पर्यावरण नैतिकता की मार्शल द्वारा प्रतिपादित श्रेणियां

पर्यावरणीय नीति पर्यावरणीय दर्शन का वह खंड है जो नीतिशास्त्र की पारंपरिक सीमाओं को मनुष्यों के दायरे से बढ़ा कर अन्य जीव जंतुओं को भी शामिल करता है। इसका प्रभाव अन्य विषयों जैसे भूगोल और पारिस्थितिकी, अर्थशास्त्र, धर्मशास्त्र, समाजशास्त्र कानून, इत्यादि विषयों पर भी पड़ता है।
हम लोग पर्यावरण से सम्बंधित कई नैतिक निर्णय लेते हैं। उदाहरण के लिए:
क्या हमें मानव उपभोग के लिए जंगलों को काटते रहना चाहिए?
क्या हमें प्रचार करना जारी रखना चाहिए?
क्या हमें पैट्रोल से चलने वाले वाहन बनाते रहना चाहिए?
भविष्य की पीढ़ियों के लिए हमें कौन से पर्यावरणीय दायित्व निभाने की जरूरत है?
क्या यह इंसानों के लिए सही है कि वे मानवता की सुविधा के लिए एक प्रजाति के विलुप्त होने का जानबूझकर कारण बन जाए?
पर्यावरणीय मूल्यों के सैद्धान्तिक क्षेत्र की शुरुआत रेचल कार्सन जैसे वैज्ञानिकों के कार्य की प्रतिक्रया स्वरुप हुईऔर 1970 में प्रथम पृथ्वी दिवस बनाने जैसी घटनाओं के परिणाम स्वरुप हुई.इन मौकों पर वैज्ञानिकों ने दार्शनिकों से आग्रह किया की वे पर्यावरणीय समस्याओं के दार्शनिक पहलुओं पर भी विचार करें. दो वैज्ञानिक लेखों, लिन व्हाइट का,”दा हिस्टॉरिकल रूट्स ऑफ़ ऑवर इकोलौजीकल क्राइसिस” (मार्च 1967) और गैर्रेट हार्डिन का “दा ट्रैजडी ऑफ़ कामन्ज़”(दिसम्बर 1968) ने बड़ा महत्त्वपूर्ण प्रभाव डाला. इसके अतिरिक्त गैर्रेट हार्डिन का बाद में प्रकाशित लेख “एक्सप्लोरिंग न्यू एथिक्स फॉर सर्वाइवल”, और अल्डो लिओपोल्ड की एक किताब अ सैंड कंट्री ऑल्मनैक के एक निबंध “दा लैंड एथिक” ने बड़ा प्रभाव डाला.इस निबंध में लिओपोल्ड ने स्पष्टतया यह दावा पेश किया है कि पारिस्थितिकीय संकट की जड़ें दार्शनिक थी (1949).
इस क्षेत्र की पहली शैक्षिक पत्रिका 1970 के उत्तरार्ध में उत्तरी अमेरिका से और 1980 के प्रारम्भ में-1979 में अमेरिका से निकलने वाली पत्रिका पर्यावरणीय नैतिकता और कनाडा से 1983 में निकलने वाली पत्रिका थी।

नैतिकता की मार्शल द्वारा प्रतिपादित श्रेणियां

कई विद्वानों ने पर्यावरण को सम्मानित करने वाले विविध तरीको को वर्गीकृत करने की कोशिश की है। पीटर वार्डी की पजल ऑफ एथिक्स के अनुसार एलन मार्शल और माइकल स्मिथ इसके हाल ही के दो उदाहरण हैं।[6] मार्शल के अनुसार, तीन सामान्य नैतिक दृष्टिकोण पिछले 40 वर्षों में उभरे है। मार्शल उनका वर्णन करने के लिए निम्नलिखित शब्दों का उपयोग करते है मुक्तिवादी एक्सटेंशन, पारिस्थितिकी एक्सटेंशन और संरक्षण नैतिकता.
(मार्शल के पर्यावरण नैतिकता पर अधिक जानकारी के लिए ये भी देखें:ए मार्शल, 2002, प्रकृति की एकता, इम्पीरियल कॉलेज प्रेस: लंदन).
मुक्तिवादी विस्तार
मार्शल के मुक्तिवादी विस्तार में नागरिक स्वतंत्रता दृष्टिकोण सम्मिलित है (जिसका आशय यह है कि एक समुदाय के सभी सदस्यों को समान अधिकार देने की प्रतिबद्धता होनी चाहिए). पर्यावरणवाद में, हालांकि, समुदाय का आशय आम तौर पर इंसान और अन्य जीव जंतु दोनों से होता है।
एंड्रयू ब्रेन्नन पारिस्थितिक मानवतावाद के पक्षधर हैं और उनका यह तर्क है कि सभी आन्टलाजिकल (ontological) संस्थाओं, अचेतन और चेतन को, विशुद्ध रूप से नैतिक मूल्य दिया जा सकता है क्योंकि उनका अस्तित्व हैं। अर्नी नईस और उनके सहयोगी सेशंस का कार्य भी मुक्तिवादी विस्तार के अंतर्गत आता है परन्तु वे इसे “गहन पारिस्थितिकी” कहना पसंद करते हैं।
पीटर सिंगर के काम को मार्शल के ‘मुक्तिवादी एक्सटेंशन ‘ के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा सकता है। उन्होंने समझाया कि “नैतिक मूल्य का विस्तारित सर्कल” को फिर से बनाया जाना चाहिए और उसमे जानवरों के अधिकारों को भी शामिल किया जाना चाहिए, और अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो ऐसा न करने वाला नस्लवाद के दोषी होंगे. सिंगर ने इस तथ्य को नहीं स्वीकारा की अचेत वस्तुओं का भी आंतरिक मूल्य होता है, और अपनी किताब”प्रैक्टिकल एथिक्स” में उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला की अचेत वस्तुओं को नैतिक मूल्यों के विस्तारित सर्कल में शामिल नहीं किया जाना चाहिए. यह दृष्टिकोण निश्चित रूप से जीव केंद्रित है। हालांकि नईस और सेशंस के कार्य के बाद,”प्रैक्टिकल एथिक्स” के एक बाद के संस्करण में उन्होंने यह स्वीकारा है कि, हालाँकि वे गहन पारिस्थितिकी के विचार से असहमत हैं, परन्तु गैर संवेदनशील संस्थाओं के आंतरिक मूल्य का तर्क संभव है लेकिन फिर भी संदिग्ध है। हम बाद में देखेंगे कि सिंगर वास्तव में एक मानवतावादी नीति की वकालत की है।
पारिस्थितिक विस्तार
एलन मार्शल के मुक्तिवादी विस्तार की श्रेणी ना सिर्फ मानव अधिकारों पर बल देती है बल्कि सभी जैविक (और कुछ अजैविक) संस्थाओं और उनके आवश्यक विविधता के बुनियादी अन्योन्याश्रय की मान्यता पर बल देती है। जहां हम मुक्तिवादी विस्तार को प्राकृतिक संसार के राजनीतिक प्रतिबिंब का हिस्सा मान सकते हैं वहीं पारिस्थितिक विस्तार को हम प्राकृतिक दुनिया के एक वैज्ञानिक प्रतिबिंब के रूप में मान सकते हैं। पारिस्थितिक विस्तार मोटे रूप से स्मिथ के ईको-होलिस्म के समान ही है, और इसका तर्क यह है कि यह पारिस्थितिक तंत्र अथवा वैश्विक पर्यावरण में अन्तर्निहित मूल्य के लिए वे महत्वपूर्ण हैं। अन्य विद्वानों की तरह, होम्स रोल्सटोन, ने भी इस दृष्टिकोण को अपनाया है।
इस श्रेणी में जेम्स लवलौक की गाइआ परिकल्पना भी शामिल है जिसके अनुसार पृथ्वी समय समय पर अपनी शारीरिक संरचना बदलती रहती है ताकि जैविक और अजैविक पदार्थों में संतुलन बना रहे. पृथ्वी को एकीकृत, संपूर्ण संस्थान माना गया है जिस पर लम्बे समय में मनुष्य जाती का कोई महत्व नहीं होगा.
संरक्षण नैतिकता
मार्शल क़ी श्रेणी क़ी ‘संरक्षण नैतिकता’ गैर मानव जैविक दुनिया में उपयोग मूल्य का एक विस्तार है। यह पर्यावरण का महत्व मनुष्य के लिए उपयोगिता के संदर्भ में ही देखता है। यह गहन पारिस्थितिकी के आंतरिक मूल्य का विरोध करता है और इसलिए ही इसे ‘छिछला पारिस्थितिकी’ कहा गया है। यह सिद्धांत मानता है कि पर्यावरण का संरक्षण किया जाना चाहिए क्यूँकी इसका बाह्य मूल्य है – जो क़ी मनुष्य जाति के कल्याण के लिए है। संरक्षण इसलिए एक लक्ष्य के लिए माध्यम भर है और विशुद्ध रूप से मानव जाति और आगे आने वाली पीढ़ियों के हित के लिए है। यह कहा जा सकता कि यही वह तर्क था जो सरकारों ने 1997 में क्योटो सम्मलेन में प्रस्तावित किया और जिस पर वे तीन समझौते आधारित थे जो 1992 में रिओ में लिए गए।

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