गेहूं के ब्लास्ट रोग की रोकथाम, जानिए आप भी

ब्राजील से शुरू होकर गेहूं का ब्लास्ट रोग लगभग पूरे विश्व में फैल चुका है। इसमें गेहूं की बालियां दाने पड़ने से पहले ही सूख जाती हैं और उपज में 40-100 प्रतिशत तक कमी आ जाती है। यह रोग बीज, फसल अवशेष तथा हवा द्वारा फैलता है। भारत में इसकी रोकथाम के उपाय खोजे जा रहे हैं। गेंहू में ब्लास्ट व्याधि एक कवक, मेग्नापोर्थे ‘ओरायेजी पैथोटाइप ट्रिटीकम से पैदा होती है। यह व्याधि सर्वप्रथम 1985 में ब्राजील में पायी गयी थी। बाद में यह बोलीविया, अर्जेंटीना, पैराग्वे, उरुग्वे तथा यूएसए में मिली। वर्ष 2016 में यह हमारे पड़ोसी देश, बांग्लादेश में पाई गई थी। यह व्याधि भारत के उत्तर-पूर्वी मैदानी जलवायु क्षेत्र में फैलकर । गेहूं की फसल को हानि पहुंचा सकती है। इसमें गेहूं की बालियां दाने पड़ने से पहले ही सूख जाती हैं तथा उपज में 40-100 प्रतिशत तक गिरावट आ जाती है। यह रोग बीज, फसल अवशेष तथा हवा द्वारा फैलता है इसलिए इसकी रोकथाम के लिए भारत में काफी विचार-विमर्श चल रहा है। वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में गेहूं की फसल का ब्लास्ट रोग के लिए सघन निरीक्षण विशेषज्ञों की टीमों के द्वारा पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा के नजदीक किया गया। कहीं से भी ब्लास्ट रोग मिलने के संकेत नहीं मिले। हालांकि वर्ष 2016-17 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद एवं नादिया जिलों में गेहूं ब्लास्ट जैसी व्याधि के लक्षण दिखाई दिए।

गेहूं ब्लास्ट को रोकने के लिए रणनीतियां बांग्लादेश से गेहूं के बीज तथा दानों के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध। बीज को अनुमोदित कवकनाशियों जैसे थीरम, कार्बोक्सिन, कार्बेन्डाजिम, टेबुकोनाजोल से उपचारित करें। प्रतिरोधी किस्मों जैसे एचडी-2967, एचडी-3171, डीबीडब्ल्यू-39,एचडी-2043, जो कि बोलीविया में गेहूं ब्लास्ट की पहचान रोगरोधी पाए गए हैं, का चयन करें। फसल के स्वास्थ्य का सघन निरीक्षण करें तथा ब्लास्ट के लक्षण दिखने पर कवकनाशी (तिरिफ्लोइसत्रोबिन 50 प्रतिशत+टेबुकोनाजोल 25 प्रतिशत डब्ल्यू जी)/120 ग्राम/एकड़ की दर से बाली आने के समय प्रयोग करें। वर्ष 2017-18 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद एवं नादिया जिलों में गेहूं की दो साल के लिए बुआई पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गयी है। इसी तरह बांग्लादेश बार्डर के साथ 5 कि.मी. की दूरी तक पश्चिम बंगाल तथा असोम में गेहूं की फसल नहीं उगाई जाएगी। किसानों, सीमा सुरक्षा बल तथा बीज विक्रेताओं को ब्लास्ट रोग के बारे में बता दिया गया है। 140 नवीन गेहूं किस्मों को ब्लास्ट के लिए जांचने हेतु बोलीविया, बांग्लादेश तथा यूएसए भेजा गया है। इनमें 2 एनएस ट्रांस्लोकेशन वाली किस्में अपेक्षाकृत ज्यादा रोगरोधी पायी गयीं। वैज्ञानिकों को गेहूं ब्लास्ट ट्रेनिंग के लिए बोलीविया, बांग्लादेश, यूएसए एवं मैक्सिको भेजा गया। गेंहू ब्लास्ट की पहचान गेहूं ब्लास्ट रोग दानों, पत्तियों तथा बालियों को संक्रमित कर दाने हल्के, बदरंग, तथा पतले कर देता है। पत्तियों पर शुरू में पानी में भीगे हुए जैसे गहरे हरे रंग के धब्बे बनते हैं। ये बाद में भूरे रंग के नाव के आकार के हो जाते हैं। संक्रमित पत्तियां जल्दी सूख जाती हैं। बालियों पर रोग भयंकर रूप में आता है। संक्रमित बालियां समय से पहले ही सूख जाती हैं तथा इनमें दाने नहीं पड़ते।

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