कीट नियंत्रण

कीट नियंत्रण से आशय कीट के रूप में परिभाषित प्रजाति के नियंत्रण या प्रबंधन से है, क्योंकि आमतौर पर उन्हें व्यक्तियों के स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी या अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक माना जाता है।
कीट नियंत्रण का इतिहास भी लगभग उतना ही पुराना है जितना कि कृषि का क्योंकि फसलों को हमेशा से ही कीट मुक्त रखने की आवश्यकता रही है। खाद्य पदार्थों के उत्पादन को अधिकतम करने के लिए फसलों को पौधों की प्रतिस्पर्धी प्रजातियों के साथ-साथ मनुष्यों के साथ प्रतिस्पर्धा करने वाले शाकाहारी पशु-पक्षियों से बचाना भी लाभप्रद होता है।
सबसे पहले संभवतः पारंपरिक तरीकों का ही इस्तेमाल किया जाता था, क्योंकि घास-फूस को जलाकर या जुताई करके उन्हें जमीन के अंदर करके; और कौवों तथा बीज-भक्षण करने वाले अन्य पक्षियों जैसे बड़े शाकाहारी पशु-पक्षियों को नष्ट करना अपेक्षाकृत रूप से ज्यादा आसान होता है। फसल आवर्तन, सहयोगी फसल-रोपण (जिसे अंतर-फसल या मिश्रित फसल-रोपण भी कहा जाता है) और कीट प्रतिरोधी फसलों के चयनित प्रजनन का एक लंबा इतिहास रहा है।
कई कीट मनुष्य की प्रत्यक्ष गतिविधियों की वजह से ही एक समस्या के रूप में उभरे हैं। इन गतिविधियों के संशोधन द्वारा कीट संबंधी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण किया जा सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में, रैकून नामक एक जानवर अक्सर बोरियों को फाड़ दिया करते थे जो कि एक बड़ी समस्या थी। कई लोगों ने अपने घरों में उनको पकड़ने वाले डिब्बों को रखना शुरु कर दिया जिससे उनका उत्पात में कमी आई. लगभग पूरी दुनिया में मक्खियां अक्सर मानव गतिविधि वाले क्षेत्रों के निकट ही अधिक मात्रा में पाई जाती हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां खाद्य सामग्री खुले में रखी जाती है। इसी प्रकार, समुद्री पक्षी सागर तट पर बने कई रिसोर्ट्स में काफी उत्पात मचाते हैं। पर्यटक अक्सर इन पक्षियों को मछलियों या चिप्स के टुकड़े खिलाते हैं जिसके कारण जल्द ही वे पक्षी उनके आदी हो जाते हैं और मनुष्यों के प्रति आक्रामक व्यवहार करने लगते हैं।
ब्रिटेन में, पशु कल्याण के प्रति चिंता के कारण कीट नियंत्रण के लिए मानवीय तरीकों का इस्तेमाल काफी लोकप्रिय हो रहा है, जिसमें उन्हें मारने की बजाय पशु मनोविज्ञान के इस्तेमाल पर अधिक जोर दिया जाता है। उदाहरण के लिए, शहरी लाल लोमड़ियों के उत्पात से निजात पाने के लिए आमतौर पर गैर-हानिकारक रासायनिक सामग्रियों के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यवहार तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जाता है। ब्रिटेन के ग्रामीण क्षेत्रों में कीट नियंत्रण के लिए बंदूकों का उपयोग काफी आम है। चूहों, खरगोशों तथा भूरी गिलहरी जैसे छोटे कीटों के नियंत्रण के लिए एयरगन विशेष रूप से लोकप्रिय हैं, क्योंकि अपनी कम शक्ति के कारण उन्हें बगीचों जैसे छोटे स्थानों में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है जहां अन्य बंदूकों का इस्तेमाल अन्यथा असुरक्षित होता है।
रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल लगभग 4500 सालों से किया जा रहा है, जब सुमेर निवासी सल्फर यौगिकों का इस्तेमाल कीटनाशकों के रूप में करते थे। ऋग्वेद, जो कि लगभग 4,000 साल पुरानी है, उसमें भी कीट नियंत्रण के लिए जहरीले पौधों के इस्तेमाल का उल्लेख मिलता है। रासायनिक कीट नियंत्रण का व्यापक रूप से इस्तेमाल, 18 वीं तथा 19 वीं शताब्दी में कृषि के औद्योगिकीकरण तथा मशीनीकरण और पाईरेथ्रम एवं डेरिस जैसे कीटनाशकों के आने के बाद ही संभव हुआ था। 20 वीं सदी में डीडीटी (DDT) जैसे कई कृत्रिम कीटनाशकों तथा पौध-नाशकों की खोज से इसके विकास में और अधिक तेजी आई. रासायनिक कीट नियंत्रण आज भी कीट नियंत्रण का एक प्रमुख साधन है, हालांकि इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभावों के चलते 20 वीं सदी के अंत में पारंपरिक और जैविक कीट नियंत्रण पर लोगों ने पुनः ध्यान देना शुरु कर दिया है।
जीवित वस्तुएं निरंतर विकसित और परिवर्तित होती रहती हैं और जैविक, रासायनिक, भौतिक या नियंत्रण के अन्य सभी रूपों के प्रति उनका प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती जाती है। जब तक लक्षित आबादी को पूर्णतया समाप्त या प्रजनन हेतु अक्षम न कर दिया जाए, बची हुई आबादी अनिवार्य रूप से सभी प्रकार के कीटनाशकों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेती है – जिससे एक सदैव जारी रहने वाली हथियारों की होड़ का जन्म होता है।

कीट नियंत्रण के प्रकार

जैविक कीट नियंत्रण
जैविक कीट नियंत्रण, प्राकृतिक परजीवियों तथा परभक्षियों के नियंत्रण एवं प्रबंधन द्वारा प्राप्त किया जाता है। उदाहरण के लिए: मच्छरों पर नियंत्रण करने लिए अक्सर स्थानीय जल स्रोतों में बीटी बैसिलस थुरिनगियेंसिस एसएसपी. इसरेलेंसिस (Bt Bacillus thuringiensis ssp. israelensis) नामक एक बैक्टीरिया डाल दिया जाता है जो मच्छरों के लार्वा को संक्रमित करके नष्ट कर देता है। इस उपचार का कोई भी ज्ञात दुष्प्रभाव नहीं है और यह जल मानवों के लिए पूर्णतया सुरक्षित माना जाता है। जैविक कीट नियंत्रण, या अन्य किसी भी प्राकृतिक कीट नियंत्रण का उद्देश्य, पर्यावरण के मौजूदा स्वरूप के पारिस्थितिक संतुलन को कम से कम हानि पहुंचाते हुए कीटों को समाप्त करना होता है।
प्रजनन क्षेत्रों का उन्मूलन
उचित अपशिष्ट प्रबंधन और रुके हुए पानी की उचित निकासी, कई कीटों के प्रजनन क्षेत्रों के उन्मूलन में सहायक होता है।
कचरा कई अवांछित जीवों के लिए आश्रय और भोजन के साथ-साथ एक ऐसा स्थान भी उपलब्ध करता है जहां पानी भी पानी जमा होकर मच्छरों के प्रजनन स्थान का काम कर सकता है। उचित कचरा संग्रहण और निपटान वाले समुदायों में चूहे, तिलचट्टे, मच्छरों, मक्खियों और अन्य कीटों की समस्याएं अन्य समुदायों के मुकाबले काफी कम होती हैं।
खुले नाले विभिन्न कीटों के प्रजनन के लिए पर्याप्त स्थान के रूप में कार्य करते हैं। उचित सीवर प्रणाली के माध्यम से इस समस्या का निदान किया जा सकता है।
जहरीला चारा
जहरीला चारा चूहों की आबादी को नियंत्रित करने का एक आम तरीका है, परन्तु कचरे जैसे अन्य खाद्य स्रोतों की उपस्थिति की स्थिति में यह उतना प्रभावी नहीं रह जाता है। जहरीले मांस को भेड़ियों, फसलों को हानि पहुंचाने वाले पक्षियों और अन्य प्राणियों के खिलाफ सदियों से इस्तेमाल किया जाता रहा है।
खेतों को जलाना
परंपरागत रूप से, गन्ने की कटाई के बाद खेतों को पूरी तरह जला दिया जाता है ताकि कीटों या उनके अण्डों को को नष्ट किया जा सके.
शिकार
ऐतिहासिक रूप से, कुछ यूरोपीय देशों में जब आवारा कुत्तों और बिल्लियों की संख्या काफी बढ़ जाती है तब स्थानीय लोग मिलकर सभी आवारा जानवरों को पकड़ कर मार देते हैं। कुछ देशों में, चूहे पकड़ने वालों की टीमें खेतों से चूहों को भगाती हैं और कुत्तों तथा साधारण हस्त उपकरणों की सहायता से उन्हें मार देती हैं। कुछ समुदायों द्वारा पूर्व में एक इनाम प्रणाली का भी इस्तेमाल किया जाता था, जहां शहर क्लर्क चूहे को मारने के सबूत के रूप में लाए जाने वाले प्रत्येक चूहे के सिर के बदले एक निश्चित राशि का भुगतान करता था।
जाल
घरों में पाए जाने वाले चूहों को मारने, भेड़ियों को मारने और रैकून नामक जानवर तथा आवारा कुत्तों एवं बिल्लियों को पकड़ने के लिए जालों का प्रयोग किया जाता रहा है।
जहरीला स्प्रे
विमानों, हाथ के उपकरणों, या छिड़काव उपकरण धारण करने वाले ट्रकों द्वारा जहर का छिड़काव कीट नियंत्रण का एक आम तरीका है। पूरे अमेरिका में, अक्सर शहर के अधीन ट्रकों को सप्ताह में एकाध बार शहर के प्रत्येक मोहल्ले में घुमाया जाता है और मच्छर रोधी दवाओं का छिड़काव किया जाता है। क्रॉप डस्टर सामान्यतः खेतों के ऊपर उड़ान भरते हैं और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों का सफाया करने के लिए जहरीले रसायनों का छिड़काव करते हैं। कईयों के लिए उनके यार्ड, घरों, या व्यवसाय के आसपास जहर का छिड़काव, वहां पर कीटों की आबादी को पनपने देने से कहीं अधिक अधिक वांछनीय होता है।
आकाशीय धूमन
एक परियोजना जिसके तहत किसी संरचना को ढंकने या वायुरुद्ध सीलबंद करने के बाद वहां घातक सांद्रता वाली जहरीली गैस को लंबी अवधि (24 से 72 घंटे) के लिए छोड़ा जाता है। हालांकि यह महंगी है, परन्तु आकाशीय धूमन प्रक्रिया कीट जीवन-चक्र के सभी चरणों को लक्षित करती है।
आकाशीय उपचार
एक दीर्घकालिक परियोजना जिसमें छिड़काव के एप्लिकेटर शामिल होते हैं। किसी संरचना के भीतरी वातावरण में तरल कीटनाशक को छोड़ा जाता है। इस उपचार के लिए पूर्ण निकासी या इमारत की वायुरुद्ध सीलबंदी की आवश्यकता नहीं होती है जिससे इमारत के भीतर का अधिकांश कार्य जारी रह सकता है लेकिन यह प्रक्रिया उतना प्रभावी नहीं होती है। सामान्यतः संपर्क कीटनाशकों का प्रयोग किया जाता है जिससे दीर्घकालिक अवशिष्ट प्रभाव भी न्यूनतम ही रहता है। 10 अगस्त 1973 को फेडरल रजिस्टर ने आकाशीय उपचार के लिए अमेरिका पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (ईपीए) द्वारा परिभाषित परिभाषा को प्रकाशित किया:

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