चाँद और मंगल के बाद कौन से ग्रह पर इंसान जाने की कोशिश करेंगे?

सौर मंडल में सूर्य और वह खगोलीय पिंड सम्मलित हैं, जो इस मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बंधे हैं। किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को ग्रहीय मण्डल कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल।हमारे सूरज और उसके ग्रहीय मण्डल को मिलाकर हमारा सौर मण्डल बनता है।इन पिंडों में आठ ग्रह, उनके 172 ज्ञात उपग्रह, पाँच बौने ग्रह और अरबों छोटे पिंड शामिल हैं। इन छोटे पिंडों में क्षुद्रग्रह, बर्फ़ीला काइपर घेरा के पिंड, धूमकेतु, उल्कायें और ग्रहों के बीच की धूल शामिल हैं।
सौर मंडल में सूर्य और वह खगोलीय पिंड सम्मलित हैं, जो इस मंडल में एक दूसरे से गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा बंधे हैं। किसी तारे के इर्द गिर्द परिक्रमा करते हुई उन खगोलीय वस्तुओं के समूह को ग्रहीय मण्डल कहा जाता है जो अन्य तारे न हों, जैसे की ग्रह, बौने ग्रह, प्राकृतिक उपग्रह, क्षुद्रग्रह, उल्का, धूमकेतु और खगोलीय धूल।
सौर मंडल के चार छोटे आंतरिक ग्रह बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल ग्रह जिन्हें स्थलीय ग्रह कहा जाता है, जो मुख्यतया पत्थर और धातु से बने हैं। और इसमें क्षुद्रग्रह घेरा, चार विशाल गैस से बने बाहरी गैस दानव ग्रह, काइपर घेरा और बिखरा चक्र शामिल हैं। काल्पनिक और्ट बादल भी सनदी क्षेत्रों से लगभग एक हजार गुना दूरी से परे मौजूद हो सकता है। सूर्य से होने वाला प्लाज़्मा का प्रवाह (सौर हवा) सौर मंडल को भेदता है। यह तारे के बीच के माध्यम में एक बुलबुला बनाता है जिसे हेलिओमंडल कहते हैं, जो इससे बाहर फैल कर बिखरी हुई तश्तरी के बीच तक जाता है। बुध सूर्य के बहुत पास है। सूर्य के विकिरण के कारण बुध पर कोई वायुमंडल नहीं है। इसके अलावा बुध का एक मुख सदा सूर्य की ओर रहता है, जहां तापमान बहुत अधिक होता है।वहीं दूसरी ओर तापमान शून्य से भी बेहद कम रहता है।
शुक्र सौरमंडल का सबसे गरम ग्रह है। इसकी सतह पर परिस्थितियां बेहद विषम हैं। यहाँ तेजाब की बारिश होना आम है। शुक्र की सतह पर उतारे गए यान कुछ मिनट से ज़्यादा नहीं टिक पाए हैं। इसीलिए यहाँ इंसान का जाना करीब नामुमकिन है।
मेरे मत में मंगल के बाद इंसान शनि के सबसे बड़े उपग्रह, टाइटन पर जाने की कोशिश करेंगे। पृथ्वी के अलावा सौर मंडल में यही एक जगह है जहां सतह पर तरल रूप में नदियाँ और सागर मौजूद हैं। यहाँ तरल मिथेन की नदियाँ बहती हैं और हाइड्रोकार्बन भारी मात्रा में मौजूद हैं। हाइड्रोकार्बन जीवन का मूल हैं इसलिए यहाँ आदिम जीवन मिलने की संभावना भी अधिक है।
नासा द्वारा यहाँ यान भेजे जा चुके हैं, और उससे मिली तस्वीरों में पहाड़, नदी इत्यादि समेत पृथ्वी जैसी चीजें देखी गई हैं।
यहाँ का वायुमंडल भी पृथ्वी की तरह नाइट्रोजन युक्त है। इसकी सतह पर बर्फ़ की परत भी है जिसके नीचे पानी के समुद्र की संभावना है। टाइटन की सतह पर दबाव पृथ्वी का 1.5 गुना है, और तापमान -200 C से कम रहता है।

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