नर्सरी तालाब का प्रबंधन

तालाब की सफाई एवं मरम्मत
तालाब कार्य में कार्य किये जाने वाले तालाब को अप्रैल/मई माह में सुखा लें और उसके तल की जुताई या कोड़ाई कर डालें। तालाब के तल से ऊपर के बाँध को चारों तरफ तीन-चार फीट ऊपर तक छिल कर घास/पौधों की सफाई कर दें। तालाब के तल को धूप लगने दें ।
यदि तालाब सदाबाहर है तो उसकी सफाई में 1000 कि.ग्रा./एकड़/ मी. की दर से महुआ तेल वाला खल्ली ज्यादा प्रभावशाली होता है ।
परभक्षी (मांसहारी) एवं जंगली मछलियों का उन्मूलन
महुआ की खल्ली (कि.ग्रा. में) = तालाब की लम्बाई x चौड़ाई x गहराई (मीटर में)/ 4
महुआ की खल्ली डालने के 10-15 घंटे के बाद इसके रासायनिक तत्व (सैपोनीन) के प्रभाव से तालाब की सभी मछलियाँ एवं कीड़े-मकोड़े मर जाते हैं। इस विष के प्रभाव से मरी मछली खाने योग्य रहती है। महुआ की खल्ली के रासायनिक तत्व का प्रभाव पंद्रह से बीस दिनों में समाप्त हो जाता है और तालाब में महुआ खल्ली सड़कर खाद बन जाता है जो मछली का भोजन अर्थात प्लवक (प्लैंकटन) के उत्पादन को बढ़ा देता है।
रासायनिक विष के रूप में ब्लीचिंग पाउडर 140 कि.ग्रा./एकड़/मी.की दर से अथवा 40 कि.ग्रा.,यूरिया,गोबर के साथ मिलाकर देने एवं एक दिन बाद ब्लीचिंग पाउडर 75 कि.ग्रा./एकड़/मी. की दर से प्रयोग करने पर अवांछित मछलियों का उन्मूलन सफलतापूर्वक किया जा सकता है एवं मछलियां खाने योग्य रहती हैं। रासायनिक तत्वों का प्रभाव 5 से 7 दिनों तक रहता है ।
इस बात का विशेष ध्यान रखें की ज्यादा कीचड़ वाले सदाबाहर तालाब का चयन नर्सरी कार्य हेतु नहीं करें।
चूना का प्रयोग
नर्सरी तालाब में 2-2.5 फीट पानी जमा होने पर उसमें भखरा चूना 200 कि.ग्रा./एकड़/मी. जलक्षेत्र की दर से छिड़काव कर दिया जाता है । जिसे तालाब में महुआ की खल्ली का प्रयोग किया गया वहां भी खल्ली के प्रयोग के 5-6 दिनों बाद चूना का प्रयोग किया जाता है। नर्सरी तालाब की पानी एवं मिटटी के पी.एच. के अनुरूप चूना की मात्रा घटाई या बढ़ाई जा सकती है। झारखण्ड प्रदेश की मिटटी अम्लीय है अत: चूना का प्रयोग करना अत्यंत लाभदायक है। अगर पानी का पी.एच. 7 से बराबर हो तो वह पानी उदासीन कहलाता है। मत्स्य उत्पादन के लिये 7.5 से 8.5 तक का पी.एच. अनुकूल माना जाता है। यदि तालाब में ब्लीचिंग पाउडर का प्रयोग किया गया है तो चूना की उतनी मात्रा कम कर दी जाती है।

खाद का प्रयोग
स्पान संचयन की संभावित तिथि से 5-6 दिन पूर्व तालाब में 2000 किग्रा कच्चा (तजा) गोबर/एकड़/ मी. की दर से प्रयोग किया जाता है। यदि तालाब में पूर्व में महुआ खल्ली का प्रयोग किया गया है तो उस तालाब में कच्चा गोबार की आधी मात्रा ही प्रयोग की जाती है। स्पान संचयन से तीन दिन पहले तालाब में मूंगफली/सरसों की खल्ली 100 किग्रा/एकड़/ मी. की दर से प्रयोग करने पर काफी अच्छा परिणाम मिलता है। अकार्बनिक (रासायनिक) खाद के रूप में यूरिया 10-12 किग्रा सिंगल सुपर फास्फेट 10-12 किग्रा एवं म्यूरेट ऑफ पोटाश 2 किग्रा/ एकड़/ माह की दर से प्रयोग किया जा सकता है। प्रत्येक फसल के पूर्व उपर्युक्त मात्रा में खाद का प्रयोग किया जा सकता है। नए तालाब के लिये रासायनिक खाद का प्रयोग ज्यादा उपयोगी है।
जलीय कीटों का उन्मूलन
स्पान संचयन से एक दिन पूर्व नर्सरी तालाब में फ्राई कैचिंग नेट/ चाट जाल दो तीन बार कर मेढंक के बच्चे, केकड़ा या कीड़े-मकोड़ों को निकाल दिया जाता है। उसके उपरांत तालाब में 25-30 ली. डीजल/एकड़/मी. में 30 मि.ली. “नुभान” (कीटनाशक दवा) मिलकर छिड़काव किया जाता है। इसके प्रयोग से तालाब के पानी की सतह पर डीजल की एक फिल्म (परत) बन जाती है जिससे हवा से सांस लेने वाले जलीय कीट नष्ट हो जाते हैं। साबुन/ सर्फ़ को डीजल के साथ घोलकर देने से पानी की सतह पर फिल्म तेजी से बनती है। डीजल के स्थान पर किरासन तेल का भी प्रयोग किया जाता है। प्रत्येक फसल के पूर्व एस विधि से जलीय कीटों का उन्मूलन अवश्य करना चाहिए।
स्पान का संचयन
नर्सरी में 16 से 20 लाख स्पान/एकड़/मी. की दर से संचयन किया जाना चाहिये ।संचयन सुबह या शाम में किया जाना उचित है।स्पान का परिवहन रात में या ठंडे समय में करना चाहिये। संचयन के पूर्व मत्स्य स्पान को अनुकूलन के लिए पैकेट/कंटेनर सहित तालाब में दस से पंद्रह मिनट स्थिर रहने देना चाहिए। इसके बाद पैकेट का मुहं खोलकर धीरे से स्पान को पानी में छोड़ देना चाहिये।

पूरक आहार
अच्छी बढ़त के लिए नर्सरी तालाब में उपलब्ध प्राकृतिक भोजन का अलावा मछलियों को ऊपर से भी आहार देना चाहिए।पूरक आहार के रूप में बारीक़ पीसा हुआ सरसों की खल्ली और चावल का कुंडा का मिश्रण बारीक कपडे में छान कर, सुखा प्रयोग किया जाता है। पीसा हुआ खल्ली उपलब्ध नहीं होने पर इस मिश्रण की आवश्यक मात्रा को रात भर फुला कर सुबह पानी में पतला घोल कर छिड़काव किया जा सकता है ।पूरक आहार सुबह में या शाम में किस्तों में प्रयोग करना चाहिये ।सप्ताह में एक दिन भोजन का प्रयोग बंद रखना चाहिये ।ज्यादा मात्रा मनी मत्स्य फ्राई का उत्पादन प्राप्त करने के लिये कुछ मत्स्य बीज उत्पादक प्रथम दो/ चार दिन बेसन, सरसों का तेल, अंडा, गुड़ आदि का मिश्रण भी पूरक आहार के रूप में प्रयोग करते हैं।
एक लाख स्पान के लिए संचयन की तिथि से सात दिनों तक 600 ग्रा. दुसरे सप्ताह में 1200 ग्रा. एवं तीसरे सप्ताह में 1800 ग्रा. पूरक आहार प्रतिदिन की दर से प्रयोग किया जाना चाहिये ।पूरक आहार में कुल मात्रा का एक प्रतिशत खनिज लवण (एग्रिमीन, फीशमीन आदि) का प्रयोग फायदेमंद रहता है। 20वें दिन मत्स्य बीज का आकार 1 इंच – 1.5 इंच हो जाता है और यह बड़े तालाब (संचयन तालाब) में या अंगुलिकाओं को तैयार करने वाले तालाब में (रियारिंग तालाब) छोड़ने योग्य हो जाता है ।यदि मत्स्य बीज निष्कासन में विलम्ब हो तो नर्सरी में उपलब्ध बीज की अनुमानित वजन का 2 प्रतिशत वजन के बराबर (2 से 2.5 किग्रा) पूरक आहार का प्रयोग तब तक करते रहना चाहिये जब तक मत्स्य बीज का उठाव न हो जाए ।
मत्स्य बीज का निष्कासन एवं परिवहन
मत्स्य बीज/ फ्राई के निष्कासन के लिए सुबह या शाम का समय जब मौसम ठंडा रहता है, उपयुक्त होता है ।मत्स्य बीज निष्कासन से 1 दिन पूर्व ही पूरक आहार का प्रयोग बन्द कर देना चाहिये ।मत्स्य बीज को निकलकर 2 से 4 घंटा तक 4मी.x2मी.x1मी. में हापा में रखा जाता है, जहां उनकी सघनता अधिक होती है, इस अवस्था में मत्स्य बीज के पेट से मल मूत्र निकल जाता है और परिवहन के दौरान उनकी मृत्यु दर कम हो जाती है ।मत्स्य बीज की मांग को देखते हुए यदि मत्स्य बीज का उठाव 16 से 20 दिनों में हो जाता है तो एक ही नर्सरी से मत्स्य बीज की 3 से 5 फसल ली जा सकती है ।सामान्यत: एक एकड़ नर्सरी जलक्षेत्र से मत्स्य बीज की एक फसल के आधार पर लगभग 20000 से 25000 रु खर्च करके 50000/- (पचास हजार रुपया) से 60000/- (साठ हजार रुपये) तक अर्जित किया जा सकता है ।ध्यान देने की बात है की नर्सरी कार्य मात्र 3-4 माह का होता है शेष माह में तालाब में पूर्ववत मछली पालन का कार्य या अंगुलिकाओं के उत्पादन का कार्य आसानी से किया जा सकता है जिससे अतिरिक्त आय की प्राप्ति होगी ।

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