मानचित्रकला में प्रक्रिया एवं उपकरण

मानचित्र तथा विभिन्न संबंधित उपकरणों की रचना, इनके सिद्धांतों और विधियों का ज्ञान एवं अध्ययन मानचित्रकला (Cartography) कहलाता है। मानचित्र के अतिरिक्त तथ्य प्रदर्शन के लिये विविध प्रकार के अन्य उपकरण, जैसे उच्चावचन मॉडल, गोलक, मानारेख (cartograms) आदि भी बनाए जाते हैं।

 

प्रक्रिया एवं उपकरण

कार्यक्षेत्र में किए गए सर्वेक्षण के पटलचित्र, या पटलचित्रों, या हवाई सर्वेक्षणों का ब्लू प्रिंट मोटे कागज पर से बनाया जाता है। यह मानचित्र की सबसे पहली प्रति होती है। इसके बाद लिथो मुद्रण द्वारा वांछित संख्या में प्रतियाँ तैयार कर ली जाती हैं। ब्लू प्रिंट पर सबसे पहली प्रति हाथ से तैयार करने का प्रमुख कारण यह है कि पटलचित्र, या हवाई सर्वेक्षण खंड (air survey section), पर हाथ से किए गए रेखण की त्रुटियाँ निकल जाएँ और मानचित्र सुंदर और सुघड़ कलाकृति बन जाए। इसके लिए जो उपकरण प्रयुक्त होते हैं, वे निम्नलिखित हैं :
रेखण लेखनी (Drawing pen) – यह किसी के सहारे या स्वतंत्र सीधी रेखाएँ खींचने का उपकरण है।
फिरकी कलम (Swivel Pen) – यह हाथ से वक्र रेखाएँ खींचने का उपकरण है। प्रधानत: समोच्च रेखाएँ खींचने में इसका प्रयोग होता है।
मार्ग लेखनी (Road Pen) – यह दो सीधी समांतर रेखाएँ साथ साथ खींचने की लेखनी है। यह प्रधानत: सड़कों के रेखण में प्रयुक्त होती है।
वृत्त लेखनी (Circle Pen) – यह वृत्त या चाप खींचने की लेखनी है।
समांतर रेखनी (Parallel Ruler) – यह सीधी और समांतर रेखाएँ खींचने की लेखनी है।
फ्रांसीसी वक्र (French Curves) – यह वक्र रेखाएँ खींचने का सहायक उपकरण है।
पड़ी परकार (Beam Compass)
परकार (Divider) – ये दोनों दूरी नपाने के उपकरण हैं।
अनुपाती परकार (Proportional Compass) – यह आनुपातिक दूरी लगाने में प्रयोग में आता है।
लोहे की निब (Crowquill Nib) – यह हाथ से सूक्ष्म रेखाएँ खींचने के काम में प्रयुक्त होती है।
शुद्ध रेखाएँ मानचित्र के वांछित पैमाने से ड्योढ़े पैमाने पर किया जाता है, जिसे फोटोग्राफी द्वारा घटा कर वांछित पैमाने का मानचित्र प्राप्त कर लिया जाता है। इससे यह लाभ होता है कि उपर्युक्त सहायक उपकरणों द्वारा भी यदि रेखण में कुछ त्रुटियाँ आ गई हों तो वे लघुकरण में इतनी छोटी रह जाएँ कि आंखों को न खटकें। रेखण करते समय नक्शानवीस अभिवर्धक लेंस का भी उपयोग करता है, जिससे वह बुराइयों को बड़ा देखकर साथ साथ दूर करता जाता है।
संपूर्ण रेखण तो काले रंग में होता है, किंतु प्रकाशन के समय पहचानने की सुविधा के लिए भिन्न-भिन्न विवरण भिन्न-भिन्न रंगों में छापे जाते हैं। रंगीन मुद्रण का साधारण नियम निम्नलिखित है :
सांस्कृतिक निर्माण (मानव निर्मित वस्तुएँ) काले या लाल रंग में, जलाकृतियाँ नीले रंग में, उभर आकृतियाँ भूरे रंग में, तथा वनस्पतियाँ हरे रंग में दिखाई जाएँ।

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