पाण्ड्य वंश के शासक

पाण्ड्य राजवंश प्राचीन भारत का एक राजवंश था। इसने भारत में 560 से 1300 ई तक राज किया।

परिचय

तमिल प्रदेश का इतिहास प्रारंभ से ही मुख्य रूप से तीन राजवंशों का इतिहास रहा है- चोल, चेर और, पांड्य। इनमें से पांड्य राजवंश का अधिकार इस प्रदेश के दक्षिणी पूर्वी छोर पर था। उत्तर में पांड्य राज्य पुथुक्कट्टै राज्य तक फैला था; वल्लरु नदी इसकी उत्तरी सीमा थी। साधारणतया दक्षिणी त्रावणकोर और वर्तमान तिन्नेवली, मदुरा तथा रम्नाद जिले ही इसमें सम्मिलित थे। पाड्यों की राजधानी का नाम ‘मदुरा’ उत्तर भारत स्थित मथुरा के अनुकरण पर था पांडवों के साथ इनके सबंध की परंपरा की ओर संकेत करता है। दक्षिण में आज भी महाभारत के युद्ध के अवसर पर पांड्यों की स्थिति का निर्देश करती हुई अनुश्रुतियाँ है। एक मान्यता अनुसार माथुरों (कायस्थ) ने पांड्या राज्य की स्थापना की जो की वर्तमान में मदुरै, त्रिनिवेल्ली जैसे क्षेत्रों में फैला था। माथुरों के दूत रोम के ऑगस्टस कैसर के दरबार में भी गए थे। महावंस’ से ज्ञात होता है कि पांड्य राज्य बुद्ध के समय में भी बना रहा; इस ग्रंथ में बुद्ध के परिनिर्वाण के कुछ दिनों बाद लंका के राजकुमार विजय और एक पांड्य राजकुमारी के विवाह का उल्लेख है।

पाण्ड्य वंश के शासक

कटुंकोन् — सन् 575-600
अवऩि चूळामणि — सन् 600-625
चॆऴियन् चेन्दन् — सन् 625-640
अरिकेसरी — सन् 640-670
रणधीर — सन् 670-710
परांकुश — सन् 710-765
परान्तक — सन् 765-790
इरण्टाम् इराचचिम्मन् — सन् 790-792
वरगुणन् — सन् 792-835
श्रीवल्लभ — सन् 835-862
वरगुण वर्मन् — सन् 862-880
परान्तक पांड्य — सन् 880-900
मारवर्मन राजसिंह द्वितीय — सन् 900–920
मून्राम् इराचचिम्मन् — सन् 900-945
वीर पांड्य — सन् 946-966
अमर भुजंग — सन् 930-945
श्रीवल्लभ पांड्य — सन् 945-955
वीरकेसरी — सन् 1065-1070
जटावर्मन् श्रीवल्लभ — सन् 1145-1150
जटावर्मन् विक्रम — सन् 1149-1158
पराक्रम पांड्य — सन 1150-1160
जटावर्मन् परान्तक पांड्य — सन 1150-1162
मारवर्मन् श्रीवल्लभ — सन् 1132-1162
जटावर्मन् कुलशेखर पांड्य — सन् 1162-1175
जटावर्मन् वीर पांड्य — सन् 1175-1180
विक्रम पांड्य — सन् 1180-1190
मुतलाम् जटावर्मन् कुलशेखर — सन् 1190-1218
पराक्रम पांड्य द्वितीय (सिंहल का राजा) — सन् 1212–1215
मारवर्मन् सुंदर पांड्य — सन् 1216-1238
इरण्टाम् जटावर्मन् कुलशेखर — सन् 1238-1250
मारवर्मन् सुंदर पांड्य द्वितीय — सन् 1239-1251
मुतलाम् जटावर्मन् सुंदर पांड्य — सन् 1251-1271
इरण्टाम् जटावर्मन् वीर पांड्य — सन् 1251-1281
मारवर्मन् कुलशेखर पांड्य प्रथम — सन् 1268-1311
मारवर्मन् विक्रम पांड्य — सन् 1268-1281
इरण्टाम् जटावर्मन् सुंदरपांड्य — सन् 1276-1293
जटावर्मन् पराक्रम पांड्य — सन् 1422-1463
मून्राम् जटावर्मन् कुलशेखर पांड्य — सन् 1429-1473
अऴकन् पॆरुमाळ् पराक्रम पांड्य — सन् 1473-1506
कुलशेखर देव — सन् 1479-1499
जटावर्मन् श्रीवल्लभ पांड्य — सन् 1534-1543
पराक्रम कुलशेखर — सन् 1543-1552
नॆल्वेलि मारन् — सन् 1552-1564
जटावर्मन् अतिवीरराम पांड्य — सन् 1564-1604
वरतुंग पांड्य — सन् 1588-1612
वरगुणराम पांड्य — सन् 1613-1618

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