परम्बिकुलम वन्यजीव अभयारण्य की पर्यटकों के लिए जानकारी

परम्बिकुलम वन्यजीव अभयारण्य

परम्बिकुलम वन्यजीव अभयारण्य दक्षिणी भारत के केरल राज्य के पालक्कड जिले के चित्तूर तालुके में 89 वर्गकिमी में विस्तृत एक संरक्षित क्षेत्र है। 1973 में स्थापित यह अभयारण्य अनाइमलाई पाहड़ियों और नेल्लियमपथी पाहड़ियों के बीच सुन्गम पर्वतमाला में स्थित है। पश्चिमी घाट, अनाइमलाई उपसमूह क्षेत्र और परम्बिकुलम वन्यजीव अभयारण्य सहित यह पूरा क्षेत्र यूनेस्को की विश्व विरासत समीति द्वारा एक विश्व धरोहर स्थल बनाए जाने के लिए विचाराधीन है। यह अभयारण्य स्थानीय लोगों की 4 विभिन्न जनजातियों का घर है, इनमें छः बस्तियों में बसे काडर, मालासार, मुदुवर और मल मलसर शामिल हैं। 19 फ़रवरी 2010 को परम्बिकुलम वन्य जीवअभयारण्य को 390.88 वर्ग किलोमीटर (150.9 वर्ग मील)[5]परम्बिकुलम टाइगर रिजर्व के एक भाग के रूप में घोषित किया गया।

भौगोलिक स्थिति
यह अभयारण्य 76° 35’- 76° 50’ ई देशांतर और 10° 20’ – 10° 26’ एन अक्षांश के बीच स्थित है। यह पालक्कड शहर से 135 किमी और तमिलनाडु के पूर्व में अन्नामलाई वन्य जीव अभयारण्य के निकट स्थित है। उत्तर में इसकी सीमा नेमारा वन प्रभाग, दक्षिण में वेजाचल वन प्रभाग और पश्चिम में चलाकुडी वन प्रभाग से मिलती है। अभयारण्य का भूविज्ञान हॉर्नब्लेंड, बायोटाइट, शैल और क्रेनोकाइट से युक्त है।

इनकी ऊंचाई 300 मीटर और 1438 मीटर के बीच है। थूथमपारा में अभयारण्य की उत्तरी सीमा पर नेल्लियमपथि पाहड़ियों से अन्नामलाई पाहड़ियों तक 600 मीटर की ऊंचाई है। अभयारण्य की प्रमुख चोटियां दक्षिण सीमा पर करीमाला (1438 मीटर), उत्तर में पंडारावराई (1290 मीटर), पूर्वी सीमा में कुच्चीमुड़ी, वेनगोली मालया (1120मीटर) पश्चिमी सीमा में पुल्लायप्पाड़म (1010 मीटर) हैं। अभयारण्य में तीन मनुष्य निर्मित जलाशय हैं: परम्बिकुलम, थुनाकदावू और पेरूवरिपल्लम और इनका सम्मलित क्षेत्र 20.66 वर्ग किलोमीटर है। थूवायर झरने इनमें से किसी एक जलाशय में जाकर खाली होते हैं। यहां पर 7 मुख्य घाटियां और परामबिकुलम, थेक्केडी और शोलायर नामक 3 बड़ी नदियां हैं। इस क्षेत्र में करापारा और कुरीअरकुट्टी नदियां भी बहती हैं।

पर्यटकों के लिए जानकारी
जंगल में पूर्व अनुमति के साथ ट्रेकिंग की जा सकती है। सम्पर्क करें: ईको केयर सेंटर, परम्बिकुलम वन्यजीव अभयारण्य, अनाप्पेडी, थुनकादावू (पीओ), पोलाची (विया), पालक्काड, केरल – 661 678.फोनः 04253 – 245025 जलाशय में नौकाविहार किया जा सकता है। यहां पर थुनकादावू गांव के पास ही एशिया का सबसे बड़ा केन्नीमेर सौगान का पेड़ भी है।

पारम्बिकुल्लम के मुख्यालय थुनकादावू में आरक्षित वन क्षेत्र में एक वृक्ष-गृह (ट्री हाउस) भी है जिसे पहले से आरक्षित करना पड़ता है। थुनकादावू थिल्लिकली और इलाथोड में बने राज्य वन विभाग के रेस्ट हाउस आरामदायक रहन-सहन प्रदान करते हैं।

तमिलनाडु के पोलाची से सड़क द्वारा परम्बिकुलम पहुंचा जा सकता है। पालक्कड से पोलाची 45 किलोमीटर की दूरी पर है, फिर पोलाची से परम्बिकुलम 65 किमी की दूरी पर है। निकटतम रेलवे स्टेशन पोलाची में है और निकटतम हवाईअड्डा पलक्कड से 120 किमी पर कोयंबटूर, तमिलनाडु में है।

जीव-जंतु
अभयारण्य में विविध प्रकार के जीव बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं इनमें शामिल हैं: स्तनधारियों की 39 प्रजातियां, एम्फीबिया की 16 प्रजातियां, पक्षियों की 268 प्रजातियां, मछली की 47 प्रजातियां, 1049 प्रजातियों के कीड़े-मकोड़ों और तितिलयों की 124 प्राजातियां.

स्तनधारी – महत्वपूर्ण स्तनधारियों में शामिल हैं: शेर जैसी पूंछ वाला मकाक, नीलगिरि तहर, हाथी, बंगाल टाइगर, तेंदुआ, जंगली सूअर, सांभर, बोनेट मकाक, नीलगिरि लंगूर, स्लॉथ भालू, नीलगिरि नेवला, छोटा त्रावणकोर, उड़ने वाली गिलहरी और गौर.
सरीसृप – परम्बिकुलम वन्यजीव अभयारण्य के महत्त्वपूर्ण सरीसृपों में शामिल हैं: किंग कोबरा, केरल के शील्डटेल सांप, त्रावणकोर कुकरी सांप, त्रावणकोर वॉल्फ सांप, कोचीन केन कछुआ, त्रावणकोर कछुआ, इंडियन डे छिपकली और पश्चिमी घाट की उड़न छिपकली. दूसरे अन्य महत्वपूर्ण सरीसृप हैं, भारतीय पहाड़ी अजगर, मालाबार पिट वाइपर सांप, त्रावणकोर कछुआ, दक्षिण भारतीय वन भूमि छिपकली, दक्षिण भारतीय पहाड़ी छिपकली, माउंटेन स्किंक, मगर मगरमच्छ, वारानस, तालाब टेराफिन, गिरगिट और साँप स्पक्टेकल्ड कोबरा, क्रेट, ग्रीन कीलबैक, ज़ैतू कीलबैक, पश्चिमी चूहा सर्प और बेल साँप. सांप की प्रजातियों की सूची देखें
मछली – अभयारण्य में मछली की 47 प्रजातियां दर्ज की गयी हैं जिनमें से सात लुप्तप्राय प्रजातियों के रूप में सूचीबद्ध हैं और 17 पश्चिमी घाट क्षेत्र की हैं। कुछ मछलियों में शामिल हैं: अराल, बराल, वट्टुडी, तिलापिया, नूरी, मूशू, पुच्चूटी, कोल्लिटी, एक्सपरियस, तराल. मछलियों की पूरी सूची देखें
पक्षी -अभयारण्य में 268 प्रजातियों के पक्षी दर्ज किए गये हैं। 134 प्रजातियां दुर्लभ प्रजातियों के रूप में सूचीकृत हैं और 18 पश्चिमी घाट की स्थानीय प्रजातियां हैं। छोटे एडजुटेंट सारस, ग्रे-सिर वाली फिश ईगल, प्रायद्वीपीय खाड़ी उल्लू, ब्रोडबिल्ड रोलर और ग्रेट पीड हार्नबिल. अन्य पक्षियों में शामिल हैं:
तितलियां – अभयारण्य में तितलियों की 124 प्रजातियां दर्ज हैं जिनमें से 34 दुर्लभ और स्थानीय प्रजातियां हैं।
उभयचर – अभयारण्य में रहने वाली 23 उभयचर प्रजातियों में शामिल हैं: चोटी वाला मेंढक बुफो पेरीटाइल्स, आम एशियाई मेंढक बुफो मेलोटेशियस, प्रमुख बड़े नेक्टेबेरियस झुर्रीदार मेंढक, छोटे नेक्टेबेरियस मेंढक झुर्रीदार, राना टिगरीना, मेंढक राना केरालेनेसिस, राना सयानोफ्लेटिस, बुलेंजर का भारतीय मेंढ़क राना लेप्टोडेट्य्ला, राना इमनोचेरिस, बेडडोम्स का कूदने वाला मेंढक राना बेडडोमी, दक्षिण भारतीय मेंढक राणा सेमीपालमपाता, बाइकोलरियल मेंढक राना क्रटिपाइस, पीतल टेम्पोरिलयस मेंढक राना, लाल बोरोविंगग रुफीसेंस मेंढक टोमोपेटरना, परम्बिकुलम मस्सा मेंढक दादुर परम्बिकुलम टेमोपेटना परम्बिकुलमाना, सफेद नाकवाला ल्युकोनियस फिलातस झाड़ी मेंढक, सफेद धब्बेदार क्लाजोडियस फिलुतिस झाड़ी मेंढक, केरल का केरलनाशिस लेमिटेशस मस्सेवाला मेंढक, भारतीय फसकस मकरीलेस मेंढक एपीथियस स्कोलोथिस, क्रिकेट मेंढक लेमिनोनेक्टस, लेमिचेरिस, बेड़ोमी के छलांग मारने वाले मेंढक इडिरिना बेडोमी, छोटा झिल्लीदार उछालने वाला मेंढक इंडिराना बेरिटेरियस और आम मेंढक माइकरिलस फसकस है। यह करेल के निकट है।

वनस्पतियां
अभयारण्य में मुख्यतः सागौन, रोसवुड, चंदन और, नीम जैसे कई किस्म के पेड़ मौजूद हैं। यहां तक कि अब तक का सबसे पुराना सागौन का पेड़ केनीमारा भी यहीं हैं। यह लगभग 450 साल पुराना है और अविश्वसनीय रूप से इसकी परिधि 6.8 मीटर और ऊंचाई 49.5 मीटर है। इसे भारत सरकार का महावृक्ष पुरस्कार प्रदान किया गया है।

खतरे
अप्रैल 2007 में परम्बिकुलम वन्यजीव अभयारण्य और नेल्लियमपथि जंगलों के आसपास के कुछ हिस्सों में लगी आग के कारण सैंकड़ों एकड़ वन्य इलाके और वृक्ष नष्ट हो गया। आग बेरोजगार अग्निशमन कर्मचारियों और शहद इकट्ठा करने वालों ने लगाई थी।

आग का एक कारण पूर्वी क्षेत्र में मानसून पूर्व बारिश का अभाव होना भी रहा. इस क्षेत्र में जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल के दौरान बारिश होती है। इस वर्ष, जनवरी में यहाँ केवल 4 मिमी बारिश हुई और उसके बाद दोबारा बारिश नही हुई. गर्मियों में नेल्लियमपथि को अभूतपूर्व सूखे का सामना करना पड़ा. अप्रैल में अधिकत्तम तापमान 34o सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26o तक पहुंच गया।

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