जायद में करें उर्द की खेती और कमायें मुनाफा ही मुनाफा

उर्द प्रदेश की एक मुख्य दलहनी फसल है। इसकी खेती मुख्य रूप से खरीफ में की जाती है लेकिन जायद में समय से बुवार्इ सघन पद्धतियों को अपनाकर करने से अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है। विगत 5 वर्षो का उर्द आच्छादन उत्पादन एवं उत्पादकताका विवरण निम्नवत् है।

भूमि एंव उसकी तैयारी

जायद में उर्द की खेती के लिये दोमट तथा मटियार भूमि उपयुक्त रहती है। पलेवा करके एक दो जुताई देशी हल अथवा कल्टीवेटर से करके खेत तैयार हो जाता है। हर जुताई के बाद पाटा लगाना आवश्यक है जिससे नमी बनी रहे। पावर टिलर या ट्रैक्टर से खेत की तैयारी जल्दी हो जाती है।

प्रजातियॉ

अच्छी उपज लेने के लिये जल्दी पकने वाली निम्न प्रजातियां की बुवाई करे।
टा०–9, नरेन्द्र उर्द–1, आजाद उर्द–1, उत्तरा, आजाद उर्द–2, शेखर–2, आई०पी०यू०2-43, सुजाता, माश-479, नरेन्द्र उर्द-1

बुवाई की विधि

उर्द की बुवाई कूंडो में करना चाहियें। कूंड से कूंड की दूरी 20-25 सेमी. कूंड रखना चाहिये। बुवाई के तुंरन्त बाद पाटा लगा देना चाहियें।

बुवाई का समय

बुवाई क उपयुक्त समय 15 फरवरी से 15 मार्च।

उर्वरकों का प्रयोग

सामान्यतः उर्वरकों का प्रयोग मृदा परीक्षण की संस्तुतियों के अनुसार किया जाना चाहिये अथवा उर्वरक की मात्रा निन्नानुसार निर्धारित की जायें।
15-20 किलो नत्रजन, 40 किलो फास्फोरस 20 किग्रा० पोटाश एवं 20 किग्रा० गन्धक प्रति हेक्टर प्रयोग करें।
फास्फोरस प्रयोग से दाने की उपज मे विशेष वृद्धि होती हे। उर्वरकों की सम्पूर्ण मात्रा बुवाई के समय कूडो में बीज से 2-3 सेमी. नीचे देनी चाहियें। यदि सुपरफास्फेट उपलब्ध न हो तो 1 कुन्तल डी0ए0पी0 तथा 2 कुन्तल जिप्सम का प्रयोग बुवाई के समय किया जाये।

सिंचाई

पहली सिंचाई 30-35 दिन बाद करनी चाहिए। पहली सिंचाई बहुत जल्दी करने से जड़ों तथा ग्रन्थियों का विकास ठीक प्रकार नहीं होता है। बाद में आवश्यकतानुसार 10-15 दिन बाद हल्की सिंचाई करते रहें। स्प्रिकलर से सिंचाई अत्यधिक लाभप्रद रहता है।

खरपतवार नियंत्रण

पहली सिंचाई के बाद निकाई करने से खरपतवार नष्ट होने के साथ-साथ भूमि से वायु का भी संचार होता है जो उस समय मूल ग्रन्थियों में क्रियाशील जीवाणुओं द्वारा वायु मण्डलीय नत्रजन एकत्रित करने में सहायक होता है। खरपतवारों का रासायनिक नियंत्रण पैन्डीमैथलीन 30 ई०सी० के 3.3 लीटर को 800-1000 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के दो तीन दिन के अन्दर छिड़काव करें। खरपतवार नियंत्रण हेतु पंक्तियों में बोई गई फसल में वीडर का प्रयोग आर्थिक दृष्टि से लाभकारी होगा।

फसल सुरक्षा

उर्द में प्रायः पीले चित्रवर्ण (मोजैक) रोग का प्रकोप होता है। इस रोग के विषाणु सफेद मक्खी द्वारा फैलते है।

नियंत्रण

समय से बुवाई करनी चाहियें।पीला चित्र वर्ण (मौजेक) अवरोधी प्रजातियोकी बुवाई करनी चाहियें।चित्रवर्ण (मोजैक) प्रकोप पौधे दिखते ही सावधानी पूर्वक उखाड़ कर नष्ट कर जला देना चाहिए या गड्ढ़े में गाढ़ दें।5 से 10 प्रौढ़ मक्खी प्रति पौध की दर से दिखाई पड़ने पर मिथाइल पड़ने पर मिथाइल ओ-डिमेटान 25 ई.सी. या डाईमेथोएट 30 ई.सी. 1 लीटर प्रति हे. की दर से 600-800 ली. पानी में मिलाकर छिडकाव करना चाहियें।

थिप्स

इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ दोनों पत्तियों एवं फूलों से रस चूसते है। भारी प्रकोप होने पर पत्तियों से रस चूसने के कारण वे मुड़ जाती हैं तथा फूल गिर जाते हैं जिससे उपज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

नियंन्त्रण

मिथाइल-ओ-डिमेटान 25% ई०सी० 1 लीटर या डायमिथोएट 30% ई०सी० 1 लीटर प्रति हे० की दर से 600-800 ली० पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए।

हरे फुदके

इस कीट के प्रौढ़ एवं शिशु दोनो पत्तियों से रस चूस कर उपज पर प्रतिकूल प्रभाव डालते है।

नियंन्त्रण

थिप्स के लिये बतायें गये कीटनाशकों के प्रयोग से हरे फुदके का नियन्त्रण किया जा सकता है।

फलीवेधक

किन्ही-2 वर्षों में फली वेधकों से फसल को काफी हानि होती है। इनके नियंत्रण के लिए फेन्थ्रएट 50% ई०सी० 2.00 लीटर अथवा क्यूनालफास 25% ई०सी० 1.25 लीटर प्रति हे० की दर से 600-800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।

कटाई एवं भण्डारण

फसल पूरी तरह पक जाने पर जब फलियॉ काली हो जाये तो कटाई करना चाहियें। उर्द की फलियां एक साथ ही पक जाती है। तथा चिटकती नही। अतः फसल की कटाई एक साथ ही की जा सकती है। भण्डारण मूंग की भाति करे। नीम की पत्तियों का भी प्रयोग करना चाहिये।

प्रमुख बिन्दु

उर्द की बुवाई 15 फरवरी से 15 मार्च तक।सुपर फास्फेट का प्रयोग बेसल ड्रेसिंग में अधिक लाभदायक रहता है।पहली सिचाई बुवाई के 30-35 दिन बाद करेबीजोपचार राइजोबियम कल्चर एवं पी०एस०बी० से अवश्य करें।यदि आलू के बाद उर्द की फसल ली जाती है तो नत्रजन के प्रयोग की आवश्यकता नहीं है।थ्रिप्स के लिए निगरानी रखें। प्रथम सिंचार्इ के पहले नियंत्रण हेतु सुरक्षात्मक छिड़काव करें।

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