अमेरिका के संविधान निर्माण की प्रक्रिया और विशेषताएँ

संविधान निर्माण की प्रक्रिया
संविधान निर्माण को लेकर चले विवादों के उपरांत 1776 ई. में महाद्वीपीय कांग्रेस के प्रत्येक उपनिवेश से एक-एक सदस्य लेकर एक समिति का गठन हुआ। उसका प्रमुख कार्य एक ऐसे परिसंघ के संविधान पर विचार करना था जिसके अंतर्गत एकजुट होकर सभी उपनिवेश स्वाधीनता संग्राम या स्वतंत्रता संग्राम का अभियान जारी रख सके। 1781 ई. में सभी उपनिवेशों ने संविधान को स्वीकार कर लिया। इसे ही अमेरिका का प्रथम संविधान अथवा युद्धकालीन अल्पकालिक संविधान कहा जाता है।
युद्धकालीन संविधान की विशेषताएं
पहली बार उपनिवेशों के संघ के लिए “संयुक्त राज्य अमेरिका” अर्थात The United States of America नाम दिया गया।
सरकार का स्वरूप संघीय था अर्थात् केन्द्रीय सरकार की स्थापना की गई जिसके अधिकार निश्चित और सीमित थे। संघीय कार्यों के संचालन हेतु एक सदनीय “कांगे्रस” की स्थापना की गई।
इस कांग्रेस में प्रत्येक राज्य प्रतिवर्ष 2-7 प्रतिनिधियों को भेजेगा किन्तु प्रत्येक राज्य का मत मूल्य एक ही होगा।
किसी प्रस्ताव की स्वीकृति के लिए 13 राज्यों में से 9 का बहुमत आवश्यक होगा।
कांग्रेस को अन्य राष्ट्रों के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने, मुद्रा जारी करने, ऋण लेने, युद्ध घोषणा तथा संधि करने, मुद्रा एवं ऋण संंबंधी नीतियों के निर्माण का अधिकार दिया गया।
राज्यों को केन्द्र की तुलना में अधिक शक्तिशाली बनाया गया और कहा गया कि जो शक्तियां स्पष्ट शब्दों में कांगे्रस को प्रत्योजित न की गई हो राज्यों के अधिकार क्षेत्र में निहित रहेंगी। राज्यों को कर लगाने तथा बाह्य सरकार के मामले में अत्यधिक अधिकार मिले थे।
सीमाएं
कमजोर केन्द्र की स्थापना एवं शक्तिशाली राज्यों के स्वरूप से राज्य अपने को अलग स्वतंत्र इकाई के रूप में समझने लगे।
कांगे्रस राज्यों के पारस्परिक व्यापार-वाणिज्य नियमित नहीं कर सकती थी।
राज्यों की इच्छा पर निर्भर था कि वे कांगे्रस के निर्णय को अपने क्षेत्र में लागू करें या न करें।
इस प्रकार युद्ध के दौरान तो यह संविधान चलता रहा परन्तु युद्ध समाप्ति के बाद राज्यों के मतभेद उभरकर सामने आने लगे। संविधान की उपेक्षा होने लगी और संघीय व्यवस्था के सफल संचालन में बाधा आने लगी। अतः युद्धकालीन निर्मित संविधान में संशोधन की बात की जाने लगी। जेम्स मेडीसन, बेंजामिन फ्रैकलिन, जॉर्ज वाशिगंटन जैसे बुद्धिजीवियों और राजनीतिक नेताओं ने एक मजबूत संघीय व्यवस्था के तहत् एक शक्तिशाली सरकार की वकालत की। इसी संदर्भ में 1787 ई. में फिलाडेल्फिया में 12 राज्यों के 55 प्रतिनिधियों का सम्मेलन संपन्न हुआ (रोड आइलैण्ड नहीं शामिल हुआ)। इस सम्मेलन की अध्यक्षता जॉर्ज वाशिगंटन ने की। इस सम्मेलन में वर्जीनिया योजना, के माध्यम से संविधान की धाराओं में संशोधन कर नया संविधान की धाराओं में संशोधन कर नया संविधान बना जो आज तक लागू है।वर्जीनिया योजना में संघीय शासन को और अधिक शक्तिशाली बनाने का प्रावधान था तथा केन्द्र में द्विसदनात्मक व्यवस्था की बात की गई थी।

संविधान की विशेषताएँ
संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान की उद्देशिका में कहा गया कि यह संविधान ““संयुक्त राज्य की जनता”” ने तैयार किया है।
“कांगे्रस नामक एक राष्ट्रीय विधायिका का गठन, जिसमें दो सदन होंगे, निचला सदन- House of Representative तथा उच्च सदन senate कहलाएगा।
समानता का सिद्धान्त सीनेंट में बनाए रखा जाएगा और तदनुसार प्रत्येक राज्य से उसमें दो-दो सदस्य (सीनेटर) लिए जाऐंगे। प्रत्येक सीनेटर की सदस्यता अवधि 6 साल की होगी। सीनेट को सभी प्रकार के महाभियोगों पर विचार करने का अधिकार मिला।
House of Representative में राज्यों का प्रतिनिधित्व उसकी जनसंख्या के आधार पर तय हुआ। इस सदन के सदस्यों का चुनाव दो वर्ष की अवधि के लिए होगा।
संविधान के तहत् दो सरकारों की स्थापना की गई-एक संघीय सरकार तथा दूसरी राज्य सरकार। संघ तथा राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया।
संघ को करों, ऋणों का भुगतान विदेशों के साथ तथा राज्यों के बीच परस्पर व्यापार वाणिज्य का विनियमन, सिक्कों की ढलाई, युद्ध की घोषणा आदि का अधिकार दिया गया।
संविधान संशोधन प्रत्येक सदन के दो तिहाई मतों के आधार पर कांगे्रस संविधान में संशोधन का प्रस्ताव प्रस्तुत कर सकेगी या राज्यों की कुल संख्या में से दो तिहाई राज्यों की विधायिकाओं से आवेदन प्राप्त होने पर संशोधन प्रस्तावित करने के लिए सम्मेलन बुलाएंगी।
कार्यपालिका का प्रमुख राष्ट्रपति होगा और राष्ट्रपति का चुनाव न तो कांगे्रस करेगी न ही वह सीधे जनता से चुनकर आएगा। उसके निर्वाचन के लिए एक अलग निर्वाचक-मंडल बनाया जाएगा जिसमें सम्मिलित निर्वाचकों का चुनाव राज्यों की विधायिकाओं द्वारा निर्धारित पद्धति के अनुसार होगा।
प्रत्येक राज्य के निर्वाचकों की संख्या उस राज्य के सीनेटरों (उच्च सदन के सदस्यों) तथा निचले सदन के प्रतिनिधियों की संख्या के कुछ योग के बराबर होगी।
राष्ट्रपति पर आसीन व्यक्ति की मृत्यु हो जाने या उसे पद से हटा दिए जाने की स्थिति में उसकी सारी शक्तियां उपराष्ट्रपति को स्थानान्तरित हो जाऐंगी।
एक सर्वोच्च न्यायालय होगा, जिसके न्यायाधीशों का चुनाव सीनेट की सहमति से राष्ट्रपति करेंगा।
1791 ई. में पहला संविधान संशोधन करके बिल ऑफ राइट्स (‘Bill of Rights) को मौलिक अधिकार के रूप में शामिल किया गया। इसके तहत् संयुक्त राज्य अमेरिका के नागरिकों को वाणी की, पे्रस की, धर्म की, याचिका की, सभा-सम्मेलन करने की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई। इस प्रकार 1789 ई. में संविधान को अनुमोदित कर दिया गया और जॉर्ज वाशिंगटन को सर्वसम्मति से राष्ट्रपति से तथा जॉर्ज एडम्स को बहुमत से उपराष्ट्रपति चुना गया।
सीमाएं
स्त्रियों को मताधिकार नहीं दिया गया।
स्वतंत्रता की घोषणा दासों पर लागू नहीं होती थी अर्थात् दास प्रथा को बनाए रखा गया। आगे चलकर इस दास-प्रथा के मुद्दे ने अमेरिका को गृहयुद्ध की ओर धकेल दिया।
संविधान निर्माण में धनी वर्ग का प्रभाव।
राष्ट्रपति के निर्वाचन की जटिल प्रक्रिया।

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