धान प्रतिरोपक और आलू रोपणयंत्र

धान रोपने के लिए एक मशीन बनी है, जिसकी बनावट बड़ी सरल है। इसके तीन भाग होते हैं : धान के पौधों को पकड़नेवाली चिमटी, धान को सीधा रखनेवाला बक्स और इस वक्स को सहारा देनेवाला चौखटा। ये सभी भाग बाँस और लकड़ी के बने होते हैं। धान के पौधों को पकड़नेवाली चिमटी के तीन भाग होते हैं : पकड़नेवाले दाँते, दाहिना और बायाँ मूठ और ऊपर तथा नीचेवाले पतवर तख्ते।

बक्स में पौधे रख दिए जाते हैं। इसमें एक तख्ता सामने और एक पीछे होता है। एक एक तख्ता दाहिनी और बाई ओर और एक तख्ता नली में रहता है, जिसके सहारे बक्स सरकता है, पौधा पकड़ने का पुर्जा होता है। बक्स को पीछे की ओर हाथ से चलाए जानेवाले गियर और एक डोरी होती है, जो स्प्रिंग द्वारा बाँस के उन पहियों से जुड़ी रहती है जिनके द्वारा पौधेवाले बक्स के तख्ते को सरकाया जाता है। यह तख्ता पौधे को बक्स के बाहर निकालने के द्वार तक पहुँचा देता है। द्वार के पास एक पटरी लगी रहती है, जिसके सहारे बक्स सरकता है। इस पटरी को आवश्यकतानुसार 20 डिग्री से 30 डिग्री तक बदला जा सकता है। वहाँ पौधे के बक्स को सहारा देने के लिए चौखटा होता है, जो नाव की तरह तैरनेवाली पेंदी पर जड़ा होता है, ताकि खेतों में वह आसानी से सरकाया जा सके और जमीन में धँसने न पाए। यह जमीन को बराबर भी करता जाता है।
धान प्रतिरोपण मशीन से रोपाई जल्दी और ठीक समय पर होती है। इससे मानव श्रम की बचत होती और पैदावार में वृद्धि होती है। इससे धान का पौधा समांतर पंक्तियों में बोया जा सकता है, जिससे घास साफ करने में सुविधा होती है और प्रकाश का प्रवेश सरल होता है। पौधों की सघनता में कमी बेशी की जा सकती है। अधिक उपजाऊ भूमि में अधिक घना और कम उपजाऊ भूमि में कम घना बोया जा सकता है। प्रति हेक्टेयर में पौधे की संख्या तीन लाख से लेकर छह लाख तक, कतारों की दूरी 16.5 सेंटीमीटर तक और कलियों के बीच की दूरी 10 से 13.2 सेंटीमीटर तक सरलता से रखी जा सकती है। समान दूरी और समांतर पंक्तियों में रोपने के लिए बक्स को बाएँ और दाएँ सरकाया जा सकता है। रोपण मशीन सरलता से सामान्य लोहारखाने और बढ़ईखाने में तैयार की जा सकती है। नानकिंग कृषि यंत्रीकरण अनुसंधान संस्था ने एक अच्छी, 105 वीं धान प्रतिरोपण मशीन बनाई है। धान की उपज में यह यंत्र बड़ा उपयोगी सिद्ध हुआ है।

आलू रोपणयंत्र

आलू की पैदावार बढ़ाने तथा कम खर्च में अधिक आलू उपजाने के लिए अनेक देशों ने सफलता के साथ रोपणयंत्रों का उपयोग किया है। आलू की खेती में काम आनेवाले यंत्र दो प्रकार के होते हैं :
1. एक आदमीवाला, या पीकर टाइप यंत्र और 2. दो आदमीवाला, या प्लेटफार्म टाइप यंत्र।
एक आदमीवाला, या पीकर टाइप, यंत्र बड़ी सुगमता से आलू के एक टुकड़े को बक्से में से उठाता है और बीज को ठीक जगह पर कूँड़ के अंदर डाल देता है। अन्य यंत्रों की अपेक्षा इस यंत्र का काम कुछ कठिन इस कारण होता है कि बीज छोटा बड़ा, टेढ़ा मेढ़ा होता है। इस यंत्र में एक उठानेवाला हाथ, पिक आर्म, होता है, जो बीज के बक्स से बीज उठाता है। उठानेवाले हाथ में दो सुइयाँ होती हैं, जो बीज के टुकड़े को कूंड़ में छोड़ देती है। आलू का टुकड़ा कूंड़ में ठीक जगह पर गिर जाता है। दूसरे तवे से मिट्टी बीज को ढँक देती है। भिन्न भिन्न क्षेत्रों की मिट्टी को गहरा और उथला करने के लिए इस मशीन में युक्तियाँ बनी रहती हैं। इस यंत्र में कुछ हानियाँ भी है। इससे फसलों की बीमारी फैल सकती है और बीज के एक के स्थान में दो टुकड़े गिर सकते हैं।
दो आदमीवाली प्लैटफार्म मशीन एक आदमीवाली मशीन से आकार और बनावट में भिन्न होती है। इसमें ऐसे पुर्जे रहते हैं जो बीज के बक्से में उथल पुथलकर बीज को ऊपर उठाते हैं और क्षैतिज घूमनेवाले एक प्लैटफार्म पर डालते हैं। प्लैटफार्म पर बीज पकड़ने का कोश (pocket) होता है। एक एक करके बीज प्लैटफार्म से बीज नली में गिरता है। यहाँ बीज का उठाना चेन द्वारा होता है, जिसमें छोटी छोटी कटोरियाँ लगी रहती हैं। यदि ये पुर्जें काम न करें, तो एक आदमी हाथ से आलू के टुकड़ों को रखता है। इन मशीनों में उर्वरक डालने की युक्तियाँ भी लगाई जा सकती है।

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