उष्णकटिबंधीय तूफान और चक्रवात

बंगाल की खाड़ी के ऊपर ऐसा तूफ़ान जिसमें गोल घूमती हुई हवाएं 74 मील (119 कि.मी) प्रति घंटा की गति से चल रही हों, उसे चक्रवात कहा जाता है; और यदि ये अटलांटिक के ऊपर चल रहा हो तो उसे हरिकेन कहा जाता है। 1970 में आये भोला चक्रवात से 1-5 लाख बांग्लादेश निवासी मारे गये थे।
2013, चक्रवात महासेन
2012, चक्रवात नीलम
2011, बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान ठाणे
2010, अति गंभीर चक्रवाती तूफान गिरि
2008, अति गंभीर चक्रवाती तूफान नरगिस
2007, अति गंभीर चक्रवाती तूफान साइड्र
2006, अति गंभीर चक्रवाती तूफान माला
1999, सुपर चक्रवाती तूफान 05बी
1996, कोणसीमा चक्रवात
1991, महाचक्रवाती तूफान 02B
1989, नवंबर टायफ़ून गे
1985, मई उष्णकटिबंधीय तूफान एक (1 बी)
1982, अप्रैल चक्रवात एक (1 बी)
1982, मई उष्णकटिबंधीय तूफान दो (2 बी)
1982, अक्टूबर उष्णकटिबंधीय तूफान तीन (3 बी)
1981, दिसम्बर चक्रवात तीन (3 बी)
1980, अक्टूबर उष्णकटिबंधीय तूफान एक (1 बी)
1980, दिसम्बर अज्ञात तूफान चार (4 बी)
1980, दिसम्बर उष्णकटिबंधीय तूफान पांच (5 ब)
1977, आंध्र प्रदेश के चक्रवात (6B)
1971, चक्रवात ओडिशा
1970, नवम्बर भोला चक्रवात
1864 कलकत्ता चक्रवात: 40 फ़ीट की तूफ़ानी सर्ज उत्पन्न की। इसमें दबाव अंकन बैरोमीटर के 28.025 इंच पहुंचा और परिणामस्वरूप 50,000 लोग मृत तथा 30,000 लोग बाद की महामारियों में मारे गये थे।
1876 बेकरगंज चक्रवात: 10 से 30-40 फ़ीट तूफ़ान सर्ज, १ लाख मृत एवं अन्य 1 लाख बाद की महामारियों से मृत
1885 का फ़ॉल्स प्वाइंट चक्रवात: 22 फ़ीट तूफ़ान सर्ज; दबाव बैरोमीटर पर 27.135 इंच पारा।

ऐतिहासिक स्थल

प्राचीन बौद्ध धरोहर स्थल पावुरल्लाकोंडा, थोटलाकोंडा एवं बाविकोंडा भारत के ओडिशा राज्य के विशाखापट्टनम नगर में खाड़ी तट पर स्थित हैं।
श्री वैशाखेश्वर मन्दिर के अवशेष बंगाल की खाड़ी के नीचे हैं। आंध्र विश्वविद्यालय के सागरीय पुरातत्त्व केन्द्र के प्रवक्ता के अनुसार ये मन्दिर अवशेष तटीय बैटरी के सामने ही कहीं स्थित होंगे।
महाबलिपुरम के तट मन्दिर परिसर का निर्माण 8वीं शताब्दी में हुआ था। मिथकों के अनुसार यहां छः और ऐसे ही मन्दिर हुआ करते थे।
इनके अलावा एक अन्य संरक्षित ऐतिहासिक स्थल है विवेकानंदार इल्लम। इसका निर्माण 1842 में आइस किंग फ़्रेडरिक ट्यूडर ने बर्फ़ को भंडार करने एवं वर्ष भर बेचने के लिये किया था। यहां स्वामी विवेकानंद के कई प्रसिद्ध व्याख्यान कैसल कर्नेन में हुए थे। इस स्थल पर एक प्रदर्शनी स्वामी जी एवं उनकी धरोहरों को समर्पित है।
ओडीशा के प्रसिद्ध कोणार्क सूर्य मंदिर का भी निर्माण इसी खाड़ी के तट के निकट हुआ है। यह मंदिर हिन्दू भगवान सूर्य नारायण को समर्पित है और इसक निर्माण 1200 ई. के मध्य में हुआ था। यह काले ग्रेनाइट पत्थर से बना हुआ है।
धनुषकोडि में पम्बन द्वीप पर स्थित हिन्दू धर्म के चार धामों में से एक महातीर्थ रामेश्वरम रामनाथस्व्मी मन्दिर भी इसी खाड़ी के हिन्द महासागर से संगम के निकटस्थ स्थित है।
बंगाल की खाड़ी के हिन्द महासागर एवं अरब सागर संगम (त्रिवेणी संगम) पर ही हिन्दू तीर्थ कन्याकुमारी स्थित है। यह स्थान तमिल नाडु में आता है।
जर्मन रोसैट अंतरिक्षयान ने बंगाल की खाड़ी के ठीक ऊपर ही पृथ्वी के वातावरण में वापस प्रवेश किया था। जर्मन अंतरिक्ष एजेंसी (DLR) ने इसकी पुष्टि की थी।

अर्थ-व्यवस्था

बंगाल की खाड़ी में व्यापार करने वाले पहले उद्योगों में कम्पनी ऑफ़ मर्चेन्ट्स ऑफ़ लंडन थे जिन्हें कालांतर में ईस्ट इंडिया कंपनी कहा गया। गोपालपुर, ओडिशा प्रमुख व्यापार केन्द्र बना था। इनके अलावा खाड़ी तट पर सक्रिय रही अन्य व्यापारिक कम्पनियों में इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी एवं फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी थीं।
BIMSTEC अर्थात बे ऑफ़ बंगाल इनिशियेटिव फ़ॉर मल्टीसेक्टोरल टेक्निकल एण्ड इकॉनिमिक कोऑपरेशन (यानि बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग हेतु बंगाल की खाड़ी में पहल) के सहयोग द्वारा बंगाल की खाड़ी के निकटवर्ती राष्ट्रों जैसे भारत, बांग्लादेश, बर्मा, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार एवं थाईलैण्ड में मुक्त अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार संभव हुआ है।
एक नयी सेतुसमुद्रम जहाजरानी नहर परियोजना प्रस्तावित है जिसके द्वारा मन्नार की खाड़ी को बंगाल की खाड़ी से पाक जलडमरूमध्य से होते हुए जोड़ा जायेगा। इस परियोजना के पूरा होने से भारत में पूर्व से पश्चिम का व्यापारिक समुद्री आवागमन बिना श्रीलंका की लम्बी परिक्रमा के सुलभ हो जायेगा। अभी इस जलडमरूमध्य में छिछला सागर है और चट्टानें हैं जिनके कारण यहां से जहाजों का आवागमन संभव नहीं होता है।
बंगाळ की खाड़ी की तटरेखा के समीपी क्षेत्रों में मछुआरों की ढोनी और कैटामरान नावें घूमती रहती हैं। यहां मछुआरे सागरीय मछलियों की 26 से 44 प्रजातियों को पकड़ पाते हैं। बंगाल की खाड़ी से एक वर्ष में कुल पकड़ी गयी मछलियों की औसत मात्रा 20 लाख टन तक पहुंचती है। विश्व के कुल मछुआरों का लगभग 31% इसी खाड़ी पर निर्भर है और यहीं रहता है।

बंगाल की खाड़ी के सामरिक महत्व

बंगाल की खाड़ी मध्य पूर्व से फिलिपींस सागर तक के क्षेत्र के बीचोंबीच स्थित है। वैमानिक सामरिक महत्त्व को देखें तो भी यह क्षेत्र के प्रमुख विश्व वायु मार्गों के बीच में स्थित है। यह दो वृहत आर्थिक खण्डों सार्क और आसियान के बीच आती है। इसके उत्तर में चीन का दक्षिणी भूमिबद्ध क्षेत्र होने के साथ साथ भारत और बांग्लादेश के प्रमुख बंदरगाह भी बने हैं। इन दोनों ही राष्ट्रों में आर्थिक उत्थान होता जा रहा है, हालांकि ये जनतंत्र हैं। गहरे सागर में आतंकवाद की रोकथाम करने के उद्देश्य से भारत, चीन और बांग्लादेश ने मलेशिया, थाईलैंड और इंडोनेशिया से नौसैनिक सहयोग के समझौते किये हुए हैं।
भारत के लिये बंगाल की खाड़ी सामरिक दृष्टि से अति महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि उसका प्रभाव क्षेत्र खाड़ी के प्राकृतिक विस्तार में ही आता है। दूसरे मुख्य भूमि से दूरस्थ अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह इसी खाड़ी द्वारा भारत से जुड़े हैं। तीसरे भारत के कई प्रमुख महत्त्वपूर्ण बंदरगाह जैसे कोलकाता चेन्नई, विशाखापट्टनम और तूतीकोरिन बंगाल की खाड़ी में ही स्थित है।
हाल ही में चीन ने इस क्षेत्र में प्रभाव डालने की दृष्ति से म्यांमार एवं बांग्लादेश से गठजोड़ समझौते के भी प्रयास आरंभ किये हैं। यहीं संयुक्त राज्य ने भी भारत, बांग्लादेश, मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड के संग विभिन्न बड़े अभ्यास भी किये हैं। बंगाल की खाड़ी का अब तक का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास मालाबार 2007, वर्ष 2007 में हुआ था। इसमें संयुक्त राज्य, सिंगापुर, जापान और ऑस्ट्रेलिया से सामरिक जलपोत आये थे। इस अभ्यास में भारत भि प्रतिभागी था। क्षेत्र में प्राकृतिक गैस के बड़े भण्डार की संभावना पर भी भारत की नज़र है। यहाम के तेल एवं गैस भंडारों पर अधिकार के मामले को लेकर भारत एवं म्यामार के बांग्लादेश से संबंधों में कुछ खटास भी आ चुकी है।

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