पनामा नहर का इतिहास निर्माण

पनामा नहर (स्पेनी: Canal de Panamá) मानव निर्मित एक जलमार्ग अथवा जलयान नहर है जो पनामा में स्थित है और प्रशांत महासागर तथा (कैरेबियन सागर होकर) अटलांटिक महासागर को जोड़ती है। इस नहर की कुल लम्बाई 72 कि॰मी॰, औसत चौड़ाई 90 मीटर , न्यूनतम गहराई 12 मीटर है। यह नहर पनामा स्थलडमरूमध्य को काटते हुए निर्मित है और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रमुखतम जलमार्गों में से एक है। पनामा नहर पर में पनामा देश का नियंत्रण है। पनामा नहर जल पास या जल लोक पद्धति पर आधारित है।
अमेरिका के पूर्वी और पश्चिमी तटों के बीच की दूरी इस नहर से होकर गुजरने पर तकरीबन 8000 मील (12,875 कि॰मी॰) घट जाती है क्योंकि इसके न होने की स्थिति में जलपोतों को दक्षिण अमेरिका के हॉर्न अंतरीप से होकर चक्कर लगाते हुए जाना पड़ता था। पनामा नहर को पार करने में जलयानों को 8 घंटे का समय लगता हैं।
इस नहर का निर्माण 14 अगस्त 1914 को पूरा हुआ और 15 अगस्त 1914 को यह जलपोतों के आवागमन हेतु खोल दी गई। अभी हाल ही में (14 अगस्त 2014 को) पनामा नहर के निर्माण की 100वीं बरसी मनाई गयी है। जब यह नहर बनी थी तब इससे लगभग 1000 जलपोत प्रतिवर्ष गुजरते थे और अब सौ वर्षों बाद इनकी संख्या लगभग 42 जलपोत प्रतिदिन हो चुकी है।
यह नहर अपने आप में अभियांत्रिकी की एक बड़ी उपलब्धि और विलक्षण उदाहरण भी मानी जाती है। यह नहर एक मीठे पानी की गाटुन झील से होकर गुजरती है और चूँकि इस झील का जलस्तर समुद्रतल से 26 मीटर ऊपर है, इसमें जलपोतों को प्रवेश करने के लिये तीन लॉक्स का निर्माण किया गया है जिनमें जलपोतों को प्रवेश करा कर और पानी भरकर उन्हें पहले ऊपर उठाया जाता है, ताकि यह झील से होकर गुजर सके।
इन लॉक्स की वर्तमान चौड़ाई 35 मीटर है और यह समकालीन बड़े जलपोतों के लिये पर्याप्त नहीं है अतः इसके विस्तार का प्रोजेक्ट चल रहा है जिसके 2015 तक पूरा होने की उम्मीद है।
पनामा नहर को अमेरिकन सोसायटी ऑफ सिविल इंजीनियर्स ने आधुनिक अभियांत्रिकी के सात आश्चर्यों में स्थान दिया है।

इतिहास

आरंभिक प्रयास
पनामा नहर के निर्माण की सबसे पहली योजना स्पेन के राजा और पवित्र रोमन साम्राज्य के सम्राट चार्ल्स पंचम ने सन् 1534 में पास की और इस हेतु सर्वेक्षण के लिये निर्देश जारी किये ताकि स्पेनी व्यापारियों और सेना को पुर्तगालियों से बेहतर जलमार्ग मिल सके और वे इसका लाभ उठा सकें। स्त्रतेजिक और व्यापारिक हितों की महत्वपूर्णता और दोनों नए खोजे गये महाद्वीपों के मध्य स्थित पनामा स्थलडमरूमध्य की कम चौड़ाई के बावजूद यहाँ व्यापारिक मार्ग बनाने का पहला प्रयास 1658 में स्काटलैण्ड राज्य द्वारा किया गया जो एक स्थल मार्ग था और खराब पर्यावरणीय दशाओं और उच्चावच की विषमता के कारण इसे 1700 में लगभग छोड़ ही दिया गया।
1855 में विलियम कनिश नामक इंजीनियर ने संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार के लिये काम करते हुए इस इलाके का सर्वेक्षण किया और रिपोर्ट प्रस्तुत की पुनः 1877 अरमांड रेक्लस (Armand Reclus) नामक फ़्रांसीसी सैन्य अधिकारी (इंजीनियर) और लूसियान नेपोलियन नामक इंजीनियरों ने मिलकर नहर के निर्माण मार्ग का सर्वेक्षण किया जिसके पीछे फ़्रांसीसियों द्वारा स्वेज़ नहर के निर्माण की उपलब्धियों का उत्साह था।
निर्माण
फ़्रांस द्वारा यहाँ नहर बनाए जाने का कार्य 1 जनवरी 1881 को फर्डिनेंड डी लेसप के नेतृत्व में शुरू हुआ जो स्वेज नहर का निर्माणकर्ता था।
भूगर्भिक और जलवैज्ञानिक अध्ययनों के बिना आरम्भ किये गये इस कार्य में अन्य कई बाधाएं भी आयीं जिनमें यहाँ की असह्य जलवायवीय दशाओं और मच्छरों की बहुतायत के कारण बीमारियों तथा अन्य दुर्घटनाओं में तकरीबन 22,000 कर्मियों की जानें गयीं।
अंततः 1889 में यह निर्माता कंपनी दिवालिया हो गयी और फर्डिनेंड डी लेसप के बेटे चार्ल्स डी लेसप को वित्तीय अनियमितताओं के आरप में (जिसे पनामा स्कैंडल कहा गया) पाँच वर्षों की कैद हो गयी। कंपनी को निरस्त कर दिया गया और काम रुक गया। 1894 में एक दूसरी कंपनी कुम्पनी नौवेल्ले दू कैनल डे पनामा (Compagnie Nouvelle du Canal de Panama) बनी लेकिन इसके प्रयास भी सफल नहीं हुए।
अमेरिकी निर्माण
बाद में अमेरिकी सरकार ने कोलंबिया सरकार के साथ संधि करते हुए इस क्षेत्र का अधिग्रहण (तब यह कोलंबिया देश के अंतर्गत था) किया और 1904 में अमेरिकी इंजीनियरों ने कार्य आरम्भ किया जिसमें इस नहर को तीन लॉक्स के साथ बनाने की शुरूआत हुई।
अमेरिकियों ने काफ़ी आध्ययन और निवेश के बाद 1914 में इसे पूरा किया। एक तरह से देखा जाय तो वास्को डी बिल्बोया द्वारा पनामा डमरूमध्य के पार करने के लगभग 400 वर्षों के बाद इस नहर का निर्माण हो पाया। इस प्रोजेक्ट में अमरीकी सरकार ने लगभग $375,000,000 (वर्तमान सम्तुल्य्क $8,600,000,000) खर्च किये
तमाम परिवर्तनों, विवादों और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में इसकी निष्पक्ष स्थिति को बनाये रखने हेतु लगभग 80 किलोमीटर लंबी इस नहर का प्रशासन 31 दिसम्बर 1999 को पनामा को सौंप दिया गया।

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