ईसाई धर्म का सारांश

ईसाई धर्म

ईसाई धर्म (अन्य प्रचलित नाम:मसीही धर्म व क्रिश्चियन धर्म) एक इब्राहीमी एकेश्वरवादी धर्म है, जिसके अनुयायी ईसाई कहलाते हैं। ईसाई धर्म के अनुयायी ईसा मसीह की शिक्षा पर चलते हैं। ईसाइयों में बहुत से समुदाय हैं जैसे कैथोलिक, प्रोटैस्टैंट, आर्थोडोक्स, एवानजिलक आदि। ईसाई धर्म के अनुसार जीव हत्या, अनावश्यक हरे पेड़ों की कटाई ,किसी को व्यर्थ आघात पहुँचाना, व्यर्थ जल बहाना, आदि पाप है। बाईबल ईसाई धर्म का धर्मग्रंथ है। पूरे विश्व में 230 करोड़ लोग ईसाई धर्म को मानते हैं।

ईश्वर
ईसाई एकेश्वरवादी हैं, लेकिन वे ईश्वर को त्रीएक के रूप में समझते हैं — परमपिता परमेश्वर, उनके पुत्र ईसा मसीह (यीशु मसीह) और पवित्र आत्मा।

परमपिता
परमपिता इस सृष्टि के रचयिता हैं और इसके शासक भी।

ईसाई धर्म का सारांश


ईसाई धर्म में प्रचलित मान्यताओं एवं सिद्धांतों को सार रूप में निम्न बिंदुओं के अंतर्गत दर्शाया जा सकता है।

  1. ईश्वर: एक सत्ता है पर उसके तीन रूप है- पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा।
  2. पतन: ईश्वर ने मानव को पूर्ण बनाया, किंतु आदम ने ईश्वर का आदेश न मानने का अपराध किया। इस कारण मानव जाति ईश्वर से दूर हो गई और उसका पतन हुआ। (पुरानी बाइबिल)
  3. अवतार: मनुष्य और ईश्वर के पुनर्मिलन को पुन: स्थापित करने के लिए ईश्वर यीशु के रूप में मनुष्य बनकर धरती पर अवतरित हुआ। (नई बाइबिल)
  4. कुंवारी से जन्म: ईश्वर ने ईशु के रूप में चमत्कार पूर्वक कुंवारी मरियम की कोख (गर्भ) से जन्म लिया।
  5. यीशु का द्वैत रूप: यीशु एक ही समय में ईश्वर भी था और मनुष्य भी।
  6. प्रायश्चित: ईश्वर ने यीशु के रूप में कष्ट सहा, मनुष्य बनकर बलिदान दिया।
  7. पुनरुत्थान: ईश्वर ने यीशु की कब्र से उठकर विश्वास वालों को अमरता प्रदान की।
  8. चर्च का देवी आधार: ईश्वर ने यीशु रूप में मनुष्य और ईश्वर के साम्राज्य को स्थापित पद्धति के रूप में चर्च (संघ) का निर्माण किया।
  9. कृपा: ईश्वर अपने प्रेम द्वारा मनुष्य को पाप से बचाने के लिए सहायता देता है।
  10. पुनरागमन: ईश्वर यीशु के रूप में फिर आएगा। भले लोग कब्र से उठ खड़े होंगे। पुण्यात्माओं की मुक्ति होगी। पापी सदा के लिए नरक में जाएंगे।

ईसा मसीह


ईसा मसीह कौन थे जिन्हें आज विश्व के सबसे ज्यादा लोग पूजा करते है ?

ईसा मसीह स्वयं परमेश्वर के पुत्र है| जो पतन हुए (पापी) सभी मनुष्यों को पाप और मृत्यु से बचाने के लिए जगत में देहधारण होकर (देह में होकर) आए थे। परमेश्वर जो पवित्र हैं एक देह में प्रगट हुए ताकि पापी मनुष्यों को नहीं परन्तु मनुष्यों के अन्दर के पापों को खत्म करें। वे इस पृथ्वी पर पहले ऐसे ईश्वर है.जो पापी, बीमार, मूर्खों और सताए हुओं का पक्ष लिया और उनके बदले में पाप की कीमत अपनी जान देकर चुकाई ताकि मनुष्य बच सकें | हमारे पापों की सजा यीशु मसीह चूका दिए इस लिए हमें पापों से क्षमा मिलती है। यह पापी मनुष्य और पवित्र परमेश्वर के मिलन का मिशन था जो प्रभु यीशु के क़ुरबानी से पूरा हुआ। एक श्रृष्टिकर्ता परमेश्वर हो कर उन्होंने पापियों को नहीं मारा परन्तु पाप का इलाज़ किया। यह बात परमेश्वर पिता का मनुष्यों के प्रति अटूट प्रेम को प्रगट करता है। मनुष्यों को पाप से बचाने के लिये परमेश्वर शरीर में आए। यह बात ही यीशु मसीह का परिचय है। यीशु मसीह परमेश्वर थे यही बात आज का ईसाई धर्म का आधार है। उन्होंने स्वयं कहा मैं हूँ !!! ईसा मसीह (यीशु) एक यहूदी थे जो इस्राइल इजराइल के गाँव बेत्लहम में जन्मे है (4 ईसापूर्व)। ईसाई मानते हैं कि उनकी माता मारिया (मरियम) कुवांरी (वर्जिन) थीं। ईसा उनके गर्भ में परमपिता परमेश्वर की कृपा से चमत्कारिक रूप से आये है। ईसा के बारे में यहूदी नबियों ने भविष्यवाणी की है कि एक मसीहा (अर्थात “राजा” या तारणहार) जन्म लेगा। कुछ लोग ये मानते हैं कि ईसा भारत भी आये थे। बाद में ईसा ने इजराइल में यहूदियों के बीच प्रेम का संदेश सुनाया और कहा कि वो ही ईश्वर के पुत्र हैं। इन बातों पर पुराणपंथी यहूदी धर्मगुरु भड़क उठे और उनके कहने पर इजराइल के रोमन राज्यपाल ने ईसा को क्रूस पर चढ़ाकर मारने का प्राणदण्ड दे दिया। ईसाई मानते हैं कि इसके तीन दिन बाद ईसा का पुनरुत्थान हुआ या ईसा पुनर्जीवित हो गये। ईसा के उपदेश बाइबिल के नये नियम में उनके 12 शिष्यों द्वारा रेखांकित किये गये हैं। ईसा मसीह पुनरूत्थान यानी मृत्यु पर विजय पाने के बाद अथवा तीसरे दिन में जीवित होने के वाद यीशु एक साथ प्रार्थना कर रहे सभी शिष्य और अन्य मिलाकर कूल 40 लोग वहा मौजूद थे पहले उन सभी के सामने प्रकट हुए । उसके बाद बहूत सारे जगह पर और बहूत लोगो के साथ भी

पवित्र आत्मा
पवित्र आत्मा त्रिएक परमेश्वर के तीसरे व्यक्तित्व हैं जिनके प्रभाव में व्यक्ति अपने अन्दर ईश्वर का अहसास करता है। ये ईसा के चर्च एवं अनुयाईयों को निर्देशित करते हैं।

बाइबिल
ईसाई धर्मग्रन्थ बाइबिल में दो भाग हैं। पहला भाग (पुराना नियम) और यहूदियों का धर्मग्रन्थ एक ही हैं। दूसरा भाग (नया नियम) ईसा के उपदेश, चमत्कार और उनके शिष्यों के काम से रिश्ता रखता है।

सम्प्रदाय
ईसाइयों के मुख्य सम्प्रदाय हैं :

रोमन कैथोलिक
रोमन कैथोलिक रोम के पोप को सर्वोच्च धर्मगुरु मानते हैं।

प्रोटेस्टेंट
प्रोटेस्टेंट किसी पोप को नहीं मानते है और इसके बजाय पवित्र बाइबल में पूरी श्रद्धा रखते हैं। मध्य युग में जनता के बाइबिल पढने के लिए नकल करना मना था। जिससे लोगो को ख्रिस्ती धर्म का उचित ज्ञान नहीं था। कुछ बिशप और पादरियों ने इसे सच्चे ख्रिस्ती धर्म के अनुसार नहीं समझा और बाइबिल का अपनी अपनी भाषाओ में भाषान्तर करने लगे, जिसे पोप का विरोध था। उन बिशप और पादारियों ने पोप से अलग होके एक नया सम्प्रदाय स्थापित किया जिसे प्रोटेस्टेंट कहते है (जिन्होने पोप् का विरोध प्रोटेस्ट किया)।

कोपिमिईस्म
कोपिमिईस्म विद्या नकल करने का अधिकार या लाइसेंस को विश्वास नहीं करता। इसकी शुरुआत हुई है बाइबल के एक वाक्यांश से:

सो तुम लोग वैसे ही मेरा अनुसरण करो जैसे मैं मसीह का अनुसरण करता हूँ।
—1 कुरिन्थियों 11:1
ऑर्थोडॉक्स
ऑर्थोडॉक्स रोम के पोप को नहीं मानते, पर अपने-अपने राष्ट्रीय धर्मसंघ के पैट्रिआर्क को मानते हैं और परम्परावादी होते हैं।

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