ठोस अपशिष्‍ट एवं वायु प्रदूषण निपटान

इन कदमों के अतिरिक्‍त, एमओईएफसीसी ने देश में सृजित किए जा रहे विभिन्‍न प्रकार के गैर जैव नष्‍ट किए जाने योग्‍य अपशिष्‍टों के निपटान के लिए ठोस, प्‍लास्टिक, जैवचिकित्‍सा एवं ई अवशिष्‍ट प्रबंधन के लिए नियमों को अधिसूचित किया है।
वायु प्रदूषण के स्‍वास्‍थ्‍य नुकसानों के बारे में आम लोगों को अवगत कराने के लिए एक पारद‍र्शी प्रणाली सृजित कराने के लिए 16 नगरों में वायु गुणवत्‍ता सूचकांक आरंभ की गई है। यह प्रतिदिन के आधार पर वास्‍तविक समय में वायु प्रदूषण के स्‍तर को ईंगित करता है। इस डाटा के साथ नागरिक शहरों में वायु गुणवत्‍ता की निगरानी कर सकते हैं।
एमओईएफसीसी ने वृक्ष रोपण, जलसंरक्षण एवं निम्‍न कार्बन जीवन शैली पर जागरुकता एवं ठोस अवशिष्‍ट प्रबंधन में 11 लाख युवाओं को प्रतिभागी बनाया है।
भारत नई पीढ़ी के प्रशीतकों एवं संबंधित निर्वहनीय प्रौद्योगिकियों, जो ओजोन स्‍तर को नुकसान पहुंचाती है, के विकास में घरेलू नवोन्‍वमेषण उपलब्‍ध कराने के जरिये एचएफसी से दूर हटने के साथ आगे बढ़ रहा है।
मंत्रालय ने अंतरिक्ष विभाग के साथ ‘भारत का मरुस्‍थलीकरण एवं भूमि अवकर्षण मानचित्र’ का विकास किया है। यह 2005 से 2013 तक विभिन्‍न राज्‍यों में वर्तमान भूमि उपयोग, एवं भूमि अवकर्षण की तीव्रता पर विस्‍तृत जानकारी उपलब्‍ध कराता है। यह समेकित आंकड़ा देश में भविष्‍य के भूमि उपयोग के लिए आधार उपलब्‍ध कराएगा।

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