिए कोई रासायनिक उपचार नही है इससे बचाव के लिए कण्डुआ रहित बीज बुआई के लिए प्रयोग करना चाहिए।
  • कण्डुआरोधी प्रजातियों का चयन।
  • प्रभावित फसल की पेड़ी न लेना।
3बिज्ट
  • बुवाई से पहले 0.25 प्रतिशत एगलाल या एरिटान के घोल से बीज उपचार।
  • प्रभावित फसल की पत्तियों एवं जड़ों को जलाकर नष्ट करना।
  • प्रभावित फसल की पेड़ी न लेना।
4ग्रासीसूट : एल्बिनो
  • अवरोधी प्रजातियों का चयन।
  • गर्म जलवायु शोधन 54 डिग्री सेग्रे0 पर 8 घंटे तक।
  • प्रभावित फसल की पेड़ी न लेना।
5रैट्न स्टन्टिंग
  • स्वस्थ्य बीज का उपयोग।
  • गर्म जलवायु शोधन 54 डिग्री सेग्रे0 ताप तथा 99 प्रतिशत आद्‍र्रता पर 2-3 घंटे तक।
  • प्रभावित फसल की पेड़ी न लेना।

Leave a Comment