फास्फोरस के यौगिक और उपयोग, जानिए आप भी

फ़ॉस्फ़ोरस, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, क्लोरीन, गंधक तथा धातुओं के साथ मिलकर क्रमश: ऑक्साइड, हाइड्राक्साइड, क्लोराइड, सल्फाइड तथा फ़ॉस्फ़ाइड यौगिक बनाता है। ऑक्साइडों को पानी में घुलाने से फ़ॉस्फ़ोरस के अम्लों की प्राप्ति होती है। ऑक्साइडों में फ़ॉस्फ़रस पेंटॉक्साइड, हाइड्राइड में फ़ॉस्फ़ीन (PH3), हेलाइडों में फ़ॉस्फ़ोरस पेंटाक्लोराइड (PCI5) सल्फाइड़ों में फ़ॉस्फ़ोरस पेंटासल्फाइड (P2 S5 or P4 S10) अधिक महत्व के हैं।
फ़ॉस्फ़ाइड
फ़ॉस्फ़ोरस अनेक धातुओं के संयोग से फ़ॉस्फ़ाइड बनाता है, किंतु गंधक की अपेक्षा धातुओं के लिए इसकी बंधुता कम है। फ़ॉस्फ़ाइडो में टिन और ताँबे के फ़ॉस्फ़ाइड केवल इन धातुओं और फ़ॉस्फ़ोरस के संयोग से ही बनते हैं। ये फ़ॉस्फ़ाइड पानी या अम्ल के साथ क्रिया करके फ़ॉस्फ़ीन या फॉस्फोनियम लवण बनाते हैं।
फ़ॉस्फ़ोरस के क्षार
रासायनिक दृष्टि से फ़ॉस्फ़ीन, अमोनिया के सदृश्य है और अमोनियम हाइड्रॉक्साइड की ही भाँति फ़ॉस्फ़ोनियम हाइड्रॉक्साइड नाम क्षार बनता है।p
फ़ॉस्फ़ोरस के अम्ल
फ़ॉस्फ़ोरस के आठ अम्ल ज्ञात हैं, जिनमें से पाँच तो फ़ॉस्फ़ोरस ऑक्साइड तथा फ़ॉस्फ़ोरस पेंटॉक्साइड और जल के संयोग से बनते हैं। इनके नाम हैं : मेटाफ़ॉस्फ़ोरस, फ़ॉस्फ़ोरस, मेटाफ़ॉस्फ़ोरिक, पाइरोफॉस्फोरिक, तथा आर्थोफ़ॉस्फ़ोरिक अम्ल। इनके अतिरिक्त हाइपोफ़ॉस्फ़ोरस, पाइरोफ़ॉस्फ़ोरस तथा हाइपोफ़ॉस्फ़ोरस अम्ल हैं, जो फ़ॉस्फ़ोरस के ऑक्साइडों तथा जल की अभिक्रिया से नहीं प्राप्त होते। इन आठों अम्लों में आर्थोफ़ॉस्फ़ोरिक अम्ल ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, जिसका आण्विक सूत्र, (H3 P O4) इसके दो अणुओं में से एक अणु जल की हानि होने पर पाइरोफ़ॉस्फ़ोरिक अम्ल (H4 P2 O7,) तथा एक ही अणु में से एक अणु जल हानि से मेटाफ़ॉस्फ़ोरिक अम्ल (H P O3) बनते हैं। फ़ॉस्फ़ोरिक अम्ल त्रिक्षारकी होता है जिसके कारण तीन प्रकार के लवण, प्राथमिक, द्वितीयक तथा त्रितीयक, बनते हैं, जिन्हें फ़ॉस्फेट कहते हैं। इस अम्ल का सबसे अधिक उपयोग कृत्रिम खाद या उर्वरकों के निर्माण में होता है।
इसके अतिरिक्त फ़ॉस्फ़ोरस अनेक यौगिक बनाता है, जैसे हाइपोफ़ॉस्फ़ेट फ़ॉस्फ़ेट तथा फ़ॉस्फ़ोप्रोटीन आदि।

उपयोग

लाल ‎फ़ॉस्फ़ोरस का उपयोग दियासलाई तथा आतिशबाज़ी के सामान बनाने में किया जाता है। इसके विषैले होने के कारण यह चूहे मारने की दवाईयों में भी प्रयुक्त होता है। इसके अलावा फॉस्फर ब्राँज, जो कि एक उपयोगी मिश्रधातु है, बनाने में तथा कई औषधियों के निर्माण में भी इसका उपयोग किया जाता है।
फ़ॉस्फ़ोरस एक आवश्यक तत्व है, जो फ़ॉस्फ़ेट के रूप में मनुष्यों और पशुओं के अस्थिनिर्माण में सहायक होता है। स्वास्थ्यरक्षा के लिए आवश्यक है कि शरीर में फ़ॉस्फ़ोरस का संतुलन स्थिर रहे। यही नहीं, शरीर में होनेवाली अनेक प्रतिक्रियाओं में भी फ़ॉस्फ़ोरस का महत्वपूर्ण हाथ रहता है। फ़ॉस्फ़ेट के रूप में फ़ॉस्फ़ोरस का सर्वाधिक प्रयोग भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए उर्वरकों के रूप में होता है। अब तो इसके समस्थानिक (P32) के ज्ञात हो जाने के कारण उसका उपयोग भूमि से पौधों द्वारा फ़ॉस्फ़ेट उर्वरकों के अवशोषण अध्ययन में होने लगा है।
श्वेत अथवा पीत फ़ॉस्फ़ोरस का उपयोग फ़ॉस्फ़ोरस कांस्य, फ़ॉस्फ़ोरस टिन, फ़ॉस्फ़ोरस ताँबा, जैसी मिश्रधातुओं के निर्माण तथा चूहों एवं अन्य हानिकारक कीटाणुओं की रोकथाम के लिए विषैले पदार्थों के बनाने में होता है। युद्ध के समय विस्फोटकों एवं धूम्र आवरणों के उत्पादन के लिए भी फ़ॉस्फ़ोरस का उपयोग होता है। पीत फ़ॉस्फ़ोरस अत्यंत विषैला होता है और 0 .1 ग्राम से भी मनुष्य की मृत्यु हो जाती है। इसका धूम्र बड़ा घातक होता है। इससे नाक और जबड़े की अस्थियाँ सड़ जाती हैं। पहले पीत फ़ॉस्फ़ोरस का सर्वाधिक उपयोग दियासलाई के निर्माण में होता था और यही कारण है कि दियासलाई के कारखानों में काम करनेवाले कर्मचारी प्राय: उपर्युक्त रोग के शिकार हो जाते थे। जब से पीत फ़ॉस्फ़ोरस के स्थान पर लाल फ़ॉस्फ़ोरस का उपयोग दियासलाई के निर्माण में होने लगा, इस रोग का अंत हो गया है।
फ़ॉस्फ़ोरस के जिन यौगिकों का महत्वपूर्ण औद्योगिक उपयोग होता है, उनमें फ़ास्फ़ोरिक अम्ल तथा उसके व्युत्पन्नों को छोड़कर सल्फाइड तथा क्लोराइड विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। दियासलाई बनाने के लिए फ़ॉस्फ़ोरस सेल्क्वि सल्फाइड (P4 S3) का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है और फ़ॉस्फ़ोरस पेंटासल्फाइड (P4 S10) का उपयोग कार्बनिक फ़ॉस्फ़ोरस-गंधक यौगिकों के निर्माण में होता है। ये यौगिक स्नेहक तैलों के गुणों में विशिष्टता लाने के लिए प्रयुक्त होते हैं। फ़ॉस्फ़ोरस पेंटाक्लोराइड के उपयोग से ऐल्कोहॉल और कार्बनिक अम्लों को उनके संगत क्लोराइडों में परावर्तित किया जाता है। ऑक्सीक्लोराइड का उपयोग रंगों और दवाओं के लिए होता है। युद्ध तथा औद्योगिक उपयोग के अतिरिक्त लाल फ़ॉस्फ़ोरस का सर्वाधिक उपयोग दियासलाइयों के ऊपर की घर्षण सतह के निर्माण में होता है।

Leave a Comment