सऊदी अरब में एक भी नदी नहीं है फिर भी वहां पानी कैसे आता है ? आप भी जानिए

सउदी अरब मध्यपूर्व में स्थित एक सुन्नी मुस्लिम देश है। यह एक इस्लामी राजतंत्र है जिसकी स्थापना 1750 के आसपास सउद द्वारा की गई थी। यहाँ की धरती रेतीली है तथा जलवायु उष्णकटिबंधीय मरुस्थल। यह विश्व के अग्रणी तेल निर्यातक देशों में गिना जाता है। सउदी अरब के पश्चिम की ओर लाल सागर है और उसके पार मिस्र। दक्षिण की ओर ओमान और यमन हैं और उनके दक्षिण में हिन्द महासागर। उत्तर में इराक और जॉर्डन की सीमा लगती है जबकि पूरब में फारस की खाड़ी और कुवैत तथा संयुक्त अरब अमीरात। इसरायल-फ़िलिस्तीन का क्षेत्र इसके उत्तर की दिशा में है और अरबों ने इसके इतिहास को बहुत प्रभावित किया है।
सउदी अरब मध्यपूर्व में स्थित एक सुन्नी मुस्लिम देश है। यह एक इस्लामी राजतंत्र है जिसकी स्थापना 1750 के आसपास सउद द्वारा की गई थी। यहाँ की धरती रेतीली है तथा जलवायु उष्णकटिबंधीय मरुस्थल। यह विश्व के अग्रणी तेल निर्यातक देशों में गिना जाता है। सउदी अरब के पश्चिम की ओर लाल सागर है और उसके पार मिस्र। दक्षिण की ओर ओमान और यमन हैं और उनके दक्षिण में हिन्द महासागर। उत्तर में इराक और जॉर्डन की सीमा लगती है जबकि पूरब में फारस की खाड़ी और कुवैत तथा संयुक्त अरब अमीरात। इसरायल-फ़िलिस्तीन का क्षेत्र इसके उत्तर की दिशा में है और अरबों ने इसके इतिहास को बहुत प्रभावित किया है।
यहाँ इस्लाम के प्रवर्तक मुहम्मद साहब का जन्म हुआ था और यहाँ इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना अवस्थित हैं। इस्लाम में हज का स्थान मक्का बताया गया है और दुनिया के सारे मुसलमान मक्का की ओर ही नमाज अदा करते हैं। यहाँ के मुसलमान मुख्यतः सुन्नी हैं और इस्लाम की राजनैतिक राजधानी के इस देश से बाहर रहने के बावजूद इस देश के लोगों ने इस्लाम धर्म पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है।
नदी भूतल पर प्रवाहित एक जलधारा है, जिसका स्रोत प्रायः कोई झील, हिमनद, झरना या बारिश का पानी होता है तथा किसी सागर अथवा झील में गिरती है। नदी शब्द संस्कृत के नद्यः से आया है। संस्कृत में ही इसे सरिता भी कहते हैं।
प्राचीन काल में दिल्मन सभ्यता सुमेर तथा मिस्र की प्राचीन सभ्यता के समकालीन थी। सन् 3500-2500 ईसापूर्व के मध्य में कुछ अरबों का बेबीलोनिया-असीरिया के इलाके में आगमन अरबों के इतिहास की पहली महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। सातवीं सदी तक अरबों का इतिहास कबीलों के झगड़ों और छिटपुट रूप से विदेशी प्रभुत्व की कहानी लगती है।
सऊदी अरब रेगिस्तान में बसा देश है जहां कोई स्थायी नदी या झरना नहीं है। देश में पानी कम मात्रा में ही उपलब्ध है और बेहद कीमती है। देश में पानी के संसाधनों को लेकर किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं हुई है लेकिन इसकी मांग लगातार बढ़ती ही जा रही है। आइए जानते हैं, आखिर कैसे पानी की कमी को पूरा कर लेता है सऊदी अरब…
किंग्डम ने तमाम परेशानियों के बावजूद ऐसे नए नए तरीके ईजाद किए हैं जिससे वह अपने देश में पानी की मांग को पूरा कर पा रहा है। पानी से जुड़े सभी मामले जल और विद्युत मंत्रालय के हवाले हैं…
सऊदी अरब में पानी का अहम स्रोत अकवीफर्स हैं। अकवीफर्सी में अंडरग्राउंड रूप से जल का संग्रह किया जाता है।
1970 में, सरकार ने अकवीफर्स पर काम शुरू किया था। इसका नतीजा ये हुआ कि देश में हजारों अकवीफर्स बनाए गए। इन्हें शहरी और कृषि दोनों जरूरतों में इस्तेमाल किया जाता है।
देश में पानी का दूसरा अहम स्रोत समुद्र है। समुद्री पानी को पीने लायक बनाने की प्रक्रिया को डीसेलीनेशन कहते हैं। सऊदी अरब दुनिया में डीसेलीनेटेड वाटर का सबसे बड़ा स्रोत है।
सेलीन वाटर कनवर्जन कॉर्पोरेशन (SWCC) 27 डीसेलीनेशन स्टेशन को ऑपरेट करता है और इससे 3 मिलियन क्यूबिक मीटर पोटेबल वाटर हर दिन निकलता है। ये प्लांट शहरों में इस्तेमाल होने वाले 70 फीसदी जल को उपलब्ध कराते हैं और साथ ही, इंडस्ट्रीज के इस्तेमाल लायक पानी भी उपलब्ध कराते हैं। इलेक्ट्रिक पावर जेनरेशन के भी ये अहम सोर्स हैं।
फिलहाल समुद्री पानी को खारेपन से मुक्त करने की तकनीक अपनाना बहुत महंगा है, अर्थात इसकी लागत 1000 डॉलर प्रति एकड़-फ़ुट आती है, जबकि साधारण तरीके से पानी के स्रोत से जल को शुद्ध बनाने की प्रक्रिया पर 200 डॉलर प्रति एकड़-फफुट का खर्च आता है। डी-सेलिनेशन की तकनीक धीरे-धीरे उन्नत हो रही है, विभिन्न देशों के वैज्ञानिक इसका समाधान ढूंढने और इसे कम लागत वाला बनाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं और कीमतें कम होने भी लगी हैं।
डीसेलिनेटड (अ-लवणीकृत) पानी के सबसे अधिक उपयोगकर्ता सऊदी अरब, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन आदि हैं जो कि डीसेलिनेटड पानी का लगभग 70% हिस्सा उपयोग कर लेते हैं। जबकि उत्तरी अफ्रीका में (लीबिया और अल्जीरिया) यह खपत पूरे विश्व के उत्पादन की 6 प्रतिशत है।
किसी जगह बाढ़ की सूरत में बांध पानी को संग्रहित करने के काम आते हैं। 200 से भी ज्यादा बांध 16 बिलियन क्यूबिक फीट जल का संग्रह सालाना करते हैं। कुछ बेहद बड़े बांध वादी जिजान, वादी फतीमा, वादी बीशा और नजरान में स्थित हैं।
इस पानी को कृषि के लिए उपयोग में लाया जाता है। इसे लंबी फैली नहरों के जरिए देश के कोने कोने में पहुंचाया जाता है।
देश में पानी को रीसाइकल कर भी उसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। किंग्डम की कोशिश रहती है कि कम से कम शहरी इलाकों में घरेलू इस्तेमाल के 40 फीसदी पानी को रिसाइकल कर उपलब्ध कराया जाए।
इसी कोशिश में, रियाद, जेद्दाह और कई दूसरे बड़े इंडस्ट्रियल सेंटर्स में रीसाइकल प्लांट तैयार किए गए हैं। रीसाइकल पानी को सिंचाई और शहरी पार्कों में भी इस्तेमाल किया जाता है।

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