हाइड्रोजन पेरॉक्साइड के उपयोग

‘हाइड्रोजन परॉक्साइड (H2O2) एक बहुत हल्का नीला, पानी से जरा सा अधिक गाढ़ा द्रव है जो पतले घोल में रंगहीन दिखता है। इसमें आक्सीकरण के प्रबल गुण होते हैं और यह एक शक्तिशाली विरंजक है। इसका इस्तेमाल एक विसंक्रामक, रोगाणुरोधक, आक्सीकारक और रॉकेट्री में प्रणोदक के रूप में किया जाता है। हाइड्रोजन परॉक्साइड की आक्सीकरण क्षमता इतनी प्रबल होती है कि इसे आक्सीजन की उच्च प्रतिक्रिया वाली जाति समझा जाता है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड जीवों में आक्सीकरण चयापचय के उपोत्पाद के रूप में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होता है। लगभग सभी जीवित वस्तुओं (विशेषकर, सभी आब्लिगेटिव और फेकल्टेटिव वातापेक्षी जीव) में परॉक्सिडेज नामक एन्ज़ाइम होते हैं जो बिना हानि पहुंचाए और उत्प्रेरण द्वारा उदजन परूजारक की छोटी मात्राओं को पानी और आक्सीजन में विघटित करते हैं।

उपयोग

औद्योगिक उपयोग
विश्व भर के 1994 में हाइड्रोजन परॉक्साइड के उत्पादन का करीब 50% भाग लुगदी और कागज की ब्लीचिंग में इस्तेमाल किया गया। अन्य ब्लीचिंग प्रयोग भी अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं क्योंकि हाइड्रोजन परॉक्साइड को क्लोरीन पर आधारित ब्लीचों की अपेक्षा पर्यावरण के लिये बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड के अन्य बड़े औद्यौगिक प्रयोगों में सोडियम परकार्बोनेट और सोडियम परबोरेट का उत्पादन शामिल है, जिन्हें लाँड्री डिटर्जेंटों में हल्के विरंजकों के रूप में प्रयोग किया जाता है। यह कुछ कार्बनिक परॉक्साइडों जैसे डाईबेंजाइल परॉक्साइड के उत्पादन में प्रयोग किया जाता है जो पॉलिमरीकरण और अन्य रसायनिक प्रक्रियाओं में काम आता है। हाइड्रोजन परॉक्साइड का प्रयोग इपॉक्साइडों जैसे प्रोपाइलीन आक्साइड के उत्पादन में भी होता है। कॉर्बॉक्सिलिक एसिड से प्रतिक्रिया से संबंधित परॉक्सी एसिड बनता है। परएसिटिक एसिड और मेटा-क्लोरोपरॉक्सीबेंजॉइक एसिड (संक्षिप्त में mCPBA) क्रमशः एसिटिक एसिड और मेटा -क्लोरोबेंजॉइक एसिड से बनते हैं। द्वितीय यौगिक की अक्सर अल्कीनों से प्रतिक्रिया से संबंधित इपॉक्साइड प्राप्त होता है।
PCB उत्पादन क्रिया में हाइड्रोजन परॉक्साइड और सल्फ्यूरिक एसिड का मिश्रण तांबे की सतह को खुरदुरा करने के लिये माइक्रोएच रसायन के रूप में काम में लाया जाता है।
पाउडर किये हुए बहुमूल्य धातु पर आधारित उत्प्रेरक, हाइड्रोजन परॉक्साइड, मेथेनॉल और पानी का मिश्रण एक से दो सेकंड में सुपरहीटेड भाप का उत्पादन कर सकता है जिससे केवल CO2 और उच्च तापमान वाली भाप कई उद्धेश्यों के लिये प्राप्त की जा सकती है।
हाल में औषधिक उत्पादन में हाफ-सूट और ग्लोव-पोर्ट आइसोलेटरों में वैलिडेशन औऱ बायो-डीकंटामिनेशन के लिये वाष्पीकृत हाइड्रोजन परॉक्साइड का प्रयोग बढ़ गया है।
परमाणु प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टरों (PWRs) में हाइड्रोजन परॉक्साइड संयंत्र के शट-डाउन के समय ईंधन पर जमे एक्टीवेटेड जंग उत्पादों के आक्सीकरण और विलयन के लिये किया जाता है। रिएक्टर को अलग करने के पहले जंग उत्पादों को निकाल दिया जाता है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड को तेल और गैस खोज उद्योग में भी सूक्ष्म-जीवाष्म विश्लेषण की तैयारी करते समय रॉक मैट्रिक्स के आक्सीकरण में प्रयोग में लाया जाता है।
रसायनिक उपयोग
हाइड्रोजन परॉक्साइड से प्रोपाइलिन आक्साइड बनाने के एर तरीके का विकास किया गया है। यह विधि पर्यावरण के लिये अच्छी समझी जाती है क्योंकि इसका मुख्य उपोत्पाद केवल पानी ही है। यह भी दावा किया गया है कि इस विधि में निवेश और चलाने की लागत काफी कम है। 2008 में इस तरह के दो “HPPO” (हाइड्रोजन परॉक्साइड से प्रोपाइलिन आक्साइड) संयंत्र चालू किये गए: इनमें से एक बेल्जियम में सॉल्वे और डो-BASF का संयुक्त उपक्रम है और दूसरा कोरिया में इवोनिक हेडवाटर्स और एसके केमिकल्स का संयुक्त उपक्रम है। हाइड्रोजन परॉक्साइड के लिये एक कैप्रोलैक्टम प्रयोग का व्यावसायीकरण किया गया है। हाइड्रोजन परॉक्साइड का प्रयोग करके फिनॉल और एपिक्लोरोङाइड्रिन बनाने के उपाय सोचे जा रहे हैं।
जैविक क्रिया
बॉम्बॉर्डियर बीटल की रक्षा के लिये उपलब्ध दो मुख्य रसायनों में से एक हाइड्रोजन परॉक्साइड है, जो शिकारियों को परे रखने के लिये हाइड्रोक्विनोन से प्रतिक्रिया करता है।
नेचर में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार हाइड्रोजन परॉक्साइड रोगक्षम तंत्र में भूमिका निभाता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि ज़ेबरा मछली के ऊतकों में चोट लगने पर हाइड्रोजन परॉक्साइड निकलती है जो श्वेतरक्तकणों को उस स्थान पर जमा होने और जख्म को सुखाने की प्रक्रिया शुरू करने का संकेत करती है। जब हाइड्रोजन परॉक्साइड को उत्पन्न करने वाले जीनों को निरस्त कर दिया गया तो उस स्थान पर श्वेतरक्तकण जमा नहीं हुए. ये प्रयोग मछलियों पर किये गए थे लेकिन चूंकि जीनविज्ञान के अनुसार मछलियां मनुष्यों से मिलती हैं इसलिये मनुष्यों में भी यही प्रक्रिया होने का अनुमान है। नेचर में दिये गए अध्ययन के अनुसार दमे के रोगियों के फेफड़ों में स्वस्थ लोगों की अपेक्षा हाइड्रोजन परॉक्साइड के अधिक उच्च स्तर होते हैं, जिसे दमे के रोगियों के फेफड़ों में श्वेतरक्त कणों के असामान्य स्तरों के आधार पर समझा जा सकता है।

घरेलू उपयोग
विरल H2O2 (3% से12%) का प्रयोग अमोनियम हाइड्रॉक्साइड में मिलाकर मनुष्यों के बालों को ब्लीच करने के लिये किया जाता है – इससे “परॉक्साइड ब्लाँड” नामक मुहावरा बना है।
त्वचा से संपर्क में आने पर इसका अवशोषण होता है जिससे स्थानिक त्वचा केशिका अंतःशल्यता होती है जो त्वचा के अस्थायी श्वेतपन के रूप में दिखाई देती है।
इसे प्रदर्शन के लिये रखी जाने वाली हड्डियों को सफेद करने में काम में लाया जाता है।
3% H2O2 को चिकित्सकों द्वारा जख्मों को साफ करने, मृत ऊतकों को निकालने और मौखिक क्षतशोधक के रूप में काम में लाया जाता है। परॉक्साइड जख्म के धीमे (छोटी रक्तनलिकाओं के) रक्तस्राव को भी रोकता है। हालांकि, हाल ही के अध्ययन का सुझाव दिया है कि हाइड्रोजन परॉक्साइड कोशिकाओं बाधा scarless त्वचा उपचार के रूप में इसे नष्ट कर देता नवगठित. सबसे ऊपर-the-काउंटर परॉक्साइड समाधान घूस के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
यदि कुत्ते ने किसी हानिकारक पदार्थ (चूहे का जहर) को निगल लिया हो तो उसे उल्टी कराने के लिये छोटी मात्रा में हाइड्रोजन परॉक्साइड दिया जा सकता है।
3% H2O2 कपड़ों और अन्य वस्तुओं पर से खून के ताजे (लाल) धब्बे निकालने में असरकारी है। इसे खून के धब्बों के गर्म पानी से “सेट” हो जाने के पहले कपड़ों पर लगा देना चाहिये। इसके बाद ठंडे पानी और साबुन का इस्तेमाल करके परॉक्साइड से उपचारित खून को निकालना चाहिये।
संयुक्त राज्य फुड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने हाइड्रोजन परॉक्साइड को मछली और उसके अंडों पर फफूंदी के नियंत्रण के लिये निम्न नियंत्रक प्राथमिकता औषधि (LRP) के रूप में वर्गीकृत किया है।
कुछ बागबानी विशेषज्ञ और हाइड्रोपोनिक्स के प्रयोग करने वाले पानी के घोलों में हल्के हाइड्रोजन परॉक्साइड घोल (स्पैनिश पानी) का प्रयोग करने की सलाह देते हैं। इसके स्वतः विघटन से आक्सीजन निकलती है जो पौधे की जड़ के विकास को बढ़ावा देती है और जड़ की सड़न (आक्सीजन की कमी से जड़ की कोशिकाओं की मृत्यु) और कई अन्य कीटों का उपचार में मदद करती है। इन दावों के समर्थन में कई शोध हुए हैं।
मछली उत्पादकों द्वारा प्रयोगशाला में की गई परीक्षाओं में दर्शाया गया है कि घरेलू हाइड्रोजन परॉक्साइड को छोटी मछलियों को आक्सीजन देने के लिये सुरक्षित रूप से प्रयोग में लाया जा सकता है। हाइड्रोजन परॉक्साइड मैंगनीज डाई आक्साइड जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में विघटित होकर आक्सीजन छोड़ती है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड गंदे पानी के संग्रहण और उपचार तंत्रों में सल्फाइड और कार्बनिक बदबू को नियंत्रित करने वाला शक्तिशाली आक्सीकारक है। यह गंदे पानी के तंत्र में तब डाला जाता है जब हाइड्रोजन सल्फाइड निकलने में 30 मिनट से 5 घंटों का समय उपलब्ध हो। हाइड्रोजन परॉक्साइड हाइड्रोजन सल्फाइड को आक्सीकृत करता है और कार्बनिक गंधों का बायो-आक्सीकरण करता है। हाइड्रोजन परॉक्साइड आक्सीजन और पानी में विघटित हो जाता है और घुली हुई आक्सीजन को तंत्र में छोड़ देता है जिससे जैव-रसायनिक आक्सीजन मांग (BOD) कुछ कम हो जाती है।
बेकिंग सोडा और हाथ धोने के साबुन की थोड़ी सी मात्रा में मिला देने पर हाइड्रोजन परॉक्साइड गंदी बदबू को दूर करने में असरदार होती है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड को फिनाइल आक्जलेट एस्टर और एक उचित डाई के साथ चमकने वाली छड़ों में आक्सीकारक के रूप में प्रयोग में लाया जाता है। यह एस्टर से प्रतिक्रिया करके अस्थिर CO2 डाइमर बनाता है जो उत्तेजित अवस्था में डाई को उत्तेजित करता है; डाई एक फोटॉन (प्रकाश) छोड़ती है और स्वतः अपनी सामान्य दशा में लौट जाती है।

औषधिक उपयोग
हाइड्रोजन परॉक्साइड को FDA द्वारा जीवाणुनाशक, आक्सीकारक व अन्य प्रयोगों के लिये आम तोर पर सुरक्षित माना (GRAS) गया है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड कई वर्षों से रोगाणुरोधक और जीवाणुनाशक के रूप में प्रयोग में लाया जाता रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में आसानी से काउंटर पर उपलब्घ उत्पादनों की लोकप्रियता के कारण इसका प्रयोग घट गया है, फिर भी यह अभी भी कई अस्पतालों, डाक्टरों और दंतचिकित्सकों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।
सभी आक्सीकारक रोगाणुरोधकों की तरह हाइड्रोजन परॉक्साइड भी खुले जख्मों में ऊतकों को हल्का नुकसान करता है, लेकिन केशिका के रक्तस्राव (छिले हुए जख्म में से छोटी रक्त नलियों में से धीरे से रक्त बहना) को तेजी से रोकने में यह असरकारी होता है और इसके लिये व जख्म को साफ करने के लिये कभी-कभी काम में लाया जाता है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड का प्रयोग सही मात्रा में बेकिंग सोडा और नमक में मिला कर टूथपेस्ट के रूप में किया जा सकता है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड और बेंजाइल परॉक्साइड को कभी-कभी मुहांसों के इलाज में प्रयोग किया जाता है।
हाइड्रोजन परॉक्साइड को पशुचिकित्सकों द्वारा वमनकारक के रूप में उपयोग में लाया जाता है।
वैकल्पिक उपयोग
अमेरिकन कैंसर सोसायटी के कथनानुसार “इस बात का कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है कि हाइड्रोजन परॉक्साइड कैंसर के लिये सुरक्षित, असरदार या उपयोगी इलाज है” और उसकी कैंसर के रोगियों के लिये सलाह है कि “वे योग्यतापूर्ण डाक्टरों की निगरानी में रहें जो इलाज के सत्यापित तरीके और नए तरीकों के अनुमोदित क्लिनिकल परीक्षाओं का इस्तेमाल करते हैं।”
एक और विवादास्पद वैकल्पिक मेडिकल विधि करीब 1% सांद्रता के हाइड्रोजन परॉक्साइड को सांस से अंदर लेना है। उच्च सांद्रता के हाइड्रोजन परॉक्साइड के भीतरी प्रयोग से जानलेवा रक्तविकार हो सकते हैं और हाल में इसका उपचार के रूप में प्रयोग कई मौतों से जोड़ा गया है।

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