विश्व के आर्थिक इतिहास की प्रमुख घटनाएँ

1 ई. : विश्व अर्थव्यवस्था में भारतीय अर्थव्यवस्था का हिसा 52.9% था जो एक कीर्तिमान है।
995: चीन में कागज का पहला निजी नोट जारी हुआ।
1000 : विश्व अर्थव्यवस्था में भारतीय अर्थव्यवस्था का हिसा ३३% था, जो संसार में सबसे अधिक हिस्सा है।
1407: यूरोप का प्रथम आधुनिक बैंक ‘Casa delle compere e dei banchi di San Giorgio’, स्थापित
1492: कोलम्बस ने अमेरिका की खोज की; इसके बाद यूरोप द्वारा अमेरिका का उपनिवेशीकरण आरम्भ
1497-1498: वास्को द गामा ने यूरोप से भारत पहुंचने के लिए ‘केप ऑफ गुड होप’ से होकर एक जलमार्ग की खोज की। इसके तुरन्त बाद भारतीय उपमहाद्वीप का उपनिवेशीकरण आरम्भ हो गया।
1545: बोलिविया में ‘पोटोसी सिल्वर माउण्टेन’ की खोज ; धातु की आपूर्ति के लिए यह वैश्विक महत्व की घटना थी।
1602: एम्सटर्डम (Amsterdam) में पहला संगठित स्टॉक-एक्सचेंज शुरू
1656: स्टॉकहोम बैंक ने यूरोप में पहली बार कागज के नोट जारी किए।
1667: लन्दन में पहली बीमा कम्पनी (द इन्स्योरेंस आफिस) स्थापित
1668: स्टॉकहोम बैंक दिवालिया हुआ ; स्वीडेन की संसद ने विश्व का प्रथम ‘केन्द्रीय बैंक’ स्थापित किया। इसे आजकल ‘बैंक ऑफ स्वीडेन’ के नाम से जाना जाता है।
1694: बैंक ऑफ इंग्लैण्ड की स्थापना
1704: रूस में दशमलव पद्धति पर आधारित मुद्राप्रणाली आरम्भ की गई।
1756-1763: सप्तवर्षीय युद्ध जिसके कारण फ्रांस के अधिकांश उपनिवेश हाथ से निकल गए।
1760-1830: ब्रिटेन की औद्योगिक क्रान्ति
1789-1815: फ्रांस में क्रान्ति तथा अत्यधिक मुद्रास्फीति ; नैपोलियन का उदय ; यूरोप तथा यूरोपीय उपनिवेशों में बारंबार युद्ध
1810: नैपोलीय युद्धों के कारण अमेरिका की स्पेन के उपनिवेश उससे अलग होने शुरू हुए। स्वतंत्र राज्य अपनी स्वयं की मुद्रा जारी किए।
1836-1837: इंग्लैण्ड और यूनाइटेड स्टेट्स में वित्तीय संकट
1844: टेलीग्राफ का पहली बार प्रयोग
1847-1848: इंग्लैण्ड और यूनाइटेड स्टेट्स में वित्तीय संकट ; उसके बाद यूरोप के अन्य देशों में भी क्रान्ति तथा वित्तीय उथल-पुथल
1861: अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान यूएस ने गोल्ड स्टैण्डर्ड का परित्याग कर दिया।
1866: इंग्लैण्ड, भारत, इटली, स्पेन, जर्मनी में वित्तीय संकट
1873: जर्मनी रजत मानक से स्वर्ण मानक में परिवर्तित
1885: बर्लिन संगोष्ठी (Conference of Berlin) के सामान्य अधिनियम के आधार पर अफ्रीका बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पुर्तगाल, स्पेन तथा युनाइटेड किंगडम के बीच बंट गया।
1886: दक्षिण अफ्रीका में स्वर्ण-भण्डार का पता चला।
1913: हेनरी फोर्ड ने मोटरकार निर्माण के लिए ‘असेंबली लाइन’ की संकल्पना शुरू की।
1914-1918: प्रथम विश्वयुद्ध ; अमेरिकी डॉलर का अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में उदय
1917: रूस की क्रान्ति ; एक नए प्रकार की अर्थव्यवस्था का उदय जो केन्द्र से योजित (centrally planned) थी।
1926: यूनाइटेड किंगडम की पुनः स्वर्ण मानक में वापसी ; शीघ्र ही अन्य देश भी स्वर्ण मानक को अपना लिया।
1929: विश्वव्यापी महामन्दी ; अर्जेन्टीना, आस्ट्रेलिया, उरुग्वे ने स्वर्ण मानक का त्याग किया। 1936 तक लगभग सभी स्वर्न मानक देशों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से स्वर्ण मानक का त्याग कर दिया।
1935: भारत के केन्द्रीय बैंक ‘भारतीय रिजर्व बैंक’ की स्थापना
1939-1945: द्वितीय विश्वयुद्ध ; युद्ध के परिणामस्वरूप पाउण्ड स्टर्लिंग, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कम महत्व की मुद्रा बन गई।
1946: यूनाइटेड स्टेट्स ने फिलीपींस को स्वतंत्र कर दिया। अगले तीस वर्षों में ब्रिटेन, फ्रांस, डेनमार्क, पुर्तगाल आदि के औपनिवेशिक साम्राज्य का अन्त हो गया।
1947: भारत स्वतंत्र ; अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष काम करना आरम्भ किया।
1960: फ्रांस ने अपने लगभग सभी अफ्रीकी उपनिवेशों को स्वतंत्र कर दिया।
2008-2009: यूएस में पैदा हुए वित्तीय संकट से विश्व अर्थव्यवस्था दशकों बाद सिकुड़ी। इससे यूएस के साथ-साथ यूरोप के देशों में भी वित्तीय संकट दिखा।
2010-2011: यूरो-क्षेत्र के परिधीय देशों में ऋण-संकट
2016 : जनमत-संग्रह में 23 जून 2016 को ब्रिटेन के लोगों ने यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने के पक्ष में मत दिया।

Leave a Comment