वुलर झील का पुराना नाम व नामोत्पत्ति

वुलर​ झील जम्मू व कश्मीर राज्य के बांडीपोरा ज़िले में स्थित एक झील है। यह भारत की मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है। यह झेलम नदी के मार्ग में आती है और झेलम इसमें पानी डालती भी है और फिर आगे निकाल भी लेती है। मौसम के अनुसार इस झील के आकार में बहुत विस्तार-सिकोड़ होता रहता है – इसका अकार 30 वर्ग किमी से 260 वर्ग किमी के बीच बदलता है। अपने बड़े अकार के कारण इस झील में बड़ी लहरें आती हैं।

पुराना नाम व नामोत्पत्ति
प्राचीनकाल में ‘महापद्म देवता’ इस झील के अधिदेवता थे और उनके नाम पर इस झील को ‘महापद्मसर’ कहा जाता था। झील का अकार बड़ा होने से यहाँ दोपहर में बड़ी लहरें उठती हैं जिस से इसकी शांत सतह पर देखते-ही-देखते ऊँची और ख़तरनाक लहरे उठने लगती हैं। संस्कृत में इन कूदती हुई लहरों को ‘उल्लल’ कहा जाता है और यही नाम विकृत होकर ‘वुलर’ पड़ गया।
ज़ैनुल द्वीप
वुलर के पूर्वोत्तरी कोने में ज़ैनुल लंक नामक एक द्वीप है (‘लंक’ कश्मीरी भाषा में ‘द्वीप’ के लिए शब्द है)। यह एक कृत्रिम द्वीप है जो सन् 1444 में कश्मीर के सुलतान ज़ैन-उल-अबदीन​ ने बनवाया था। वे अपनी धार्मिक सहनशीलता के लिए जाने जाते थे और उन्हें हिन्दू व मुस्लिम कश्मीरी लोग इज़्ज़त से ‘बुड शाह’ (यानि बड़े शाह या महान शाह) के नाम से याद करते हैं। 15वीं सदी के कश्मीरी इतिहासकार जोनराज के अनुसार यह द्वीप बुड शाह ने नाविकों को वुलर में तूफ़ानी स्थितियों में आश्रय देने के लिए बनवाया था। इसपर अभी भी खँडहर मौजूद हैं। जिस काल में उन्होंने यह द्वीप बनवाया था उस समय वुलर थोड़ी अधिक बड़ी थी और टापू झील के बीच में था। धीरे-धीरे वुलर एक तरफ़ से सूखकर सिकुड़ गई और द्वीप अब उसके एक कोने में है।

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