किलिमंजारो पर्वत के ऊपर ट्रेकिंग मार्ग

किलिमंजारो, अपने तीन ज्वालामुखीय शंकु, किबो, मवेन्ज़ी, और शिरा के साथ पूर्वोत्तर तंजानिया में एक निष्क्रिय स्ट्रैटोज्वालामुखी है और अफ्रीका का उच्चतम पर्वत है जिसकी ऊंचाई समुद्र तल से 5,895 मीटर या 19,341 फीट है (उहरू शिखर / किबो शिखर). किलिमंजारो पर्वत दुनिया का सबसे ऊंचा मुक्त-खड़ा पर्वत है और साथ ही साथ विश्व का चौथा सबसे उभरा पर्वत है जो आधार से 5,882 मीटर या 19,298 फीट ऊंचा है।

नाम
किलिमंजारो नाम का सटीक अर्थ और उत्पत्ति अज्ञात है। माना जाता है कि यह स्वाहिली शब्द किलिमा (अर्थ “पहाड़”) और किचागा शब्द जारो, जिसका अनुवाद “सफेदी” है का एक संयोजन है, जिससे व्हाईट माउंटेन नाम की उत्पत्ति हुई. एक और मान्यता है कि चागा/किचागा में “जारो” का अर्थ है ‘हमारा’ और इसलिए किलिमंजारो का मतलब है हमारा पहाड़. यह चागा वासियों से लिया गया है जो इस पहाड़ की तलहटी में रहते हैं।
यह अज्ञात है कि किलिमंजारो नाम कहां से आया है, लेकिन कई सिद्धांत मौजूद हैं। यूरोपीय खोजकर्ताओं ने 1860 तक इस नाम को अपना लिया था और बताया कि यह इसका स्वाहिली नाम था, और किलिमंजारो को दो भागों में खंडित किया जाता है, एक है किलिमा (“पहाड़ी, छोटा पहाड़” के लिए स्वाहिली शब्द) और दूसरा जारो जिसका मूल, सिद्धांतों के अनुसार बदलता रहता है – कुछ लोगों के अनुसार यह प्राचीन स्वाहिली शब्द है जिसका अर्थ सफेद या चमक है, या गैर-स्वाहिली मूल के अनुसार यह किचागा भाषा से आया है, शब्द जारो का अर्थ है “कारवां”. इन सभी के साथ समस्या यह है कि वे इस बात की व्याख्या नहीं कर सकते हैं कि क्यों पहाड़ के लिए उचित शब्द मिलिमा के बजाय अल्पार्थक किलिमा शब्द का उपयोग किया गया है। यह नाम एक स्थानीय हंसी-मज़ाक का हिस्सा हो सकता है, जो “जारो की छोटी पहाड़ी” को अफ्रीकी महाद्वीप का सबसे बड़ा पहाड़ संदर्भित करता है, क्योंकि यह पास का शहर है और गाइड बताते हैं कि यह जारो लोगों की पहाड़ी है। एक अलग दृष्टिकोण के तहत यह माना जाता है कि यह किचागा किल्मनारे या किलिअजाओ से आया है जिसका अर्थ है “जो पक्षियों/तेंदुए/कारवां को पराजित करता है”. लेकिन इस सिद्धांत से इस तथ्य की व्याख्या नहीं होती कि किचागा में किलिमंजारो का 19वीं सदी के मध्य में यूरोप में इससे पहले प्रयोग नहीं किया गया था।

किलिमंजारो के ऊपर ट्रेकिंग मार्ग

वहां छह आधिकारिक चढ़ाई मार्ग हैं जिससे किलिमंजारो पर्वत पर चढ़ाई की जा सकती है, उनके नाम हैं: मरान्गु, रोंगई, लेमोशो, शिरा, उम्ब्वे और मचामे. सभी मार्गों में, मचामे काफी मनोरम है, हालांकि पहाड़ पर इसकी चढ़ाई काफी खड़ी है, जिसे छह या सात दिनों में पूरा किया जा सकता है। रोंगाई सबसे आसान शिविर मार्ग है और मरान्गु भी अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन आवास झोपड़ियों में होता है। परिणामस्वरूप, यह मार्ग बहुत व्यस्त हो जाता है और चढ़ने और उतरने का मार्ग समान है।
जो लोग किलिमंजारो पर चढ़ाई करना चाहते हैं उन्हें उपयुक्त शोध करने की सलाह दी जाती है और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा जाता है कि वे उचित रूप से लैस हैं और शारीरिक रूप से सक्षम हैं। हालांकि यह चढ़ाई तकनीकी रूप से उतनी चुनौतीपूर्ण नहीं है जितनी हिमालय के शिखर की चढ़ाई करना, फिर भी उंचाई, निम्न तापमान और सामयिक तेज़ हवाएं इसे एक कठिन और खतरनाक चढ़ाई बना देती हैं। जलवायु-अनुकूलन जरूरी है और इसके बाद भी सबसे अनुभवी पर्वतारोही भी तुंगता बिमारी से कुछ हद तक पीड़ित होते हैं। किलिमंजारो शिखर इतना ऊंचा है कि उस ऊंचाई पर उच्च तुंगता फुफ्फुसीय शोफ़ (HAPE), या उच्च तुंगता प्रमस्तिष्क शोफ़ घटित हो सकता है। सभी पर्वतारोही काफी असुविधा का अनुभव करते हैं, आमतौर पर श्वास अल्पता, हाइपोथर्मिया और सिर दर्द और यद्यपि अधिकांश युवा, स्वस्थ लोग उहुरू शिखर पर पहुंच जाते हैं, चढ़ाई करने वाले लोगों में से अधिकांश कम ऊंचाई पर ही रुक जाते हैं।
उच्च ऊंचाई पर चढ़ाई करने वाले क्लबों ने, पर्वत पर बिताए जाने वाले प्रत्येक दिन के लिए शुल्क वसूल किये जाने पर तंजानिया के अधिकारियों की आलोचना की है। इससे पर्वतारोही समय और पैसा बचाने के लिए तेजी से चढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जबकि उचित जलवायु-अनुकूलन की मांग है कि किसी भी उच्च चढ़ाई करने के लिए देरी को अपनाया जाता है।
पहाड़ के आस-पास तंजानियाई चिकित्सा सेवाओं ने हाल ही में पर्यटकों की बढ़ती आमद पर चिंता व्यक्त की है जो किलिमंजारो को जाहिरा तौर पर एक आसान चढ़ाई समझते हैं। हालांकि, मामला यह नहीं है। कई व्यक्तियों को अपने प्रयास के दौरान महत्वपूर्ण ध्यान की आवश्यकता होती है और कई को तो मजबूरन अपनी चढ़ाई को त्यागना पड़ता है। इस मामले में एक जांच ने निष्कर्ष निकाला है कि तंजानिया जाने वाले पर्यटकों को अक्सर चढ़ाई करने वाले समूहों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है बिना यह बताए कि इसके लिए शारीरिक स्वस्थता की अनिवार्यता कितनी महत्वपूर्ण है, हालांकि कई सामग्री विक्रेता और टूर ऑपरेटर शिखर तक पहुंचने की उच्च सफलता दर का दिखावा करते हैं। किलिमंजारो राष्ट्रीय उद्यान से पता चलता है कि पर्वतारोहियों का केवल 30% वास्तव में उहरू शिखर पर पहुंचता है जबकि अधिकांश पर्वतारोही उहरू से 300 मीटर नीचे, गिलमन प्वाइंट पर या उहुरू से 200 मीटर नीचे स्टैला प्वाइंट से वापस आ जाते हैं। किलिमंजारो को अक्सर कम आंका जाता है क्योंकि यह एक तकनीकी चढ़ाई नहीं है। हालांकि, कई पर्वतारोही किलिमंजारो को शारीरिक रूप से बहुत ही कठिन चढ़ाई मानते हैं।
कुछ लोगों का अनुमान है कि माउंट एवरेस्ट की तुलना में किलिमंजारो पर चढ़ाई करते समय अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई है जबकि एवरेस्ट पर अपेक्षाकृत बहुत कम पर्वतारोहियों ने चढ़ाई का प्रयास किया है. अगस्त 2007 में एक ही सप्ताह के भीतर चार पर्वतारोहियों की मृत्यु हो गई और इस घटना ने इस बात को और सिद्ध किया कि चढ़ाई को लापरवाही से नहीं लिया जाना चाहिए. कई लोग (पर्वतारोही, भारिक और गाइड) प्रत्येक वर्ष पहाड़ पर मर जाते हैं। इन मृतकों में अधिकांश भारिक होते हैं जो हाइपोथर्मिया से मारे जाते हैं। पर्वतारोही पहाड़ की खड़ी ढालों से गिर जाते हैं और चट्टानों की स्खलन ने भी पर्वतारोहियों की जान ली है। इस कारण से, एरो ग्लेशियर से गुजरने वाले मार्ग को कई वर्षों के लिए बंद कर दिया गया था। इसे हाल ही में[कब?] फिर से खोला गया है, लेकिन पार्क के अधिकारी उस मार्ग को ना अपनाने की सलाह देते हैं और पर्वतारोहियों से कहते हैं कि वे अपनी जिम्मेदारी से उस पर चढ़ाई कर सकते हैं। एरो ग्लेशियर मार्ग पर चढ़ाई करने के लिए, पर्वतारोहियों को सुबह तड़के ही निकल जाना चाहिए और चट्टानी सतह को मध्य दोपहर से पहले पार कर लेना चाहिए क्योंकि जब सूरज निकल आता है, तो गैर-हिमाच्छादित चट्टानी स्खलन काफी आम हो जाती है।

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