आसन विधि से घर पर बटन मशरूम उगाकर बने अमीर आदमी

हजारों वर्षों से विश्‍वभर में मशरूमों की उपयोगिता भोजन और औषध दोनों ही रूपों में रही है। ये पोषण का भरपूर स्रोत हैं और स्‍वास्‍थ्‍य खाद्यों का एक बड़ा हिस्‍सा बनाते हैं। मशरूमों में वसा की मात्रा बिल्‍कुल कम होती हैं, विशेषकर प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की तुलना में, और इस वसायुक्‍त भाग में मुख्‍यतया लिनोलिक अम्‍ल जैसे असंतप्तिकृत वसायुक्‍त अम्‍ल होते हैं, ये स्‍वस्‍थ ह्दय और ह्दय संबंधी प्रक्रिया के लिए आदर्श भोजन हो सकता है। पहले, मशरूम का सेवन विश्‍व के विशिष्‍ट प्रदेशों और क्षेत्रों त‍क ही सीमित था पर वैश्‍वीकरण के कारण विभिन्‍न संस्‍कृतियों के बीच संप्रेषण और बढ़ते हुए उपभोक्‍तावाद ने सभी क्षेत्रों में मशरूमों की पहुंच को सुनिश्चित किया है। मशरूम तेजी से विभिन्‍न पाक पुस्‍तक और रोजमर्रा के उपयोग में अपना स्‍थान बना रहे हैं। एक आम आदमी को रसोई में भी उसने अपनी जगह बना ली है। उपभोग की चालू प्रवृत्ति मशरूम निर्यात के क्षेत्र में बढ़ते अवसरों को दर्शाती है।

बटन मशरूम उगाने की विधि

बटन मशरूम अपनी बेहतर गुणवत्ता के लिए काफी लोकप्रिय है। इसके लिए करीब 10 क्विन्टल भूसा या कुट्टी को लगातार पानी डाल कर दो दिनों तक भिंगोने भिगोया जाता है । तीसरे दिन इसमें 100 किलोग्राम गेहूं का चोकर, 20 किलोग्राम यूरिया, 50 किलोग्राम जिप्सम, 300 किलोग्राम मुर्गी की खाद या बिनौले की खल्ली 300 किलो ग्राम अच्छी तरह मिला कर ढेर लगा दिया जाता है। ढेर लगाने का भी खास तरीका होता है। पहले 20 फीट लम्बा, 6 फुट चौड़ा, एक फुट ऊंचा भूसा का मिश्रण फर्श पर फैला कर तह लगाते हैं। इसके ऊपर छिद्र वाले 4 ईंच व्यास वाले 20 फीट लम्बे पाईप को क्रमश: डेढ़ फीट के अंतराल पर तह के ऊपर रखते हैं इसके बाद पाईप के ऊपर दो फीट ऊंचा मिश्रण का तह लगाया जाता है। उसके ऊपर फिर दो पाईप इस तरह रखा जाता है कि नीचे रखे तीनों पाईप के बीच में आ जाए।। फिर तीसरी बार दो फीट ऊंचा मिश्रण का तह चढ़ाते हैं। उसके ऊपर एक पाईप ऐसे रखें कि नीचे रखे दोनों पाईप के बीच में रहे। अंत में बाकी बचे मिश्रण का एक फीट मोटा तह बना कर पूरी ढेर को काले रंग के पालिथीन से ढंक दिया जाता है। ऐसा करने से गैस बाहर नहीं निकलती ।

एक से तीन  दिन तक इस ढेर को इसी तरह छोड़ दिया जाता है। चौथे दिन पाईप को दोनों तरफ से खोल देते हैं। इस समय इसका तापमान 50 से 60 डिग्री सेल्सियस रहता है। छठे दिन ढेर की पलटाई की जाती है और पहले वाली प्रक्रिया अपनाते हुए फिर उसे पालिथीन से ढक दिया जाता है । । नौवे दिन ढेर को चारो तरफ से (ऊपर से नहीं) खोल दिया जाता है। इसमें तापक्रम 50 से 60 डिग्री सेल्सियस  के बीच रहना चाहिए। 11वें दिन फिर पलटाई होती है और पहले की भांति फिर ढेर लगा कर ऊपर में पालिथिन से ढक दिया जाता है।लेकिन चारों तरफ से खुला रहना चाहिए जिससे  अंदर का तापमान 48 से 52 डिग्री सेल्सियस रहे । तेरहवें दिन ढेर को पूरी तरह खोल कर ठंडा होने के बाद प्रति क्विनटल खाद में 600 ग्राम बटन मशरूम का बीज मिला कर पालि बैग में या बेड़ में कागज से ढ़क कर रखा जाता है। जिस जगह आप इसे रख रहे हों वहां का तापमान  20 से 25 डिग्री सेल्सियस रहना चाहिए। इस विधि में कवक 15 से 20 दिनों में फैल जाता है। कवक जाल को ढक कर रखना चाहिए और समय समय पर नमी बनाए रखने के लिए पानी का छिड़काव जरुरी होता है। 15 से 20 दिनों बाद मशरूम निकलना शुरु हो जाता है। इस विधि से मशरूम उगाने पर लागत 85रूपये प्रित किलोग्राम आती है और बिक्री 125 रूपये किलोग्राम की दर से होती है। इसके उत्पादन का सही समय नवम्बर से फरवरी होता है । अत: खाद बनाने का काम अक्टूबर महीने में ही शुरू कर देना चाहिए।

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