किशोर न्याय बोर्ड की चरण दर चरण प्रक्रिया

यदि कानून का उल्लंघन करनेवाला किशोर जमानत पर नहीं छूटता है तो उसे निगरानी गृह में रखा जाता है, जब तक की किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष मामला निपट न जाए बच्चे को हर 15 दिन में किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष एक बार पेश करना आवश्यक है।
यदि कानून का उल्लंघन करनेवाला किशोर अपना अपराध स्वीकार कर लेता है तो वोर्ड किशोर न्याय अधिनियम की धारा15 के अंतर्गत अंतिम फैसला सुनाती है, जिसमें 18वर्ष की आयु तक बच्चे को निगरानी और फोलोअप शामिल है।
पुलिस को किशोर न्याय बोर्ड के आदेशानुसार 90 दिनों के अंतर्गत गृह में रहने वाले हर बच्चे/किशोर के विरुद्ध चार्जशीट दायर करनी है।
जमानत प्राप्त बच्चे/किशोर के विरुद्ध चार्जशीट दायर करती है जब वह तैयार हो।
पकड़े गये/गिरफ्तार हुए बच्चे को 24 घंटे के भीतर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पुलिस द्वारा पेश किया जाता है।
यदि किसी कारणवश न्याय बोर्ड के सत्र नहीं चल रहे हों तो बच्चे को महानगर न्यायालय के समक्ष पेश किया जा सकता है।
यदि कानून का उल्लंघन करनेवाला किशोर अपना अपराध स्वीकार न करे तो बोर्ड के समक्ष सुनवाई चलती रहती है।
सुनवाई खत्म होने पर धारा 15 के अंतर्गत निर्णय सुनाया जाता है।
जब चार्जशीट दायर हो चुकी हो और बच्चे को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष सुनवाई के लिए पेश किया जाए तो बोर्ड बच्चे को उसपर लगे आरोपों से वाकिफ कराती है।
बच्चे को सुरक्षित हिरासत के लिए निगरानी गृह में भेजा जाता है।
यदि किशोर न्याय बोर्ड को लगाता है और बच्चे पर छोटे अपराधों का दोष लगा है और माता-पिता या अभिभावक बोर्ड के समक्ष मौजूद है तो मजिस्ट्रेट बच्चे को कुछ शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ सकता है।

Leave a Comment