नदी संरक्षण

नदी प्रणालियों के संरक्षण के लिए कदम उठाने हेतु राष्‍ट्रीय नदी संरक्षण योजनाओं (एनआरसीपी) को आरंभ किया गया है, जिनका उद्देश्‍य प्रदूषित नदियों की सफाई करना है। नदियों में प्रदूषण स्‍तरों को नियंत्रित करने के लिए राज्‍य सरकारों तथा स्‍थानीय निकायों, स्‍वतंत्र पेशेवर निकायों एवं स्‍वतंत्र परियोजना निर्देशकों के बीच समझौतों के एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर किया गया है।
पंजाब में सतलज, घग्‍घर नदियों में प्रदूषण उपचार संयंत्रों की स्‍थापना में 50 प्रतिशत से अधिक लक्ष्‍य हासिल कर लिया गया है। गुजरात में साबरमती संरक्षण परियोजना चरण-II आरंभ की गई है। एमओईएफसीसी सिक्किम एवं नगालैंड के पहाड़ी राज्‍यों समेत भारत में विभिन्‍न राज्‍यों में एनआरसीपी कार्यान्वित कर रहा है।
पूर्वोत्‍तर भारत में सबानसा‍री, तवांग, बिछोम एवं सियांग हेतु विकास परियोजनाओं के सहायता मूल्‍यांकन के लिए नदी बेसिन संचयी प्रभाव विश्‍लेषण एवं ढुलाई क्षमता अध्‍ययन किए गए।
दलदली भूमि पारिस्थितकी प्रणाली जल को शुद्ध करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करती है। भारत भर में 40 बड़ी दलदली भूमियों के लिए 13.43 करोड़ रुपये की लागत से प्रबंधन कार्य योजनाएं आरंभ की गई हैं।
ठोस अपशिष्‍ट एवं वायु प्रदूषण निपटान
इन कदमों के अतिरिक्‍त, एमओईएफसीसी ने देश में सृजित किए जा रहे विभिन्‍न प्रकार के गैर जैव नष्‍ट किए जाने योग्‍य अपशिष्‍टों के निपटान के लिए ठोस, प्‍लास्टिक, जैवचिकित्‍सा एवं ई अवशिष्‍ट प्रबंधन के लिए नियमों को अधिसूचित किया है।
वायु प्रदूषण के स्‍वास्‍थ्‍य नुकसानों के बारे में आम लोगों को अवगत कराने के लिए एक पारद‍र्शी प्रणाली सृजित कराने के लिए 16 नगरों में वायु गुणवत्‍ता सूचकांक आरंभ की गई है। यह प्रतिदिन के आधार पर वास्‍तविक समय में वायु प्रदूषण के स्‍तर को ईंगित करता है। इस डाटा के साथ नागरिक शहरों में वायु गुणवत्‍ता की निगरानी कर सकते हैं।
एमओईएफसीसी ने वृक्ष रोपण, जलसंरक्षण एवं निम्‍न कार्बन जीवन शैली पर जागरुकता एवं ठोस अवशिष्‍ट प्रबंधन में 11 लाख युवाओं को प्रतिभागी बनाया है।
भारत नई पीढ़ी के प्रशीतकों एवं संबंधित निर्वहनीय प्रौद्योगिकियों, जो ओजोन स्‍तर को नुकसान पहुंचाती है, के विकास में घरेलू नवोन्‍वमेषण उपलब्‍ध कराने के जरिये एचएफसी से दूर हटने के साथ आगे बढ़ रहा है।
मंत्रालय ने अंतरिक्ष विभाग के साथ ‘भारत का मरुस्‍थलीकरण एवं भूमि अवकर्षण मानचित्र’ का विकास किया है। यह 2005 से 2013 तक विभिन्‍न राज्‍यों में वर्तमान भूमि उपयोग, एवं भूमि अवकर्षण की तीव्रता पर विस्‍तृत जानकारी उपलब्‍ध कराता है। यह समेकित आंकड़ा देश में भविष्‍य के भूमि उपयोग के लिए आधार उपलब्‍ध कराएगा।

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