वर्षा जल संरक्षण अभियान

परिचय
जिस राजस्थान के गांव भांवता कोल्याला की पहचान अकाल ग्रस्ट्टा इलाके व पानी की कमी वाले क्षेत्र के रूप में होती थी आज वह हरे-भरे क्षेत्र में तबदील हो गया है। इसका श्रेय स्वयंसेवी संगठन तरुण भारत संघ तथा स्थानीय लोगों के सामुदायिक प्रयासों को जाता है। इस इलाके में पहले अरवरी नदी सुखी पड़ी रहती थीं और बारिश बहुत कम होती थी। चुँकि पानी के अभाव में खेती संभव नहीं थी इसलिए लोग रोजगार की तलाश में देश के अन्य भागों में चले जाते थे।
वर्षा जल संरक्षण अभियान
पर जब तरुण भारत संघ के कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों को साथ लेकर वर्षा का पानी रोक ने के लिए पुराने जोहड़ों (बांध) को खोदकर गहरा किया, नए जोहड़ बनाए, कुँऐं खोदे, बड़े पैमाने पर पेड़ लगाए तो धीरे-धीर इलाके का नक्शा ही बदल गया। बारिश का पानी एकत्रित होने लगा, वहाँ सूखी रहने वाली 45 कि०मी० लंबी अरवरी नदी में पानी बहने लगा। अब खेतों की सिंचाई होने लगी, पेयजल संकट दूर हुआ और जनजीवन में खुशहाली आ गयी।
इस कामयाबी की ख्याति इतनी फैलीकि पर्यावरण प्रबंध में उत्कृष्ट सामुदायिक उपलब्धी के लिए भांवता कोल्याला गांव को पहला डाउन टू अर्थ – जोसेफ जोन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सामुदायिक नेतृत्व के लिए 2001में तरुण भारत संघ के प्रमुख राजेंद्र सिंह को रमन मेगसेसेय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस मिसाल का संदेश यह है कि अगर लोग स्थानीय स्तर पर खुद संसाधन जुटाकर उनका सामुदायिक विकास की भावना से बेहतर ढंग से उपयोग करें तो विकास का नया रास्ता खोजना कठिन हो सकता है मगर नामुमकीन नहीं।

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