ऑक्सीजन का बंधन करने वाले अन्य प्रोटीन और नोनेर्य्थ्रोइद कोशिकाओं में उपस्थिति

मयोग्लोबिन – मानव समेत अनेक पृष्ठवंशियों के मांसपेशी ऊतकों में पाया जाता है.यह मांस पेशी ऊतक को एक स्पष्ट लाल या गहरा धूसर रंग देता है. यह रचना और श्रृंखला में हीमोग्लोबिन के जैसा ही होता है, लेकिन यह टैट्रामर न होकर मोनोमर होता है, जिसमें सहकारी बंधक गुण की कमी होता है. इस का प्रयोग आक्सीजन के परिवहन की जगह उसके भंडार के लिये किया जाता है.
हीमोसयानिन – प्रकृति में पाया जाने वाला दूसरा सबसे आम आक्सीजन का वहन करने वाला प्रोटीन, यह कई आर्थोपाडों और मोलस्कों के रक्त में होता है. लौह हीम समूहों की जगह इसमें तांबे के प्रास्थेटिक समूहों का प्रयोग होता है और आक्सीदनित होने पर यह नीले रंग का दिखता है.
हीमएरिथ्रिन – कुछ समुद्री अपृष्ठवंशी और एनेलिड जातियां उनके रक्त में आक्सीजन के परिवहन के लिये इस लौह युक्त गैर-हीम प्रोटीन का प्रयोग करती हैं. आक्सीजनित होने पर गुलाबी/बैंगनी दिखता है, और आक्सीजनित न होने पर रंगहीन दिखाई देता है.
क्लोरोक्रूओरिन – कई एनेलिडों में पाया जाने वाला, यह एरिथ्रोक्रुओरिन के बहुत समान होता है, लेकिन इस का हीम समूह रचना में बहुत भिन्न होता है. विआक्सीजनित होने पर हरा और आक्सीजनित होने पर लाल दिखता है.
वैनैबिन –इन्हें वैनेडियम क्रोमाजन भी कहते हैं, और ये समुद्री स्किर्टों के रक्त में पाए जाते हैं और यह समझा जाता है कि ये विरल धातु वैनेडियम को अपने आक्सीजन बंधक प्रास्थेटिक समूह के रूप में उपयोग में लाते हैं.
एरिथ्रोक्रुओरिन – केंचुओं सहित कई एनेलिडों में पाया जाने वाला, यह एक विराट मुक्त बहने वाला रक्त प्रोटीन है जिसमें, एक अकेले प्रोटीन काम्प्लेक्स में आपस में बंधी दर्जनों या संभवतः सैकड़ों लौह और हीमयुक्त प्रोटीन उपइकाईयां होती हैं, जिनका अणु भार 3.5 मिलियन डाल्टनों से भी अधिक होता है.
पिन्नाग्लोबिन – केवल मोलस्क पिन्ना स्क्वेमोसा में पाया जाता है. भूरा मैंगेनीज पर आधारित पॉरफआइरिन प्रोटीन.
लेगहीमोग्लोबिन – फली वाले पौधों, जैसे अल्फाल्फा या सोयाबीनों में, जड़ों के नाइट्रोजन को स्थिर करने वाले बैक्टीरिया की आक्सीजन से रक्षा इस लौह हीम युक्त आक्सीजन-बंधक प्रोटीन द्वारा की जाती है.प्रारक्षित विशिष्ट एंजाइम नाइट्रोजेनेज़ होता है, जो मुक्त आक्सीजन की उपस्थिति में नाइट्रोजन गैस का अपघटन करनें में असमर्थ होता है.
कोबोग्लोबिन – एक संश्लेषित कोबाल्ट पर आधारित पॉरफाइरिन.आक्सीजनित होने पर कोबोप्रोटीन रंगहीन दिखता है, पर शिराओं में यह पीला नजर आता है.

नोनेर्य्थ्रोइद कोशिकाओं में उपस्थिति
कुछ नॉन एरिथ्रायड कोशिकाएं (यानी लाल रक्त कोशिका के अतिरिक्त प्रकार की कोशिकाएं) हीमोग्लोबिन युक्त होती हैं.मस्तिष्क में, सबस्टैंशिया निग्रा के ए9 डोपमिनर्जिक न्यूरान, सेरेब्रल कार्टेक्स और हिप्पोकैम्पस के ऐस्ट्रोसाइट, और सभी परिपक्व आलिगोडेंड्रोसाइट इनमें शामिल हैं.. ऐसा समझा जाता है कि, इन कोशिकाओं में मस्तिष्क हीमोग्लोबिन आक्सीजनहीन स्थितियों में होमियोस्टैटिक प्रक्रिया के लिये आक्सीजन के भंडारण को संभव करता है, जो ए9 डीए न्यूरानों के लिये खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्यौंकि उनमें ऊर्जा के उत्पादन के लिये अधिक चयापचय के साथ अधिक आक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है. इसके अलावा, ए9 डोपमिनर्जिक न्यूरानों को विशेष जोखम होता है, क्योंकि वे स्वआक्सीकरण और मोनोअमाइन आक्सिडेज द्वारा किये गए डोपमिन को विअमाअनीकरण से उत्पन्न हाइड्रोजन पराक्साइड के कारण अत्यंत गहन आक्सीकरण दबाव में होते हैं, और जिनमें फेरस लौह की प्रतिक्रिया के कारण अत्यंत विषाक्त हाइड्राक्सिल मूलों का उत्पादन होता है. इससे पार्किन्सन रोग में इन कोशिकाओं के अपक्षय को खतरे को समझाया जा सकता है. इन कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन के लौह की उपस्थिति के कारण मृत्यु के बाद ये कोशिकाएं गहरी पड़ जाती हैं, जिससे इन कोशिकाओं का लैटिन नाम सबस्टैंशिया निग्रा पड़ा है.
मस्तिष्क के बाहर, हीमोग्लोबिन का एंटीआक्सीटैंट और मैक्रोफैजों, अल्वियोलार कोशिकाओं, और गुर्दे की मेसेंजियल कोशिकाओं में लौह चयापचय का नियंत्रण जैसे गैर-आक्सीजन-परिवहन कार्य करना होता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Don`t copy text!