पटाखों के कारण होने वाले ध्वानि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं ?

भारत सरकार ने पटाखों से होने वाले ध्वूनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के प्रयास के रूप में दिनांक 5 अक्टू्बर, 1999 के जी.एस.आर. 682(ई) के तहत पटाखों के लिए ध्वनि मानकों को अधिनियमित किया। हाल में मार्च 2001 में राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (एनपीएल), दिल्ली के सहयोग से केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बाजार में उपलपब्ध पटाखों के ध्वनि के स्तरों की माप के लिए एक अध्ययन आरंभ किया। यह अध्ययन दर्शाता है कि 95 प्रतिशत पटाखों के नमूने में निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक ध्वनि थी। फलस्वरूप सीपीसीबी ने निर्धारित सीमा से अधिक ध्वनि वाले पटाखों का विनिर्माण नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाने हेतु विस्फोटक विभाग, नागपुर को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत नोटिस जारी किया। सभी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों/समितियों से अपने संबंधित स्थानीय प्रशासकों के परामर्श से अधिसूचित सीमा से अधिक के पटाखे की बिक्री नियंत्रित करने हेतु कदम उठाने के लिए अनुरोध किया गया।

जेनरेटर सेंटों से ध्वानि प्रदूषण को रोकने के लिए कया कदम उठाए गए हैं ?
इंडियन इंस्ट्यूट ऑफ साइंस, बंगलौर के सहयोग से केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने डीजल जेनरेटर सेटों तथा पेट्रोल/केरोसिन जेनरेटर सेटों से ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रणाली विकसित किया था। इसके आधार पर डीजल और पेट्रोल/केरोसिन जेनरेटर सेटों के लिए ध्वनि के स्तर विकसित और अधिसूचित किए गए।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा कौन-कौन से कानून लागू किऐ जाते हैं ?
जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 197 को लागू करने के लिए केन्द्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों का गठन किया गया। पिछले वर्षों में बोर्डों को अतिरिक्त जिममेदारी भी सौंपी गई है जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं –
जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) उपकर अधिनियम, 1977
वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और इसके अधीन बने नियम
खतरनाक अपशिष्ट (प्रबंधन एवं संचलन) नियमावली,1989
खतरनाक रसायनों का विनिर्माण, भंडारण और आयात नियमावली, 1989
जैव-चिकित्सा अपशिष्ट (प्रबंधन एवं संचलन) नियमावली, 1998
नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन एवं संचलन) नियमावली, 2000.
प्लास्टिक अपशिष्ट नियमावली, 1999 तटीय विनियमन जोन नियमावली, 1991
सार्वजनिक देयता बीमा अधिनियम, 1991
कौन से औद्योगिक प्रदूषण कार्यक्रम विद्यमान हैं जो दीर्घकालिक विकास पर आधारित है?
औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण जिसमें दीर्घकालिक विकास की अवधारणा शामिल है, निम्नलिखित हैं –
उद्योगों द्वारा पर्यावरणीय लेखा परीक्षा करना तथा वार्षिक पर्यावरणीय विवरण प्रस्तुत करना।
प्रदूषण वाले नए उद्योगों को स्थापित करने से पहले ईआईए अध्ययन कराना।
स्वच्छ प्रौद्योगिकी में परिवर्तन करना जैसे क्लोर एलकली संयंत्रों में मर्कनी सेल से मेम्ब्रेन सेल में परिवर्तन करना।
उद्योगों के स्थानों के एटलस का जोन बनाना और
पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की ईको-लेबलिंग करना।

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